गौरतलब है कि पिछले 12 दिन के दौरान देश में कोरोना संक्रमण के मामले पीक पर थे। इसके बाद नए मामलों में कमी आनी शुरू हुई। अनुमान जताया जा रहा है कि संक्रमण के मामलों के साथ मृत्युदर में भी कमी आने लगेगी, लेकिन अभी ऐसा नहीं हो रहा है। पिछले 15 दिन के दौरान अधिकतर राज्यों में मौतों का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है।
उदाहरण के तौर पर देखें तो महाराष्ट्र में सोमवार (17 मई) तक 1019 मौतें दर्ज की गईं। इनमें 289 मौतें शनिवार से सोमवार के दौरान हुईं, जबकि इससे पिछले सप्ताह के दौरान 227 लोगों ने अपनी जान गंवाई थी। वहीं, उससे पहले के सप्ताह में 484 लोगों की मौत हुई थी, लेकिन यह आंकड़ा अभी तक कोरोना की टैली में शामिल नहीं किया गया है। हालांकि, राज्य ने इनमें से 19 लोगों की जान कोरोना महामारी के चलते जाने की जानकारी दी है। पहले इन लोगों की मौत की वजह अन्य बीमारियों से बताई गई थी।
अन्य राज्यों में भी पिछले दिनों मौतों का आंकड़ा बढ़ा है। प्रशासनिक अधिकारी पिछले कई हफ्तों से ज्यादा मौतें होने की जानकारी दे रहे हैं। गौरतलब है कि कर्नाटक में मार्च के दौरान 476 लोगों ने जान गंवाई थी। इस वक्त पांच राज्यों महाराष्ट्र्र, कर्नाटक, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु पर गौर करें तो हर राज्य में औसतन 300 लोग अपनी जान गंवा रहे हैं। वहीं, मंगलवार को उत्तराखंड जैसे छोटे से राज्य में भी 223 मौतें दर्ज की गईं, जो पिछले दिनों मिले 80 मौतों के आंकड़ों से काफी ज्यादा हैं। देश के 12 राज्यों में औसतन 100 लोग रोजाना अपनी जान गंवा रहे हैं।
बता दें कि मई 2021 के दौरान कोरोना महामारी के चलते अब तक 66,866 लोगों की मौत हो चुकी है। ऐसे में मौतों के मामले में मई बेहद भयावह साबित हो रहा है, जबकि संक्रमण बढ़ने की दर अप्रैल में सबसे ज्यादा थी। अप्रैल के दौरान देशभर में संक्रमण के 70 लाख से ज्यादा नए मामले दर्ज किए गए, लेकिन मृत्युदर पर इसका असर अब दिख रहा है। सिर्फ अप्रैल के दौरान देशभर में करीब 49 हजार लोगों ने अपनी जान गंवाई थी।
जानकारी के मुताबिक, महाराष्ट्र में अब तक कुल मौतों का आंकड़ा 85 हजार के करीब पहुंच चुका है, जो अन्य राज्यों के मुकाबले काफी ज्यादा है। वहीं, इसके पड़ोसी राज्य गोवा में आबादी के मुकाबले सबसे ज्यादा मौतें दर्ज की गईं। गोवा में 10 लाख की आबादी पर 1475 मौतें हुई हैं, जबकि दिल्ली में यह आंकड़ा 1301 है। बता दें कि देश में सिर्फ इन दोनों राज्यों में 10 लाख की आबादी पर मौतों का आंकड़ा एक हजार के पार है।