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जानिए सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार ने 'प्रदर्शनकारियों' को क्यों बताया 'पेशेवर'

Wed, 25 Apr 2018 01:07 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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इन दिनों देश में प्रदर्शन का दौर चल रहा है और जहां कहीं भी प्रदर्शन होता है प्रदर्शनकारी भी धड़ल्ले से पहुंच जाते हैं। सराकर इन्हें प्रोफेशनल प्रदर्शनकारी कह रही है और उनका मानना है कि प्रदर्शन करना ही इनका पेशा और व्यापार है।
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प्रदर्शनकारियों की वजह से देश में अशांति का माहौल बना रहता है ऐसे में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि शांति और एकता बनाए रखने के लिए कुछ खास कदम उठाए जाने जरूरी हैं। दरअसल ये सारी बात केंद्र सरकार ने सेंट्रल दिल्ली में सीआरपीसी की धारा-144 के तहत प्रतिबंधात्मक आदेश लागू किए जाने के अपने कदम के सही होने के पक्ष में कही।

 देश की राजधानी में सेंट्रल दिल्ली वीवीआईपी इलाका है जहां अधिकतर सरकारी भवन, संसद भवन, और वीआईपी निवास हैं। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से उस याचिका पर जवाब मांगा था, जिसमें इस क्षेत्र में लगातार प्रतिबंधात्मक आदेश लागू किए जाने को प्रदर्शन के मौलिक अधिकार का हनन बताया था। जस्टिस एके सिकरी और अशोक भूषण की पीठ एक एनजीओ मजदूर किसान शक्ति संगठन की इस याचिका पर सुनवाई कर रही है, जिसमें सेंट्रल और नई दिल्ली क्षेत्र में इकट्ठा होने और प्रदर्शन करने पर प्रतिबंध लगाने को चुनौती दी गई है।
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पेशेवर प्रदर्शनकारी कहने पर आपत्ति जताई

sansad
केंद्र सरकार की तरफ से एडिशन सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) तुषार मेहता ने कहा, हम ऐसे युग में हैं, जहां कुछ पेशेवर प्रदर्शनकारी सुप्रीम कोर्ट, संसद भवन, राष्ट्रपति भवन और प्रधानमंत्री निवास के बाहर प्रदर्शन करना पसंद करते हैं। ये किसी दूसरे स्थान पर प्रदर्शन करना पसंद नहीं करते। ऐसे कुछ उदाहरण हैं, जब प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था खराब होने की स्थिति बन गई थी। एक सरकार के तौर पर हमें कुछ सख्त कदम उठाने ही पड़ते हैं।

एनजीओ की तरफ से अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने एएसजी मेहता के पेशेवर प्रदर्शनकारी कहने पर आपत्ति जताई और कहा कि सरकार जनता को रामलीला मैदान या पश्चिमी दिल्ली में नरेला जाकर प्रदर्शन के लिए नहीं कह सकती, क्योंकि प्रदर्शन करना जनता का मौलिक अधिकार है और प्रदर्शन हमेशा सरकार के बैठने के स्थान के करीब ही किया जाता है। उन्होंने कहा, सेंट्रल दिल्ली में लगातार प्रतिबंध की स्थिति नहीं बनाई जा सकती, क्योंकि धारा 144 एक इमरजेंसी प्रावधान है, जो हिंसा बढ़ने या कानून-व्यवस्था की समस्याओं के समय उपयोग की जाती है। 
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