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Supreme Court: 'राज्य नियमन क्यों नहीं लागू कर सकते', औद्योगिक अल्कोहल मामले पर अदालत ने केंद्र से पूछे सवाल

Tue, 09 Apr 2024 09:29 PM IST
आदर्श शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

औद्योगिक अल्कोहल के उत्पादन, विनिर्माण, आपूर्ति और विनियमन में केंद्र और राज्यों की शक्तियों की समीक्षा कर रही पीठ ने कहा कि हम सभी जहरीली शराब की त्रासदी के बारे में जानते हैं और राज्य अपने नागरिकों के स्वास्थ्य के बारे में चिंतित हैं। राज्यों को विनियमन की शक्ति क्यों नहीं होनी चाहिए। अगर वे दुरुपयोग रोकने के लिए विनियमन कर सकते हैं, तो वह कोई शुल्क भी लगा सकते हैं।
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सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो) - फोटो : ANI
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को केंद्र से पूछा कि जहरीली शराब के जोखिमों के मद्देनजर राज्य अपने नागरिकों के स्वास्थ्य के लिए औद्योगिक अल्कोहल पर नियमन क्यों नहीं लागू कर सकते हैं। साथ ही कोर्ट ने सख्त लहजें में पूछा कि राज्य औद्योगिक अल्कोहल के दुरुपयोग को रोकने के लिए इस पर शुल्क क्यों नहीं लगा सकते हैं। गौरतलब है कि नौ न्यायाधीशों की संविधान पीठ औद्योगिक अल्कोहल के उत्पादन, विनिर्माण, आपूर्ति और विनियमन में केंद्र और राज्यों की शक्तियों की समीक्षा कर रही है। 
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जहरीली शराब को लेकर केंद्र से सुप्रीम कोर्ट के सवाल
मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा कि ‘हम सभी जहरीली शराब की त्रासदी के बारे में जानते हैं और राज्य अपने नागरिकों के स्वास्थ्य के बारे में चिंतित हैं। राज्यों को विनियमन की शक्ति क्यों नहीं होनी चाहिए। अगर वे दुरुपयोग रोकने के लिए विनियमन कर सकते हैं, तो वह कोई शुल्क भी लगा सकते हैं। इससे पहले सात न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने राज्यों के खिलाफ फैसला सुनाया था, जिसके बाद बड़ी पीठ के समक्ष सुनवाई चल रही है।

सात न्यायाधीशों की पीठ ने सुनाया था फैसला
सात न्यायाधीशों की पीठ ने 1997 में केंद्र के पक्ष में फैसला सुनाया था। इस फैसले में कहा गया था कि केंद्र के पास औद्योगिक अल्कोहल के उत्पादन पर नियामक शक्ति होगी। राज्यों के इस फैसले को चुनौती देने के बाद 2010 में यह मामला नौ न्यायाधीशों की पीठ के पास भेजा गया था। नौ न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने मेहता से पूछा कि राज्यों के पास औद्योगिक शराब के लिए एक नियामकीय तंत्र क्यों नहीं हो सकता है।
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सुनवाई के दौरान पीठ ने दिखे सख्त तेवर
सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा कि स्पिरिट को एक प्रक्रिया के जरिये नशीली शराब में बदला जा सकता है। ऐसे में दुरुपयोग की आशंका है। क्या हम राज्य को यह सुनिश्चित करने के लिए नियामकीय शक्ति से वंचित कर सकते हैं कि इसका दुरुपयोग न हो। अदालत ने कहा, ‘केंद्र एक राष्ट्रीय इकाई है और आप किसी जिले में क्या हो रहा है, उसे नियंत्रित करने नहीं जा रहे हैं। मान लीजिए, उपभोग के लिए इसे विकृत कर दुरुपयोग करने की प्रबल संभावना है।
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