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कौन हैं मनोज झा?: जहां पढ़े वहीं प्रोफेसर बने, सदन में तीखे भाषणों की वजह से पहचान, अब कविता पढ़ने पर विवाद

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिवेंद्र तिवारी Updated Wed, 27 Sep 2023 07:30 PM IST
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मनोज झा - फोटो : AMAR UJALA
संसद का विशेष सत्र खत्म हो गया लेकिन वहां पढ़ी गई एक कविता से अब बिहार की राजनीति में भूचाल आ गया है। दरअसल, महिला आरक्षण पर चर्चा के दौरान राज्यसभा में आरजेडी के सांसद मनोज झा ने ओमप्रकाश वाल्मीकि की कविता 'ठाकुर का कुंआ' पढ़ी थी। हालांकि, अब इसको लेकर आरजेडी के ही नेताओं ने सांसद के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। 
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मनोज झा - फोटो : AMAR UJALA
संसद का विशेष सत्र खत्म हो गया लेकिन वहां पढ़ी गई एक कविता से अब बिहार की राजनीति में भूचाल आ गया है। दरअसल, महिला आरक्षण पर चर्चा के दौरान राज्यसभा में आरजेडी के सांसद मनोज झा ने ओमप्रकाश वाल्मीकि की कविता 'ठाकुर का कुंआ' पढ़ी थी। हालांकि, अब इसको लेकर आरजेडी के ही नेताओं ने सांसद के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। 

पूर्व सांसद आनंद मोहन और राज्यसभा सांसद मनोज झा। - फोटो : अमर उजाला
पहले जानते हैं कि आखिर क्या है मामला? 
18 से 21 सितंबर के बीच संसद का विशेष सत्र आयोजित हुआ था। इस दौरान राज्यसभा में महिला आरक्षण विधेयक पर भाषण देते हुए राजद सांसद प्रो. मनोज झा ने ओमप्रकाश वाल्मीकि की एक कविता कोट की थी। इस दौरान उन्होंने ओमप्रकाश वाल्मीकि की रचना 'ठाकुर का कुआं' पढ़ी थी। कविता पढ़ने से पहले और पढ़ने के बाद भी उन्होंने ये कहा कि यह कविता वह किसी जाति विशेष को ठेस पहुंचाने के लिए नहीं पढ़ रहे हैं। बल्कि, ठाकुर रूपी पुरुषों को अंदर के अहंकारे के बारे में कह रहे हैं। 



 हालांकि, अब राजद के ही कुछ नेताओं ने आरोप लगाया है कि कविता के जरिए मनोज झा ने ठाकुर समुदाय का अपमान किया है। पार्टी के विधायक और पूर्व सांसद आनंद मोहन सिंह के बेटे ने चेतन आनंद ने मनोज झा के संसद में दिए बयान का विरोध किया है। उन्होंने कहा कि अपने (ठाकुरों) पर अभद्र टिप्पणी बिल्कुल नही बर्दाश्त करेंगे।

वहीं, पूर्व सांसद आनंद मोहन ने कहा कि यह अपमान बर्दाश्त नहीं होगा। सदन में महिला बिल पर बहस हो रही थी और बात कर रहे थे ठाकुर की। कहीं पर निगाहें और कहीं पर निशाना। आप अगर इतने बड़े समाजवादी हैं तो आपने अपने नाम में टाइटल क्यों लगाया। 

राजद कार्यालय में मनोज झा - फोटो : अमर उजाला
अब विवादों में घिरे मनोज झा को जानते हैं?
मनोज झा बिहार की सत्ताधारी पार्टी राजद के राष्ट्रीय प्रवक्ता हैं। इसके साथ ही वह राज्यसभा में पार्टी के सदस्य भी हैं। मनोज झा का जन्म पांच अगस्त 1967 को बिहार के सहरसा जिले में हुआ था। उनके पिता का नाम जवाहर झा और माता का नाम माधुरी झा है। 26 फरवरी 1996 को मनोज ने नम्रता से शादी की। उनकी दो बेटियां हैं। 

मनोज झा ने अपनी उच्च शिक्षा दिल्ली विश्वविद्यालय से हासिल की है। यहां से उन्होंने सामाजिक कार्य में एमए और फिर पीएच.डी. की पढ़ाई की। 

राज्यसभा में मनोज झा - फोटो : SOCIAL MEDIA
2018 में आरजेडी ने राज्यसभा का सांसद बनाया
अप्रैल 2018 मनोज झा बिहार से राज्यसभा के लिए चुने गए। इसके बाद सदस्य के रूप में उन्होंने कई संसदीय समितियों में काम किया। राजद सांसद ने नियम समिति, कोयला और इस्पात समिति, राज्यसभा के सदस्यों को कंप्यूटर प्रदान करने संबंधी समिति, रेलवे समिति, सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय की सलाहकार समिति, व्यवसाय सलाहकार समिति, श्रम, कपड़ा और कौशल विकास समिति में बतौर सदस्य काम किया है।

मनोज झा संसद में दिए गए भाषणों को लेकर अक्सर सुर्खियों में रहे हैं। जनवरी 2019 में राज्यसभा में उस समय एक अप्रत्याशित नजारा देखने को मिला, जब राजद के मनोज झा ने झुनझुना लहरा दिया। सवर्ण गरीबों को 10 प्रतिशत आरक्षण देने के निर्णय को उन्होंने झुनझुना बताया था।

राजद नेता ने चर्चा में भाग लेते हुए दावा किया था कि इस विधेयक के जरिये सामान्य वर्ग को महज एक झुनझुना दिखाया जा रहा है। इसके बाद उन्होंने अपने पास से एक झुनझुना निकाल कर दिखाया। राजद सदस्य ने झुनझुना दिखाते हुए कहा था कि यह झुनझुना तो हिलता भी है और बजता भी है, लेकिन सरकार आरक्षण के नाम पर जो झुनझुना दिखा रही है, वह केवल हिलता है, बजता नहीं है। राजद उन दलों में थी जिसने इस आरक्षण का विरोध किया था।


 

दिल्ली विश्वविद्यालय में प्रोफेसर 
फिलहाल उनकी पहचान एक राजनेता के साथ-साथ शिक्षक और शिक्षाविद के रूप में भी होती है। मनोज झा 1994 से 2002 तक दिल्ली की जामिया मिलिया इस्लामिया में सामाजिक कार्य विभाग में व्याख्याता रहे हैं।दिलचस्प है कि जिस दिल्ली विश्वविद्यालय से मनोज ने पढ़ाई की वहीं वो पढ़ा रहे हैं। मनोज 2002 से 2014 तक दिल्ली विश्वविद्यालय के सामाजिक कार्य विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर रहे। 2014 से वह दिल्ली विश्वविद्यालय के ही सामाजिक कार्य विभाग में बतौर प्रोफेसर काम कर रहे हैं।
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