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Supreme Court: मृतक के बैंक खातों की जानकारी वारिसों को देने में क्या दिक्कत? केंद्र और RBI से 'सुप्रीम' सवाल

Tue, 17 Mar 2026 06:51 PM IST
Pavan न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और आरबीआई से सवाल पूछा है कि किसी भी मृतक के बैंक खाते की जानकारी उसके वारिस को क्यों नहीं दी सकती है? इसमें क्या दिक्कत हैं। दरअसल, एक याचिका के अनुसार, देश भर के बैंकों में बिना दावे वाले पैसों की रकम बहुत तेजी से बढ़ रही है।
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Supreme Court - फोटो : ANI
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार और आरबीआई से सवाल किया है कि आखिर मृत व्यक्ति के बैंक खातों की जानकारी उनके वारिसों को देने में क्या परेशानी है। कोर्ट ने साफ कहा कि इस मामले में सरकार को एक स्पष्ट और ठोस नीति बनानी होगी। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच इस मुद्दे पर सुनवाई कर रही थी। यह मामला पत्रकार सुचेता दलाल की ओर से दायर जनहित याचिका (पीआईएल) से जुड़ा है। याचिका में मांग की गई है कि ऐसे बैंक खातों की जानकारी देने का एक सिस्टम बनाया जाए, जिनमें पैसे पड़े हैं लेकिन खाता धारक अब जीवित नहीं हैं।
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सरकार को इस पर सोचकर नीति बनानी चाहिए- कोर्ट
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने एक अहम सवाल उठाया। जजों ने कहा कि अगर किसी व्यक्ति के कई अलग-अलग बैंक खातें हों और उसकी बिना वसीयत मौत हो जाए, तो उसके वारिसों को इन खातों की जानकारी कैसे मिलेगी? कोर्ट ने कहा कि जानकारी देने में क्या गलत है, सरकार को इस पर सोचकर नीति बनानी चाहिए। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि आरबीआई खुद भी एक 'सेंट्रलाइज्ड और सर्चेबल डेटाबेस' बनाने की सिफारिश कर चुका है, ताकि लोग अपने मृत परिजनों के खातों का पता लगा सकें।
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फिलहाल क्या है नियम?
वहीं केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए वकील ने कहा कि अगर कोई असली वारिस सामने आता है, तो उसे पैसा 'डिपॉजिटर एजुकेशन एंड अवेयरनेस फंड' से वापस मिल जाता है। यह फंड 2014 में आरबीआई ने बनाया था, जिसमें लंबे समय तक बिना क्लेम किए गए पैसे जमा रहते हैं। हालांकि, कोर्ट इस जवाब से पूरी तरह संतुष्ट नहीं दिखा और उसने केंद्र व आरबीआई को इस मुद्दे पर नए हलफनामे दाखिल करने को कहा है। अगली सुनवाई 5 मई को होगी।
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'बहुत तेजी से बढ़ रही है बिना दावे वाले पैसों की रकम'
याचिका में यह भी बताया गया है कि ऐसे बिना दावे वाले पैसों की रकम बहुत तेजी से बढ़ रही है। मार्च 2021 तक यह रकम करीब 39 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा हो गई थी। कोर्ट का मानना है कि अगर एक केंद्रीकृत ऑनलाइन सिस्टम बन जाए, जिसमें मृत खाताधारकों की बेसिक जानकारी (जैसे नाम, पता और आखिरी लेन-देन की तारीख) हो, तो वारिसों को अपने हक का पैसा पाने में काफी आसानी होगी और बेवजह के कानूनी झंझट भी कम होंगे।

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