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CRPF: कौन है सीआरपीएफ अफसर, जो हुआ ‘हनी ट्रैप’ का शिकार? हुस्न के चक्कर में नहीं दिखा PAK इंटेलिजेंस ऑपरेटिव

Fri, 21 Nov 2025 07:52 PM IST
राहुल कुमार डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

सेना और केंद्रीय अर्धसैनिक बलों में 'हनी ट्रैप' का यह पहला मामला नहीं है। इस तरह के केस, पहले भी आते रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि 'पाकिस्तानी इंटेलिजेंस ऑपरेटिव' ने जम्मू-कश्मीर के लेथपोरा और उसके आसपास केंद्रीय बलों के जवानों और अधिकारियों को अपने जाल में फंसाने के लिए रणनीति तैयार की।
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सीआरपीएफ - फोटो : ANI
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विस्तार
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देश के सबसे बड़े केंद्रीय अर्धसैनिक बल 'सीआरपीएफ' में एक अधिकारी, जो जम्मू-कश्मीर में बतौर कमांडेंट तैनात हैं, वे 'हनी ट्रैप' का शिकार हो गए हैं। विश्वस्त सूत्रों का कहना है कि 'हुस्न' के चक्कर में कमांडेंट को 'पाकिस्तानी इंटेलिजेंस ऑपरेटिव' नजर नहीं आया। बातचीत से शुरु हुआ सिलसिला काफी दूर तक पहुंच गया। इस चक्कर में अधिकारी का 'मोबाइल फोन' भी सुरक्षित नहीं रहा। हैक हुआ तो फोर्स मुख्यालय एवं दूसरी यूनिटों से जारी होने वाले अहम 'सिग्नल', 'पाकिस्तानी इंटेलिजेंस ऑपरेटिव' तक जाने लगे। अब कमांडेंट को फोर्स के हेडक्वार्टर में तलब किया गया है। सूत्रों के मुताबिक, इस मामले की जांच हो रही है।

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मोबाइल फोन के साथ 'पीआईओ' ने किया खेल  
बता दें कि सेना और केंद्रीय अर्धसैनिक बलों में 'हनी ट्रैप' का यह पहला मामला नहीं है। इस तरह के केस, पहले भी आते रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि 'पाकिस्तानी इंटेलिजेंस ऑपरेटिव' ने जम्मू-कश्मीर के लेथपोरा और उसके आसपास केंद्रीय बलों के जवानों और अधिकारियों को अपने जाल में फंसाने के लिए रणनीति तैयार की। वहां पर सीआरपीएफ का एक कमांडेंट, उसके जाल में फंस गया। पहले खूब बातें हुईं और उसके बाद मुलाकात। धीरे-धीरे यह सिलसिला आगे बढ़ता रहा। अधिकारी को यह मालूम ही नहीं चल सका कि वह 'पीआईओ' के चक्कर में फंस चुका है। सूत्रों का कहना है कि मुलाकातों के दौरान, अधिकारी के मोबाइल फोन के साथ 'पीआईओ' ने खेल कर दिया। मोबाइल फोन हैक हो गया। फोर्स से जुड़ी कई सीक्रेट जानकारियां, सीमा पार तक जाने लगी। 

