इससे पहले 2013 और 2018 में भी पार्टी इस तरह की यात्रा निकाल चुकी है। लेकिन 2023 की यात्रा पिछले दोनों यात्राओं से अलग नजर आ रही है। क्योंकि यह केवल एक नहीं बल्कि पांच अलग अलग शहरों से निकलने जा रही हैं। प्रदेश में यह पहली बार हुआ है कि, इन यात्राओं का मुख्य चेहरा सीएम शिवराज सिंह चौहान नहीं है। पांचों यात्राएं अगले 17 से 21 दिनों में प्रदेश की 230 में से 211 विधानसभा सीट कवर करेगी। 3 सितंबर को चित्रकूट से पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कर दिया है। इनके अलावा केंद्रीय मंत्री अमित शाह श्योपुर व मंडला, राजनाथ सिंह नीमच और नितिन गडकरी खंडवा में यात्रा को हरी झंडी दिखाएंगे। पिछले चुनावों के मुकाबले भाजपा ने इस चुनाव में अपनी रणनीति बदल दी है। भाजपा शिवराज के बजाए मोदी के चेहरे को आगे रख चुनावी मैदान में उतरी है। इस चुनावी प्रबंधन की पूरी कमान गृहमंत्री अमित शाह ने अपने हाथ में ली है। लेकिन खास बात है कि यह कि इन यात्राओं से जुड़ी जो जानकारी सोशल मीडिया, बैनर पोस्टर तक दी जा रही है उसमें केंद्रीय मंत्री अमित शाह को कहीं भी तस्वीरों में सामने नहीं रखा गया है।
पहली यात्रा: इसलिए चुना है पार्टी अध्यक्ष नड्डा को
तीन सितंबर को भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने विंध्य क्षेत्र के चित्रकूट (सतना) से पहली यात्रा का शुभारंभ कर दिया है। इस यात्रा को पहले केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह हरी झंडी दिखाने वाले थे, लेकिन कार्यक्रम में बदलाव किया गया। इसकी वजह सीधी पेशाब कांड है, जिसके कारण विंध्य का ब्राह्मण वर्ग बीजेपी से नाराज चल रहा है। नड्डा के यात्रा का शुभारंभ कराकर पार्टी ब्राह्मणों वर्ग को साधना चाहती है। पार्टी नड्डा हिमाचली ब्राह्मण हैं। विंध्य में ब्राह्मणों का अच्छा खासा दबदबा है। विंध्य क्षेत्र में 30 विधानसभा सीटें हैं। इनमें से 23 सीटें ऐसी हैं,जहां ब्राह्मणों की आबादी 30 फीसदी के करीब है। जबकि 10 प्रतिशत से ज्यादा ब्राह्मण वोटर हैं। विंध्य, महाकौशल, चंबल और मध्य क्षेत्र की 60 सीटें ऐसी हैं, जहां ब्राह्मण हार-जीत तय करते हैं।
दूसरी यात्रा: केंद्रीय मंत्री राजनाथ के जरिए जातिगत समीकरण साधने की कोशिश
भाजपा की दूसरी यात्रा मालवा के नीमच से 4 सितंबर को शुरू हो गई है। इसे केंद्रीय मंत्री राजनाथ से रवाना किया। राजनाथ सिंह को जातीय समीकरण को ध्यान में रखते हुए इस यात्रा के लिए बुलाया गया है। नीमच-मंदसौर में पाटीदार, राजपूत-ठाकुरों की तादाद ज्यादा है। दो विधानसभा सीटों नीमच और मंदसौर पर बीजेपी विधायकों दिलीप सिंह परिहार और यशपाल सिंह सिसोदिया का कब्जा है। इस क्षेत्र में करणी सेना का भी प्रभाव है। भाजपा राजनाथ के जरिए इस इलाके के राजपूत, ठाकुरों व पाटीदारों को साधे रखने की रणनीति है। राजनाथ के साथ केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर भी इस कार्यक्रम में शामिल होंगे। तोमर भी ठाकुर हैं।
तीसरी और चौथी यात्रा: शाह साधेंगे आदिवासियों को
तीसरी और चौथी यात्रा 5 सितंबर को श्योपुर व मंडला से भोपाल के लिए रवाना होंगी। इसके केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह रवाना करेंगे। शाह दोपहर 12 बजे श्योपुर और दोपहर 3 बजे मंडला में रघुनाथ शाह-शंकर शाह की जन्म स्थली से यात्राओं को हरी झंडी दिखाएंगे। ये दोनों ही आदिवासी बहुल जिले है। दरअसल, भाजपा के आदिवासी वोट बैंक बहुत महत्वपूर्ण हैं। पिछली बार पार्टी के हाथ ये वोट बैंक छिटक गया था तब भी पार्टी सत्ता से बाहर हो गई थी। यही वजह है कि पीएम मोदी और शाह प्रदेश के आदिवासी बेल्ट के लगातार दौरे कर रहे है।
पांचवी: एन वक्त पर गडकरी को दी जिम्मेदारी
पांचवीं यात्रा इंदौर संभाग के खंडवा से 6 सितंबर से शुरू होगी। इस यात्रा को केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी हरी झंडी दिखाएंगे। पहले यहां राजनाथ सिंह आने वाले थे, लेकिन कार्यक्रम में बदलाव किया गया है। जानकारों की मानें तो संघ के निर्देश पर गडकरी को जन आशीर्वाद यात्रा में शामिल किया गया है। खंडवा में भाजपा का अच्छा खासा प्रभाव है जबकि खरगोन में कांग्रेस की स्थिति मजबूत है। वहीं बुरहानपुर में भाजपा हार गई थी। ये इलाका महाराष्ट्र की सीमा से लगा है।
पहली बार बिना चेहरे के लिए निकल रही है यात्रा
इस बार मध्यप्रदेश में पांचों जन आर्शीवाद यात्राओं में पार्टी ने किसी को चेहरा नहीं बनाया है। क्योंकि केंद्रीय नेतृत्व नहीं चाहता है कि राज्य के किसी एक नेता को आगे करने से पार्टी के भीतर किसी तरह का असंतोष पैदा हो। पिछली यात्राओं में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान चेहरा थे, लेकिन इस बार बीजेपी ने रणनीति बदल दी है। भाजपा से जुड़े सूत्र कहते है कि,पीएम मोदी पर प्रदेश ही नहीं बल्कि पूरे देश की जनता का भरोसा है। इसे बीजेपी विधानसभा चुनाव में भी भुनाना चाहती है। जबकि इस चुनाव की पूरी कमान गृहमंत्री अमित शाह ने अपने हाथ में ली है। वे लगातार प्रदेश के दौरे कर रहे है। प्रदेश में सरकार के खिलाफ एंटी इनकम्बेंसी है। इससे निपटने के लिए बीजेपी ने किसी को चेहरा नहीं बनाया है। हालांकि, बीजेपी चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा है कि, शिवराज सिंह चौहान अधिकांश जगहों पर मौजूद रहेंगे। वह अकेले यात्रा निकालते थे तो सभी विधानसभा क्षेत्रों में जा नहीं पाते थे, इसलिए इस बार अलग-अलग क्षेत्रों से यात्रा निकाली जा रही है। प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने इतना जरूर कहा कि मुख्यमंत्री सहित प्रदेश के अन्य वरिष्ठ नेता इस यात्रा में समय-समय पर शामिल होंगे।