1. इस समझौते के बाद भारत और अमेरिका के बीच रक्षा व्यापार और रक्षा सहयोग में बढ़ोत्तरी होगी। दोनों देश अब एक दूसरे के सबसे नजदीकी सहयोगी के रुप में काम करेंगे। वह रक्षा सहयोगी के रूप में भारत का दर्जा ऊंचा करने जा रहा है।
2. इस समझौते के बाद दोनों देश के बीच उच्च स्तरीय नई रक्षा तकनीक का आदान-प्रदान हो सकेगा। इसके फायदा मुख्य रूप से वायुसेना और नौसेना को होगा। भारत का एमटीसीआर का सदस्य बनने के बाद किसी अंतरराष्ट्रीय समझौतों की बाधा भी नहीं रह गई है।
3 अब दोनों देश समुद्री मार्ग से होने वाले व्यापार से संबंधित सूचनाएं उपलब्ध कराने में एक दूसरे का सहयोग करेंगे।
4. रक्षा सहयोग की दिशा में आगे बढ़ते हुए दोनों देशों की सेनाओं के बीच नियमित तौर पर युद्धाभ्यास होंगे। इससे दोनों देशों के साझा हित के मुद्दों मसलन आंतकवाद विरोधी अभियान, समुद्री सुरक्षा, स्पेशल ऑपरेशन, मानवीय सहयोग और आपदा राहत के लिए आवश्यक व्यवहारिक सहयोग मिल सकेगा।
5. दोनों देशों के पनडुब्बी सुरक्षा और पनडुब्बी रोधी युद्ध पर दोनों देशों की नौसेना के बीच सहमति बन गई है।