अनीता' से बचकर रहने की सलाह दी गई 
जनवरी 2023 में भारतीय सेना, केंद्रीय अर्धसैनिक बलों और दूसरी सुरक्षा एजेंसियों को पाकिस्तान की 'अनीता' से बचकर रहने को कहा गया था। तब 'हसीन' अनीता ने सेना और अर्धसैनिक बलों में अपना बड़ा जाल फैलाने का प्रयास किया। सुरक्षा बलों के अनेक कार्मिकों के इसके जाल में फंसने की बात सामने आई। उस दौरान सोशल मीडिया पर 'अनीता' काफी सक्रिय रही थी। अपने अकाउंट पर अनीता ने अपना नाम, घर का पता और फोन नंबर, ये सब जानकारी दी। उसे देखकर कोई भी व्यक्ति यही समझता है कि ये तो भारतीय महिला है। इसका संबंध राजस्थान और पश्चिम बंगाल से है। नंबर भी लोकल है। वहीं से पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी 'आईएसआई' की इंटेलिजेंस ऑपरेटिव 'अनीता' का असली खेल शुरु हो जाता। उसका मकसद था, सैन्य और केंद्रीय सुरक्षा बलों से खुफिया जानकारी जुटाना।
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खुद को मिलिट्री अस्पताल में नर्स बताती थी महिला 
वह महिला फेसबुक पर बेहद सक्रिय रही। उसने खुद को मिलिट्री अस्पताल में नर्स बताया था। अनीता के फेसबुक अकाउंट पर उसका होमटाउन श्रीगंगानगर, राजस्थान लिखा था। उसने पिता के नाम वाली जगह पर संतोष दास लिखा। पते के तौर पर उसने दक्षिणी दमदम 'पश्चिम बंगाल' बताया। उसने सोशल मीडिया पर 12 मार्च 2021 को अकाउंट्स बनाया। अनीता ने फेसबुक पर अपने अश्लील फोटो डाले। कई कार्मिक उसके जाल में फंस गए थे। उसका आईपी एड्रेस पाकिस्तान के बहावलपुर का मिला था। भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने उसकी सक्रियता को भांप लिया। तब सीमावर्ती राज्य राजस्थान में हनीट्रैप के करीब तीन दर्जन मामले सामने आए थे। 

वायु सेना में ऐसे कई केस सामने आए 
उसी साल दिल्ली पुलिस ने भारतीय वायु सेना के अधिकारी अरुण मारवाह को अहम सूचना लीक करने के आरोप में गिरफ्तार किया था। पठानकोट एयरफोर्स स्टेशन पर तैनात एयरमेन सुनील कुमार को भी ऐसे ही मामले में गिरफ्तार किया गया था। पाकिस्तानी आईएसआई ने देश की सैन्य जानकारी जुटाने के लिए इस्लामाबाद में भारतीय उच्चायोग में भी अपना जाल बिछाया था। हालांकि समय रहते इसका पता चला गया और वहां तैनात तीन भारतीय अधिकारियों को स्वदेश बुला लिया गया। सिकंदराबाद में तैनात इंडियन आर्मी का नायब सूबेदार पाटन कुमार पोद्दार भी हनीट्रैप के चक्कर में फंस गया था। वह कई वर्ष तक आईएसआई की महिला जासूस को सेना के राज बताता रहा।

आईएसआई के कॉल सेंटर का राज खुला 
विदेश मंत्रालय का एक ड्राइवर भी हनीट्रैप का शिकार हो गया था। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने श्रीकृष्ण को गिरफ्तार किया था। फेसबुक पर श्रीकृष्ण की दो पाकिस्तानी महिलाओं से दोस्ती हुई थी। ये आपस में अश्लील बातें करने लगे। भारत की गुप्त सूचनाएं मांगी गईं। बाद में इन सूचनाओं के बदले पैसे भी दिए जाने लगे। साल 2019 में भारतीय एजेंसियों ने पाकिस्तान आईएसआई के एक कॉल सेंटर का पता लगाया था। इसका काम भारतीय सेना के जवानों और अधिकारियों को हनीट्रैप में फंसाना था। यह कॉल सेंटर इस्लामाबाद से लगभग 112 किलोमीटर दूर स्थित झेलम शहर में बनाया गया था। खास बात है कि इस कॉल सेंटर को पाकिस्तान टेलीकम्यूनिकेशन कंपनी लिमिटेड चला रही थी। यह कॉल सेंटर भारत के सिम कार्ड इस्तेमाल करता था।

