बच्चों को लगाया जाने वाला पोलियो का इंजेक्शन अब एक के बजाय दो बार लगाया जाएगा। पहले 0.5 एमएल (मिलीलीटर) की एक डोज जन्म के 14वें हफ्ते में मांस में लगाई जाती थी। अब 0.1- 0.1 एमएल की दो डोज छठे और 14वें हफ्ते में स्किन और मांस के बीच में लगाई जाएगी। इंजेक्टेबल पोलियो वैक्सीन (आईपीवी) की कमी के चलते डब्लूएचओ (वर्ल्ड हेल्थ आर्गनाइजेशन) ने यह निर्णय लिया है। इससे प्रति बच्चा 0.3 एमएल वैक्सीन की बचत होगी। यह व्यवस्था एक सितंबर से लागू हो गई है।
नवंबर 2015 से भारत समेत विश्व के 190 देशों में एक साथ आईपीवी की शुरुआत हुई थी। उस समय निर्णय लिया गया था कि 0.5 एमएल डोज बच्चे के मांस में लगेगा। कुछ समय बाद ही इसकी शार्टेज की भी खबरें आने लगीं। कई राज्यों में बच्चों को समय से डोज ही नहीं लग पाया। इसे देखते हुए डब्लूएचओ ने नई व्यवस्था शुरू की है।
जिला प्रतिरक्षण अधिकारी (डीआईओ) डॉ. जीके मिश्र ने बताया कि डब्लूएचओ की नई व्यवस्था के तहत एक सितंबर से वैक्सीन स्किन और मांस के बीच (इंट्राडर्मल) में दी जाने लगी है। उन्होंने बताया कि स्किन और मांस के बीच लगने वाली डोज का असर ज्यादा होता है।