मोदी सरकार ने 6 सितंबर 2015 को लगभग 40 साल बाद वन रैंक वन पेंशन (ओआरओपी) योजना लागू कर दी थी लेकिन पूर्व सैनिकों का मानना है कि इससे उनकी मांग पूरी नहीं हुई। इस योजना के तहत किसी भी वक्त सेवानिवृत्त हुए सैन्यकर्मियों को समान पेंशन मिलेगी, यदि वे उसी रैंक में और समान अवधि तक सेवाएं देते हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में कहा था कि ओआरओपी के तहत लगभग 5,500 करोड़ रुपये दिए जा चुके हैं। मेजर जनरल सतबीर सिंह (सेवानिवृत्त) का कहना है कि यह योजना पेंशन में एकमुश्त इजाफा है न कि ओआरओपी। यह विसंगति यदि दूर नहीं की गई तो वरिष्ठ सैन्यकर्मियों को अपने जूनियर सैन्यकर्मियों के मुकाबले कम पेंशन मिलने लगेगी। संवैधानिक रूप से यह व्यवस्था अस्वीकार्य और अन्यायपूर्ण है।