सुबर्ना घोष और उनके पति को अपने पहले बच्चे का बेसब्री से इंतजार था। प्रेग्नेंसी के दौरान सुबर्ना अपना पूरा ध्यान रख रही थीं और उन्हें उम्मीद थी कि नॉर्मल डिलिवरी ही होगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
उन्होंने बीबीसी से बताया, "डॉक्टर ने मुझसे कहा कि आज के जमाने में सब सिजेरियन डिलीवरी ही कराते हैं। आप क्यों बेकार में दर्द झेलना चाहती हैं। आप जैसे पढ़े-लिखे लोगों को सी-सेक्शन जैसा वैज्ञानिक और आधुनिक तरीका चुनना चाहिए।"
डॉक्टर की बातें सुनकर सुबर्ना और उनके पति उलझन में पड़ गए और आखिरकार उन्होंने उसकी बात मान ली, लेकिन इसका सुबर्ना की सेहत पर बहुत बुरा असर पड़ा। उन्होंने बताया, "ऑपरेशन से उबरने में मुझे लंबा वक्त लगा। मैं अपने बच्चे को ठीक से दूध भी नहीं पिला पाती थी क्योंकि शरीर में दूध बनता ही नहीं था।"
सुबर्ना ने ऑनलाइन फोरम Change.Org पर एक याचिका भी डाली है जिसमें उन्होंने अपील की है कि सभी अस्पताल ये बताएं कि उनके यहां कितने बच्चे सिजेरियन तरीके से हुए और कितने नॉर्मल।
क्या कहते हैं डॉक्टर?
गाइनोकॉलजिस्ट (स्त्री रोग विशेषज्ञ) डॉक्टर मधु गोयल भी मानती हैं कि सिजेरियन के बाद रिकवरी में वक्त लगता है जबकि नॉर्मल डिलीवरी के बाद महिला बहुत जल्दी एक्टिव हो जाती है।
सिजेरियन डिलीवरी के दौरान कई बार बहुत ज्यादा खून भी निकल जाता है जिससे कमजोरी, शरीर में दूध न बनने और डिप्रेशन जैसी दिक्कतें हो सकती हैं। इसके अलावा सिजेरियन के बाद औरतों में मोटापा और डायबिटीज होने की आशंका भी कई गुना बढ़ जाती है।
डॉक्टर मधु कहती हैं, "हम जैसे डॉक्टरों पर अक्सर ये आरोप लगता है कि हम अपनी आसानी और पैसों के लिए जानबूझकर सिजेरियन डिलीवरी करते हैं, लेकिन ऐसा नहीं हैं। कई बार औरतें खुद वजाइनल डिलीवरी का दर्द झेलने के लिए तैयार नहीं होतीं और हमें उनके कहने पर सिजेरियन तरीका चुनना पड़ता है।"
उन्होंने कहा कि कई बार तो लोग चाहते हैं कि बच्चा किसी खास दिन या खास मुहूर्त में पैदा हो। ऐसी स्थिति में भी हमें सी-सेक्शन का रास्ता ही अपनाना होता है।
डॉ. मधु सिजेरियन डिलिवरी की बढ़ती संख्याओं के पीछे कुछ और वजहें भी गिनाती हैं। मसलन, लड़कियों का ज्यादा उम्र में प्रसव और प्रसव से पहले पर्याप्त एक्सरसाइज या शारीरिक मेहनत न करना।
उन्होंने कहा, "इन सबके पीछे हमारी बदलती लाइफस्टाइल एक बहुत बड़ी वजह है। आज लड़कियां देर से शादी करती हैं और देर से मां बनती हैं। वो जरूरी एक्सरसाइज भी नहीं करतीं इसी वजह से उनके लिए नॉर्मल डिलीवरी के जरिए मां बनना मुश्किल होता है।"
कई बार उस स्थिति में भी सिजेरियन डिलीवरी करनी पड़ती है जब मां बच्चे को पुश न कर पा रही हो, या फिर बच्चे या मां की जान को खतरा हो।