केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री अपने निर्णय से नेताओं और देश को चौंकाते हैं। माना जा रहा है कि बजट-2019 में केंद्र सरकार की योजना खजाने का मुंह खोलने की है। इसमें गरीब, किसान, युवा के लिए सरकार बड़ी घोषणाएं कर सकती है। इससे पहले ही राहुल गांधी ने 2019 में चुनाव के बाद कांग्रेस के नेतृत्व में बनने वाली केंद्र सरकार का बड़ा वादा बता दिया है। कांग्रेस पार्टी ने देश के मजदूरों, गरीबों, गांव के लोगों के लिए सालभर में 100 दिन रोजगार की गारंटी देने का वादा भी चुनाव से पहले किया था। इसे निभाया भी। तीन राज्य राजस्थान, छत्तीसगढ़ और म.प्र. में किसान का कर्जा माफ करने की घोषणा की थी।
सरकार बनने के बाद इसे लागू भी कराया। इतना ही नहीं कर्नाटक में कांग्रेस के सहयोग से बनी सरकार और पंजाब में कांग्रेस की सरकार ने भी किसान का कर्जा माफ करने की पहल की है। ऐसे में राहुल गांधी देश की जनता को संदेश देना चाहते हैं कि कांग्रेस पार्टी जो कहती है, उसे पूरा करती है। इसलिए राहुल गांधी की घोषणा पर यकीन किया जाए। राहुल गांधी ने यह घोषणा ऐसे समय में की है, जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले दिए गए आश्वसन पर सवाल उठ रहे हैं।
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी पप्पू हैं? इससे जुड़ा सवाल जब जुलाई 2018 में कांग्रेस अध्यक्ष से संवाददाता ने पूछा तो उन्होंने उल्टा सवाल किया था। राहुल गांधी ने मानसून सत्र के दौरान संसद में अपना भाषण दिया था। उन्होंने प्रधानमंत्री पर राफेल घोटाले को लेकर आरोप लगाया और इसके बाद वह प्रधानमंत्री के पास जाकर उनके गले लग गए थे।
राहुल गांधी ने इसी का जिक्र करते हुए उल्टा सवाल किया कि संसद भवन में पप्पू कौन बना? कौन किसके सवाल का जवाब नहीं दे पाया? इसके बाद राहुल गांधी ने कहा कि उन्हें पप्पू बनाया गया है। उन्हें पप्पू बनाने के लिए भाजपा और आरएसएस ने काफी समय से काफी पैसा खर्च किया है। दुष्प्रचार किया है। इसके बाद राहुल गांधी ने कहा कि वह अगले तीन-चार महीने में बनाई गई पप्पू की छवि को तोड़ देंगे। अब कांग्रेस के नेता भी कहते हैं कि आप कुछ भी कहिए, लेकिन राहुल गांधी को पप्पू नहीं कह सकते। भाजपा के कुछ मंत्री भी मानते हैं कि अब राहुल गांधी पप्पू नहीं रहे।