भारत और चीन के विदेश मंत्रालय के अनुसार सब कुछ ठीक चल रहा है, तो भारत से लगती सीमा पर चीन सतरंज के घोड़े की तरह ढाई कदम आगे पीछे क्यों हो रहा है?
सेना मुख्यालय और रक्षा मंत्रालय के अधिकारी ऐसे सवाल पर चुप्पी साध लेते हैं। बताते हैं लद्दाख में पेट्रोलिंग प्वाइट 14, 15 और हॉटस्प्रिंग क्षेत्र से चीनी सैनिक थोड़ा पीछे हटे हैं। पीछे भारतीय सैनिक भी हटे हैं, लेकिन अभी समस्या के हल जैसा कुछ नहीं है।
मई में उत्तराखंड में चीनी सैनिकों का रुख आक्रामक हो रहा था। उनके हेलीकाप्टर बाराहोती क्षेत्र में भारतीय वायुसीमा का उल्लंघन कर रहे थे। गढ़वाल और कुमाऊं क्षेत्र में चीन की गतिविधियों की आशंका को देखकर भारत ने भी सतर्कता बढ़ाई है।
बताते हैं उत्तराखंड में भारतीय सेना की आखिरी चौकी से कोई 28-30 किमी दूर अपने इलाके में चीन ने सैनिकों का बड़ा ठिकाना बनाया है। इसी तरह से पांच मई को चीन की सेना ने लद्दाख क्षेत्र में भारतीय इलाके में 60 वर्ग किमी (रिटा. लेफ्टिनेंट जनरल एचएस पनाग के अनुसार) घुसपैठ की।
सैन्य सूत्र बताते हैं कि भारत, चीन, भूटान के ट्राई जंक्शन डोकलाम में भी चीनी सैनिकों की मौजदगी पहले की तुलना में बढ़ी है। सिक्कम से सटी चीन की सीमा पर भी भारी सैन्य वाहनों का आना-जाना बढ़ा है।
नाथू ला के पास भी चीनी सैनिकों की हरकत देखी जा रही है। अरुणाचल में भी चीनी सैनिक लगातार अपना दबाव बनाए रखते हैं। सैन्य सूत्र बताते हैं कि इन दिनों यह दबाव बढ़ा हुआ महसूस हो रहा है।
नेपाल ने भारत की आंखें खोल दी हैं। अचानक उत्ताखंड में लिपुलेख तक भारत की सड़क के उद्घाटन के बाद पड़ोसी देश के विरोध ने चौकन्ना कर दिया है।
बताते हैं लद्दाख में भी पांच मई को चीन की आक्रामक हलचल बढ़ी। भारतीय सैन्य रणनीतिकार इस पूरे घटनाक्रम पर बारीकी से नजर रख रहे हैं।
यहां भी रणनीतिकार भारतीय सैन्य तैयारी में कोई कोताही नहीं छोड़ना चाहते। इसलिए उत्तराखंड के कुमाऊं, गढ़वाल क्षेत्र में सैन्य तैनाती बढ़ाई जा रही है।
लद्दाख में विवादित क्षेत्र पर भारत ने भी चीनी फौज की तादाद को देखते हुए इंफैट्री की डिवीजन और दो रिजर्व ब्रिगेड की तैनाती की है।
इसके अलावा सिक्कम से लेकर अरुणाचल तक की चुनौती पर नजर रखकर सेना किसी भी स्थिति से निबटने की तैयारी कर रही है।
करीब 18-20 साल से भारत चीन से लगती भारत की सीमा पर चुनौतियों को गंभीरता से समझ कर आगे बढ़ रहा है।
पूर्व वायुसेनाध्यक्ष एयरचीफ मार्शल पीवी नाइक कहते हैं कि भारत और चीन के सैन्य अधिकारियों की बातचीत के सकारात्मक संकेत आ रहे हैं। मेरे विचार में यह चीन की सेना का मनोवैज्ञानिक युद्ध है।
हमारे सैन्य अफसर इससे घबराने वाले नहीं है। एयर वाइस मार्शल (पूर्व) एनबी सिंह का कहना है कि चीन अपनी आदतों से बाज नहीं आता। चिंता की बात है कि अब उसकी हरकतों में आक्रामकता बढ़ रही है।
पूर्व वायुसेनाध्यक्ष और एनबी सिंह दोनों का कहना है कि यह 1962 नहीं 2020 है। इसे चीन को भी समझ लेना चाहिए। मेजर जनरल (पूर्व) लखविंदर सिंह कहते हैं कि कोई युद्ध और टकराव नहीं चाहता।