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यूएन महासचिव एंटोनियो गुत्रस ने क्यों कहा कि हमारे समाज पर पुरुषों का वर्चस्व है, जानिये

Sat, 24 Nov 2018 02:46 PM IST
जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली 
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UN Secretary-General Antonio-Guterres
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महिलाओं के प्रति हिंसा उन्मूलन के अंतरराष्ट्रीय दिवस यानी 25 नवंबर के लिए जारी अपने संदेश में संयुक्त राष्ट्र संघ (यूएनओ) के महासचिव ने एंटोनियो गुटेरेस ने साफ तौर से कहा है कि आज भी हमारे समाज पर पुरुषों का वर्चस्व है। महिलाओं को कई तरीकों से हिंसा के सामने लाचार कर दिया जाता है, जिससे हम उन्हें बराबरी का दर्जा नहीं देते। 
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महिलाओं के साथ हिंसा का सीधा संबंध हमारे समाज में सत्ता और नियंत्रण के व्यापक मुद्दों से है। वैश्विक स्तर पर महिलाओं और लड़कियों के साथ हिंसा समाप्त करने के लिए यूएन ने इस साल 'Orange the world: #HearMeToo’ ...अभियान शुरू किया है। इसका मकसद #HearMeToo विषय के तहत हिंसा झेल चुकी महिलाओं, लड़कियों और उनके हिमायतियों के प्रति हमारा समर्थन उजागर करना है।

एंटोनियो गुटेरेस का कहना है कि महिलाओं और लड़कियों के साथ हिंसा की समस्या दुनिया भर में फैली हुई है। यह हिंसा महिलाओं का नैतिक अपमान तो है ही, इसके अलावा हमारे सभी समाजों के लिए एक कलंक भी है। यह बुराई समाज के समावेशी, समतामूलक और संवहनीय विकास में एक प्रमुख बाधा है। इस हिंसा का मूल कारण पुरुषों में महिलाओं के प्रति सम्मान के भाव का घोर अभाव होना है। पुरुष द्वारों महिलाओं में निहित बराबरी और गरिमा को मान्यता ही नहीं दी जाती है। ऐसे में यह मुद्दा बुनियादी मानवाधिकारों का हो जाता है। 
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अधिकतर महिलाओं को किसी न किसी मोड़ पर यौन उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है

यूएन महासचिव ने कहा, अधिकतर महिलाओं को अपने जीवन के किसी न किसी मोड़ पर यौन उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है। वर्तमान दौर में सभी क्षेत्रों और समाज के तमाम वर्गों की महिलाएं जिस तरह से इस बारे में सार्वजनिक जानकारी दे रही हैं, उससे समस्या की भयावहता उजागर होती है। #HearMeToo हैशटैग यह स्पष्ट संदेश देने के लिए चुना गया है कि महिलाओं और लड़कियों  के साथ हिंसा अब बंद होनी चाहिए। इसमें हम सबको अपनी भूमिका निभानी है। जब तक हमारी आधी आबादी यानी महिलाएं एवं लड़कियां... भय, हिंसा और रोजाना सामने आने वाली असुरक्षा की भावना से मुक्त होकर नहीं जी पाती, तब तक हम सही मायनों में नहीं कह सकते कि हम एक स्वतंत्र और समान विश्व में जीते हैं।

भारत में महिलाओं की स्थिति पर एक नजर

जॉर्ज टाउन इंस्टिट्यूट ग्लोबल रैंकिंग ऑफ वूमेन इंक्लूजन एंड वेल बींग, की रिपोर्ट में भारत का नंबर 131 वां है। इस सर्वे रिपोर्ट में कुल 152 देश शामिल किए गए हैं। टॉप 5 देशों में आयरलैंड, नार्वे, स्विटजरलैंड, सलोवेनिया और स्पेन हैं। भारत के पड़ोसी देशों की स्थिति को देखें तो पाकिस्तान 150, अफगानिस्तान 152, बांग्लादेश 127, म्यांमार 119, भूटान 108, नेपाल 85, चीन 87 और श्रीलंका 97 वें स्थान पर है। 

साल 2012 के दौरान भारत में एक लाख महिलाओं के पीछे अपराध होने की दर 41.7 फीसदी थी, जबकि 2016 में यह दर बढ़ कर 55.2 फीसदी हो गई है। अगर दस साल पहले यानी 2007 की बात करें तो भारत में हर घंटे 21 महिलाओं के साथ अपराध की घटनाएं होती थी, 2016 में यह आंकड़ा बढ़कर 39 हो गया है।

साल     महिलाओं के साथ अपराध की घटनाएं 
2013         309546 
2014         339457
2015         329243
2016         338954 
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भारत में अभी तक राष्ट्रीय विधायिका में केवल 12 फीसदी महिलाएं

महिलाओं का विधायिका में प्रतिनिधित्व, यदि इस मुद्दे पर बात की जाए तो भारत में केवल 12 फीसदी महिलाएं ही राष्ट्रीय विधायिका में स्थान पा सकी हैं। खास बात है कि जनसंख्या में महिलाओं का प्रतिशत 48 है। आयरलैंड, नार्वे, स्विटजरलैंड, सलोवेनिया और स्पेन की विधायिका तीस फीसदी सीटों पर महिलाएं हैं। न्यूजीलैंड में 38 फीसदी महिलाओं का संसदीय सीटों पर कब्जा है। अमेरिका में सीनेट के दोनों सदनों को देखें तो महिलाओं का प्रतिशत 22 है।

दुनिया में महिलाओं का विधायिका में प्रतिनिधित्व, टॉप 10 श्रेणी में शामिल हैं ये देश


देश       निम्न हाउस         सिंगल हाउस महिलाएं   उपरी सदन     महिलाएं      
रवांडा        80 सीट                       49                       26             10 
क्यूबा         605                            605                      ...               ...        
बोलिविया    130                           69                       36             17  
मेक्सिको      500                         241                      128             63 
ग्रेनेडा         15                               07                       13              04 



नोट: भारत का नंबर इस सूची में 152 वें स्थान पर है
 
भारत में फलहाल निम्न सदन यानी लोकसभा की 542 सीटों में से 64 पर महिलाएं हैं, जबकि उपरी सदन यानी राज्यसभा में 237 सीटों में से 27 पर महिलाएं हैं।
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