पाकिस्तान का कश्मीर मुद्दे के अंतरराष्ट्रीयकरण करने का दांव पूरी तरह विफल हो गया है। उड़ी आतंकी हमले को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने न सिर्फ भारत के साथ एकजुटता दिखाई, बल्कि आतंकवाद के खात्मे के लिए सहयोग देने की बात कही।
फ्रांस, अमेरिका, ब्रिटेन, रूस, अफगानिस्तान, कनाडा के बाद अब जापान, जर्मनी, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन, कतर, नेपाल, श्रीलंका, भूटान, मंगोलिया, मालदीव और दक्षिण कोरिया ने भी उड़ी हमले की कड़ी आलोचना की है।
पाक ने वैश्विक मंच पर तीन बार कश्मीर मुद्दे को पुरजोर तरीके से उठाने की कोशिश की, लेकिन हर बार उसको मुंह की खानी पड़ी। पाक प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने कश्मीर मुद्दे को लेकर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पांचों स्थायी सदस्यों को पत्र लिखा था और 22 सांसदों को दुनिया के देशों में भेजा था, लेकिन उनका यह दांव फेल रहा।
अमेरिका समेत चीन ने भी किया किनारा
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अब पाक खुद को अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अलग-थलग किए जाने से बचाने में भी कामयाब होता नजर नहीं आ रहा है। मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र के महासचिव बान की-मून ने भी पाक को तगड़ा झटका देते हुए अपने अंतिम भाषण कश्मीर और वहां के हालात का जिक्र तक नहीं किया।
उड़ी आतंकी हमले को लेकर सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य रूस और फ्रांस ने सीधे तौर पर पाकिस्तान या फिर वहां के आतंकी संगठनों पर निशाना साधा है। आतंकवाद को लेकर अमेरिका के साथ ही चीन ने भी पाक से किनारा काट लिया है।
अफगान के राष्ट्रपति अशरफ गनी और श्रीलंका के राष्ट्रपति मैत्रीपाल सिरिसेना ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को फोन कर ‘सीमा पार आतंकवाद’ की निंदा की। उन्होंने भारत के साथ आतंकवाद को खत्म करने के लिए एकजुटता भी जाहिर की।
मुस्लिम देशों के संगठन ने कहा कश्मीरियों पर ज्यादती बंद करे भारत
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मुस्लिम देशों के संगठन ओआईसी ने पाकिस्तान का समर्थन करते हुए भारत को कश्मीरियों पर ज्यादती बंद करने की नसीहत दी है। ओआईसी ने कश्मीर मुद्दे को कश्मीरी जनता और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के के प्रस्तावों के अनुरूप सुलझाने की हिदायत दी है।
ओआईसी के संयुक्त महासचिव इयाद अमीन मदनी ने सोमवार को कश्मीर मुद्दे पर कहा कि भारत कश्मीर पर तत्काल प्रभाव से हिंसा रोके और जल्द कश्मीरी लोगों एवं संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों के मुताबिक शांति बहाल करे।
इयाद अमीन की टिप्पणी पाकिस्तान के विदेश मामलों के मंत्री सरताज अजीज के ओआईसी के संपर्क समूह की बैठक में कश्मीर का मुद्दा उठाने के बाद आई है।