असेंबली में बम फेंकने की योजना बनाई जा रही थी। उस समय भगत सिंह नेशनल कॉलेज लाहौर में पढ़ाई कर रहे थे। भगत को नहीं पता था कि वो लड़की जो उन्हें हर दिन आते जाते देखती और मुस्कुराती है वो उन्हें पसंद भी करती है। एक दिन सभी साथी असेंबली में बम फेंकने की योजना बना रहे थे, असेंबली में बम फेंकने के लिए भगत सिंह और सुखदेव को चुना गया। सभी साथियों ने भगत के न जाने की बात कह डाली जो सुखदेव को बुरी लग गई और उन्होंने ताना मारा कि तुम मरने से डरते हो और इसकी वजह वह लड़की है।
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भगत भी कहां चुप रहने वाले थे, उन्होंने दुबारा मीटिंग बुलाई और बम फेंकने वालों में अपना नाम जुड़वाया। और 8 अप्रैल 1929 को असेंबली में बम फेंकने की योजना बनाई गई लेकिन बम फेंकने जाने से पहले भगत सिंह ने अपने दोस्त सुखदेव को पत्र लिखा। भगत सिंह के उस पत्र को लाहौर षडयंत्र केस के सबूत के रूप में यूज किया गया।
भगत का पत्र सुखदेव के नाम
भाई, जब तुम्हे पत्र मिलेगा मैं जा चुका हूंगा- मंजिल की तरफ। मैं बहुत खुश हूं लेकिन एक दुख है, बात जो चुभ रही है वो ये कि मेरे भाई मेरे अपने भाई ने मुझे गलत समझा और गंभीर आरोप भी लगाए। आरोप वो जो मैं नहीं हूं- मैं कमजोर नहीं हूं। आज मैं पूरी तरह से संतुष्ट हूं। पहले से अधिक।
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शहीद भगत सिंह
भगत ने आगे लिखा था, मेरे खुले व्यवहार को मेरा बातूनीपन समझा गया और मेरी आत्मस्वीकृति को मेरी कमजोरी। मैं कमजोर नहीं हूं।
पत्र में उन्होंने आगे लिखा था- मैं आशाओं और आकांक्षाओं से भरपूर हूं और जीवन की आनंदमयी रंगीनियों से ओत-प्रोत हूं, पर जरूरत के वक्त सब कुछ कुर्बान कर सकता हूं और यही वास्तविक बलिदान है। ये चीजें कभी मनुष्य के रास्ते में रुकावट नहीं बन सकतीं, बशर्ते कि वह मनुष्य हो। जल्द ही तुम्हें यह प्रमाण भी मिल जाएगा।
किसी व्यक्ति के चरित्र के बारे में बातचीत करते हुए एक बात सोचनी चाहिए कि क्या प्यार कभी किसी मनुष्य के लिए सहायक सिद्ध हुआ है?
मैं कहना चाहता हूं- हां, वह मेजिनी था। तुमने पढ़ा होगा की अपनी पहली विद्रोही असफलता के बाद वह अपने मरे हुए साथियों की मौत को जब बर्दाश्त नहीं कर पा रहा था, वह पागल होने के काफी करीब था, आत्महत्या ही कर लेता लेकिन उसकी प्रेमिका के एक पत्र ने उसे मजबूत बना दिया, सिर्फ मजबूत नहीं सबसे अधिक मजबूत।
प्यार एक मानवीय अत्यंत मधुर भावना है। प्यार में आप कभी भी पाश्विक नहीं होते हैं। प्यार हमेशा मनुष्य के चरित्र को ऊपर उठाता है। सच्चा प्यार कभी भी गढ़ा नहीं जा सकता , प्यार अपने मार्ग से आता है, लेकिन कोई नहीं कह सकता कि कब तक।
हां, मैं यह कह सकता हूँ कि एक युवक और एक युवती आपस में प्यार कर सकते हैं और वे अपने प्यार के सहारे अपने आवेगों से ऊपर उठ सकते हैं, अपनी पवित्रता बनाये रख सकते हैं। मैं यहाँ एक बात साफ कर देना चाहता हूं की जब मैंने कहा था की प्यार इंसानी कमजोरी है। मैंने यह किसी साधारण आदमी के लिए नहीं कहा था। प्यार एक आदर्श स्थिति है, जहां मनुष्य प्यार-घृणा आदि के आवेगों पर काबू पा लेता है।
सुखदेव को लिखा वो पत्र काफी बड़ा है लेकिन वो आखिरी में सुखदेव से पूछते हुए लिखते हैं-
क्या मैं यह आशा कर सकता हूं कि किसी खास व्यक्ति से बैर रखे बिना तुम उनके साथ हमदर्दी रख सकते हो, जिन्हें इसकी सबसे अधिक जरूरत हो, लेकन तुम तक इन बोतों को नहीं समझ सकते जब तक तुम स्वयं उस चीज का शिकार न बनो। मैंने अपना दिल साफ कर दिया है।
तुम्हारी सफलता की कामना सहित
तुम्हारा भाई
भगत सिंह
भगत सिंह ने 5 अप्रैल 1929 को सीताराम बाजार हाउस दिल्ली, में ये पत्र लिखा था। इस खत को सुखदेव तक शिव वर्मा ने लाहौर पहुंचाया था। खत 13 अप्रैल को सुखदेव की गिरफ्तारी के दौरान जब्त किया गया और इसे लाहौर षडयंत्र केस का सबूत बना।