प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पांच अगस्त को अयोध्या में जब राम मंदिर निर्माण के लिए भूमि पूजन करेंगे, तब उनके साथ कौन-कौन बैठेगा। कहां पर और कितनी दूरी पर बैठेगा, ऐसे सवालों ने बहुत से लोगों की धड़कनें बढ़ा दी हैं। इनमें नेता, विभिन्न संगठनों के पदाधिकारी, संवैधानिक पदों पर आसीन व्यक्ति और संत समाज के लोग शामिल हैं।
बता दें कि राम मंदिर बाबरी-मस्जिद मामले में देश के पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी और पूर्व केंद्रीय मंत्री मुरली मनोहर जोशी जैसे कद्दावर नेता तो अभी तक अदालत की पेशी भुगत रहे हैं। पिछले दिनों इन नेताओं ने सीबीआई की विशेष अदालत में बयान दर्ज कराए हैं। मेहमानों की सूची में इनका नाम टॉप पर बताया जा रहा है।
इनके बाद उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री रह चुके कल्याण सिंह का नाम सामने आता है। हालांकि मेहमानों का नाम तय करने का अधिकार राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को दिया गया है, लेकिन इस प्रक्रिया में पीएम कार्यालय से बराबर दिशा-निर्देश मिल रहे हैं।
मंदिर निर्माण के लिए जिस जगह पर भूमि पूजन होगा, उस क्षेत्र के हिसाब से मेहमानों को बुलाया गया है। पूजन के दौरान मेहमानों के बीच कम से कम दो गज का फासला बना रहे, इस बात का ध्यान रखा गया है।
राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास, विश्व हिंदू परिषद से जुड़े ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय बंसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रधान सचिव रहे वरिष्ठ आईएएस अफसर और मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष रूप में ट्रस्ट में शामिल नृपेंद्र मिश्र को आमंत्रित किया गया है। सुप्रीम कोर्ट में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद केस में हिंदुओं की पैरवी करने वाले वरिष्ठ वकील के. पराशरण और अयोध्या राज परिवार के बिमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र भूमि पूजन में उपस्थित रहेंगे।
दूसरे सदस्य डॉक्टर अनिल कुमार मिश्र, राम मंदिर-बाबरी मस्जिद विवाद में पक्षकार रहे निर्मोही अखाड़ा की अयोध्या बैठक के प्रमुख महंत दिनेंद्र दास व मंदिर ट्रस्ट में दलित सदस्य के रूप में शामिल कामेश्वर चौपाल, जिन्होंने 1989 के राम मंदिर आंदोलन के समय हुए शिलान्यास में राम मंदिर निर्माण की पहली ईंट रखी थी, ये भी भूमि पूजन के साक्षी बनेंगे।
इनके अलावा ट्रस्ट के बाकी सदस्य, जिनमें स्वामी गोविंद देव गिरी, स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती व पुरुष परमानंद गिरी आदि शामिल हैं, वे मंदिर निर्माण भूमि पूजन समारोह में मौजूद रहेंगे। इनके साथ ही योगी आदित्यनाथ सरकार में प्रभावशाली आईएएस अफसर अवनीश अवस्थी, जो अपर मुख्य सचिव और गृह सचिव के रूप में कामकाज संभाल रहे हैं, वे भी ट्रस्ट के सदस्य हैं। अयोध्या के जिलाधिकारी भी राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य के तौर पर कार्यक्रम में उपस्थित रहेंगे। अयोध्या के कलेक्टर को ट्रस्ट का पदेन सदस्य बनाया गया है।
ट्रस्ट के अनुसार, अभी तक मेहमानों की जो सूची तैयार हो रही है, उसमें मुख्यमंत्रियों और राज्यपालों के नाम को लेकर संशय है। बताया गया है कि यूपी और बिहार के सीएम के अलावा अन्य को निमंत्रण भेजने को लेकर अभी मंथन चल रहा है।
विपक्षी नेताओं में गिने चुने लोगों के पास बुलावा पहुंचेगा। स्वामी रामदेव, उमा भारती, विहिप नेता सदाशिव कोकजे, विनय कटियार, जयभगवान पावरिया, दिनेश चंद्रा, आलोक कुमार व बजरंग दल के मिलिंद परांदे, संघ प्रमुख के अलावा आरएसएस के करीब दर्जनभर लोग, राम विलास वेदांती, जितेंद्रानंद सरस्वती और कई दूसरे पदाधिकारियों का नाम सूची में शामिल किया जा सकता है।
कांग्रेस नेता अनिल शास्त्री पहले ही कह चुके हैं कि उन्हें निमंत्रण मिला तो भी वे नहीं जाएंगे। मंदिर के शिलान्यास को भाजपा का कार्यक्रम बना दिया गया है। ऐसा लगता है कि जैसे आरएसएस और विहिप के किसी कार्यालय का शिलान्यास हो रहा है।
दिग्विजय सिंह ने इस मामले में कोई बड़ी टिप्पणी नहीं की। उनका कहना था कि राजनीति और धर्म, दो अलग मुद्दे हैं। राम मंदिर शिलान्यास कार्यक्रम में यदि उन्होंने विपक्ष से किसी को आमंत्रित नहीं किया है, तो हम बहुत कुछ नहीं कर सकते हैं।