सीआरपीएफ जवान से ठगे 6.23 लाख रुपये 
अप्रैल 2021 में दिल्ली के पश्चिम विहार वेस्ट में फेसबुक के जरिये दोस्ती कर सीआरपीएफ के जवान को हनी ट्रैप में फंसाने का मामला सामने आया था। एक महिला ने जवान से दोस्ती कर उससे 6.23 लाख रुपये ठग लिए। जवान जब महिला से रुपये वापस मांगता है तो वह उसे झूठे केस में फंसाने की धमकी देती। पीड़ित ने पश्चिम विहार वेस्ट थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। 

दिसंबर 2021 में एक महिला, केंद्रीय गृह मंत्रालय के निशाने पर आ गई। इंटेलिजेंस यूनिट की सलाह पर मंत्रालय ने केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के लिए अलर्ट जारी कर दिया कि उस महिला को बल की लोकेशन पर जाने से रोक दिया जाए। मंत्रालय ने कहा है कि उस महिला की गतिविधियां, राष्ट्रीय हित के लिए हानिकारक हैं। उस महिला को सीएपीएफ से रिटायर हुए एक डीजी की जानकार बताया गया था। 

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तब खूब चर्चित रही थी 'दीपाली' 
उनके समय में वह महिला, केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की कई लोकेशन पर पहुंची थी। डीजी की मेहरबानी और खुद को तीस हजारी कोर्ट में जज बताकर वह महिला, सीआरपीएफ व आईटीबीपी सहित कई बलों में अंदर तक पहुंच गई थी। महिला का नाम दीपाली (परिवर्तित नाम) बताया गया। केंद्रीय अर्धसैनिक बलों ने उस महिला को लेकर अपनी यूनिटों में कार्यालय ज्ञापन 'ओएम' जारी किया था। कार्यालय ज्ञापन में कहा गया कि सेना और सीएपीएफ में कार्यरत अधिकारियों के साथ संबंध बनाने में उस महिला की रुचि है। दीपाली, उन संबंधों का इस्तेमाल कई तरह के कार्यों में करती है। जैसे किसी का तबादला कराना है, अच्छी जगह पर तैनाती दिलानी है और किसी अहम ओहदे पर कार्यरत अधिकारी से कोई सूचना निकलवानी है, आदि के लिए वह महिला अपने संबंधों का इस्तेमाल करती है। सरकारी सेवा में कार्यरत और रिटायर्ड अधिकारियों के साथ महिला के संबंध बताए गए। विभिन्न मंत्रालयों के अलावा दिल्ली पुलिस और जम्मू कश्मीर पुलिस में भी महिला का अच्छा प्रभाव बताया गया। 
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इस साल पकड़ा गया सीआरपीएफ एएसआई
मई 2020 में सीआरपीएफ में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया था। एक कमांडेंट, हनी ट्रैप के जाल में फंसते-फंसते बचा। उन्हें फंसाने का जाल सीआरपीएफ के ही एक जवान ने बुना था। उसने अश्लील फोटो का हवाला देकर 15 लाख रुपये की मांग की थी। रिपोर्ट दर्ज कर सोरांव पुलिस ने भोपाल में तैनात रहे आरोपित सीआरपीएफ के जवान विक्की बालियान को गिरफ्तार कर लिया। इस वर्ष सीआरपीएफ का सहायक उप निरीक्षक, मोती राम जाट, सुरक्षा से जुड़ी संवेदनशील क्लासीफाइड इन्फोर्मेशन, पाकिस्तान पहुंचाता हुआ पकड़ा गया। पाकिस्तान के खुफिया अधिकारी (पीआईओ), उस वक्त मोती राम को ज्यादा पैसा देते थे, अगर राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित वर्गीकृत जानकारी वाले दस्तावेज पर सील व हस्ताक्षर होते थे। इसके अलावा, फोटो/वीडियो के ज्यादा दाम मिलते थे। सीआरपीएफ ने आरोपी को 21 मई को सेवा से बर्खास्त कर दिया था। सीआरपीएफ ने इस मामले को गंभीर मानते हुए इसे राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को भेज दिया था। 

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