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TB Elimination: डब्ल्यूएचओ ने टीबी उन्मूलन में भारत की प्रगति की सराहना की, मृत्यु दर में सुधार के मिले संकेत

Wed, 19 Nov 2025 01:53 AM IST
शुभम कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

डब्ल्यूएचओ ने टीबी उन्मूलन में भारत की उत्साहजनक प्रगति और पहचान में तेजी की सराहना की है। रिपोर्ट के अनुसार 2024 में देश में 27.1 लाख टीबी मरीजों का अनुमान है, लेकिन मौतों में 2015 से गिरावट सकारात्मक संकेत है। इसके बावजूद डब्ल्यूएचओ ने चेताया कि दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र की रफ्तार 2025 तक टीबी खत्म करने के लक्ष्य के लिए पर्याप्त नहीं है।

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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Adobe Stock
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विस्तार
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विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) टीबी के उन्मूलन में उत्साहजनक प्रगति के लिए भारत की प्रशंसा की। साथ ही  कहा कि इसकी पहचान में लगने वाला समय कम हुआ है। मंगलवार को जारी एक बयान में डब्ल्यूएचओ ने यह भी कहा कि भारत में टीबी से संबंधित मृत्यु दर में सुधार के संकेत मिले हैं। डब्ल्यूएचओ की वैश्विक क्षय रोग रिपोर्ट, 2025 का हवाला देते हुए इस बयान में कहा गया है कि 2024 में दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र में टीबी एक बड़ा बोझ बना रहा है।

रिपोर्ट के अनुसार भारत में 2024 में लगभग 27.1 लाख टीबी मरीजों का अनुमान लगाया गया, जो क्षेत्र में सबसे अधिक है। हालांकि डब्ल्यूएचओ ने कहा कि भारत, बांग्लादेश और थाईलैंड ने बड़ी संख्या में मामलों की पहचान की है, जिससे डिटेक्शन गैप कम हुआ है। साथ ही आंकड़े ये भी बताते है कि टीबी से होने वाली मौतों में भी भारत, बांग्लादेश, नेपाल और थाईलैंड सहित कई देशों में 2015 की तुलना में गिरावट दर्ज की गई है। कोविड-19 के बाद टीबी सेवाएं दोबारा पटरी पर लौटने से यह सुधार संभव हुआ है।

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इसके बावजूद डब्ल्यूएचओ की चेतावनी
हालांकि गौर करने वाली बात ये है कि इसके बावजूद भी डब्ल्यूएचओ ने चेताया कि क्षेत्र की प्रगति अभी भी इतनी तेज नहीं है कि 2025 तक टीबी खत्म करने के लक्ष्य पूरे हो सकें। 2024 में दुनिया भर में 1.23 मिलियन (12.3 लाख) लोगों की टीबी से मौत हुई। दूसरी ओर दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र में दुनिया की आबादी का एक-चौथाई से भी कम हिस्सा रहता है, फिर भी हर साल वैश्विक नए टीबी मामलों में हर तीन में से एक मामला इसी क्षेत्र से आता है।

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ड्रग-रेसिस्टेंट टीबी भी बड़ी चुनौती है, 2024 में ऐसे 1.5 लाख नए मामले सामने आए। डब्ल्यूएचओ के अनुसार, क्षेत्र में 2015 से टीबी मामलों में 16% की कमी आई है, जो वैश्विक औसत (12%) से थोड़ा बेहतर है, लेकिन मौतों में गिरावट उतनी तेज नहीं है।

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डब्ल्यूएचओ अधिकारी ने क्या कहा?
डब्ल्यूएचओ अधिकारी डॉ. कैथरीना बोहम ने कहा कि टीबी अभी भी गरीब आबादी को सबसे ज्यादा प्रभावित करती है। उन्होंने कहा कि समाधान वही है—जल्दी पहचान, तुरंत इलाज, प्रभावी रोकथाम और मजबूत प्राथमिक स्वास्थ्य प्रणाली।

इसके साथ ही डब्ल्यूएचओ ने यह भी बताया कि इलाज कवरेज 85% से ज्यादा है और सफलता दर दुनिया में सबसे बेहतर है। एचआईवी संक्रमित लोगों और टीबी मरीजों के परिवारों के लिए रोकथाम उपचार भी तेजी से बढ़ा है।हालांकि कुपोषण और डायबिटीज अभी भी क्षेत्र में टीबी के सबसे बड़े जोखिम कारक हैं, जो हर साल करीब 8.5 लाख नए टीबी मामलों में योगदान देते हैं।

फंड रुकने पर डब्ल्यूएचओ का सरकारों से आग्रह
गौरतलब है कि करीब 44% टीबी प्रभावित परिवार अभी भी इलाज पर अत्यधिक आर्थिक बोझ झेलते हैं, जबकि टीबी कार्यक्रमों की फंडिंग रुक गई है, जिससे प्रगति खतरे में है। डब्ल्यूएचओ ने सरकारों से आग्रह किया कि टीबी सेवाओं को मजबूत किया जाए, उन्हें प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं में शामिल किया जाए, और पोषण सहायता तथा आर्थिक मदद बढ़ाई जाए। डॉ. बोहम ने कहा, “हमारे पास टीबी खत्म करने के सभी साधन मौजूद हैं। बस अब तेज और निर्णायक कदम उठाने की जरूरत है।

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