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री इवैल्युएशन से क्यों पीछे हट रही है CBSE, एक-एक अंक है कीमती

Thu, 22 Jun 2017 06:10 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली
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हाईकोर्ट ने कहा है कि परीक्षा में एक-एक अंक का महत्व होता है और छात्र को इस एक अंक के कारण अपने मनपसंद पाठ्यक्रम में दाखिला नहीं मिल पाता। एक भी छात्र के अंक में गलती से उसका भविष्य दांव पर लग जाता है। अदालत ने उक्त टिप्पणी करते हुए सीबीएसई से कहा कि आखिर आप उत्तर पुस्तिका के पुन: मूल्यांकन से पीछे क्यों हट रहे हैं।   
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न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा और न्यायमूर्ति एके चावला की खंडपीठ ने सीबीएसई की और से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल संजय जैन को पेश उत्तर पुस्तिका दिखाते हुए कहा कि इनमें सही सवालों के जवाब के बावजूद शून्य अंक दिए गए हैं। सीबीएसई किस प्रकार इस प्रकार की गलती की व्याख्या करेगी। क्या ऐेसे में छात्रों को पुन: मूल्यांकन का हक नहीं है।    
   
खंडपीठ ने कहा कि आपकी गलतियों से यदि एक भी छात्र प्रभावित होता है तो उस छात्र का करियर दांव पर लग जाता है। मामूली अंक भी महत्वपूर्ण होते हैं क्योंकि इन अंकों से ही यह निर्णय होता है कि छात्र को कौन सा कॉलेज व पाठ्यक्रम मिलेगा।      
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अदालत ने सीबीएसई को अपनी गवर्निंग बॉडी और परीक्षा कमेटी द्वारा इस मुद्दे पर लिए निर्णय की प्रति पेश करने का निर्देश देते हुए सुनवाई 23 जून तय कर दी।  
   
इससे पूर्व सीबीएसई ने बताया कि परीक्षा पेपरों के पुन: मूल्यांकन के संबंध में उड़ीसा उच्च न्यायालय द्वारा दिए गए आदेश पर समीक्षा याचिका दायर की गई है। संभवत: इस समीक्षा याचिका पर वहां शुक्रवार को सुनवाई हो। इसके अलावा मार्किंग प्रक्रिया की जांच के लिए कमेटी गठित की है।

याचिकाकर्ता छात्रों के अधिवक्ता ने अदालत के समक्ष मार्किंग स्कीम की कॉपी और कुछ छात्रों की उत्तर पुस्तिका पेश करते हुए कहा कि इन में कई विसंगतियां है। उन्होंने कहा यह प्रक्रिया ठीक नहीं है ऐेसे में छात्रों को उत्तर पुस्तिका के पुन:मूल्यांकन की इजाजत दी जाए।    
  
उडीसा हाईकोर्ट ने हाल ही में सीबीएसई को निर्देश दिया था कि वह 100 से ज्यादा छात्रों की उत्तर पुस्तिका का पुन: मूल्यांकन करे। इन छात्रों ने 12वीं कक्षा की परीक्षा दी थी और आरोप लगाया था कि उन्हें काफी कम अंक प्रदान किए गए हैं और वे अपने पेपरों को पुन:मूल्यांकन करना चाहते हैं, जबकि सीबीएसई ने पुन:मूल्यांकन प्रक्रिया खत्म होने का तर्क देकर उनका आग्रह ठुकरा दिया था। दिल्ली व सऊदी अरब के छात्रों ने इसी आदेश को आधार बनाकर अपने पेपरों का पुन:मूल्यांकन करने का निर्देश देने का आग्रह किया है। 
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