कूटनीति के जानकारों का कहना है कि चीन को पीछे हटना ही होगा। उसकी सबका ध्यान खींचने और बीजिंग से ध्यान भटकाने की कोशिश पूरी हो गई है। इसलिए अब उसके सैनिक बातचीत के बाद भारतीय इलाके छोड़कर चले जाएंगे। सेना के पूर्व और वर्तमान अफसरों को यही उम्मीद भी है।
लेफ्टिनेंट जनरल (पूर्व) लखविंदर सिंह, वायुसेना के पूर्व एयर वाइस मार्शल एनबी सिंह भी यही मानते हैं। इनका कहना है कि 6 जून के बाद अच्छी खबर आएगी। पीयूष कुमार कहते हैं कि चीन को आपका (भारत) बाजार चाहिए? चीनी सामान भारत के बाजार में अच्छी खासी जगह बना चुके हैं।
भारत के तमाम उत्पादों में अब चीन से आयातित सामान लग रहे हैं। आखिर चीन भारत से लड़ाई मोल लेकर इतना बड़ा खतरा क्यों उठाना चाहेगा? वैसे भी दक्षिण एशिया में अभी चीन के हिसाब से भी भारत से टकराने का समय नहीं आया है। चीन में काम कर चुके एक भारतीय राजनयिक को भी यह एक टैक्टिकल मूव के सिवा कुछ नजर नहीं आ रहा है।
पूर्व विदेश सचिव शशांक के अनुसार राष्ट्रपति ट्रंप का खुलकर भारत के साथ आना, जी-7 में शामिल होने का न्यौता देना, चीन के लिए विदेश मंत्री माइक पोम्पियो का वक्तव्य भी पर्याप्त है। शशांक मानते हैं कि चीन पर घुसपैठ को लेकर अंतरराष्ट्रीय दबाव है। उसे पता है कि अमेरिका के साथ अभी उसके तल्ख रिश्ते और आगे भी चलेंगे।