फिल्म बजरंगी भाई जान में अपने घर से बिछड़ गई मुन्नी को तो बजरंगी भाई जान ने तमाम मुसीबतों के बावजूद उसके घर पहुंचा दिया था, लेकिन जिला अस्पताल में एक साल से अपने घर जाने को बेचैन हलीमा की मदद को कोई बजरंगी भाई जान आगे नहीं आ रहा।
जिला अस्पताल में 30 जून 2015 की रात एक महिला को दुर्घटना के बाद बेहोशी की हालत में भर्ती कराया गया था। दुर्घटना में महिला का एक पैर फैक्चर हो गया था। डॉक्टरों ने उसकी हड्डी जोड़ने की कोशिश की लेकिन वह चलने में कामयाब नहीं हो पाई। महिला आज भी जिला अस्पताल के महिला हड्डी वार्ड में बेड नंबर 8 पर भर्ती है। डॉक्टरों ने उसे डिस्चार्ज तो कर दिया लेकिन महिला यहां से कहीं गई नहीं।
महिला ने बताया कि उसका नाम हलीमा है। वह हैदराबाद के मोकिला गांव की रहने वाली है। वह ट्रेन से अपने किसी रिश्तेदार के घर जा रही थी। गलती से ट्रेन से मुरादाबाद पहुंच गई थी। यहां रेलवे स्टेशन के बाहर आने के बाद उसका एक्सीडेंट हो गया था। उसके पिता का नाम गोरे मियां और मां का नाम अमीना है।
उसके दो बहन और दो भाई हैं। दो साल पहले पति गुजर गया। उसका ससुराल हैदराबाद के कोंडापुर गांव में है। इसके अलावा उसे और कुछ याद नहीं है। अस्पताल में हलीमा वाकर के सहारे चलती है। उसने बताया कि मदद नहीं मिलने के कारण वह अपने घर नहीं जा पा रही है। वह जाना चाहती है, लेकिन कोई मददगार मिल जाए।