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West Bengal: ममता का उत्तराधिकारी कौन? CM बनर्जी ने टीएमसी में जारी बहस पर लगाया विराम, पार्टी को बताया परिवार

Sat, 07 Dec 2024 09:04 AM IST
श्वेता महतो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता

सार

युवा पीढ़ी या अनुभवी नेताओं को प्राथमिकता देने को लेकर जारी बहस पर ममता ने कहा कि सभी महत्वपूर्ण हैं। आज की नई पीढ़ी कल के अनुभवी दिग्गज होंगे।
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ममता बनर्जी - फोटो : PTI
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विस्तार
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तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में दिग्गज नेताओं और युवा गुट के बीच जारी आंतरिक संघर्ष के बीच पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी ने अपने उत्तराधिकारी के अटकलों पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने शुक्रवार को बताया कि उनके उत्तराधिकारी के बारे में कोई भी निर्णय उनके द्वारा व्यक्तिगत रूप से नहीं बल्कि पार्टी के नेतृत्व की तरफ से सामूहिक तौर पर किया जाएगा।
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अपने उत्तराधिकारी के सवाल पर ममता बनर्जी ने दी प्रतिक्रिया
एक साक्षात्कार में ममता बनर्जी ने कहा, "मैं पार्टी नहीं हूं। हम पार्टी हैं। यह एक परिवार है और निर्णय सामूहिक रूप से लिए जाएंगे। उनसे अपने उत्तराधिकारी के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने इस सवाल को टाल दिया। टीएमसी प्रमुख ने कहा, इसका निर्णय पार्टी करेगी कि लोगों के लिए सर्वश्रेष्ठ क्या होगा। हमारे पास विधायक, सांसद और बूथ कार्यकर्ता हैं। यह एक संयुक्त प्रयास है।" युवा पीढ़ी या अनुभवी नेताओं को प्राथमिकता देने को लेकर जारी बहस पर ममता ने कहा, "सभी महत्वपूर्ण हैं। आज की नई पीढ़ी कल के अनुभवी दिग्गज होंगे।"

हालांकि, टीएमसी ने आधिकारिक तौर पर किसी उत्तराधिकारी की घोषणा नहीं की है। ममता बनर्जी की टिप्पणी उनके वफादार पुराने नेताओं बनाम अभिषेक बनर्जी के करीबी माने जाने वाली युवा पीढ़ी के नेताओं पर जारी बहस के बीच आई। बता दें कि अभिषेक बनर्जी टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव और ममता बनर्जी के भतीजे हैं। 
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ममता बनर्जी ने राजनीतिक सलाहकारों की भूमिका को संबोधित करते हुए I-PAC पर अप्रत्यक्ष रूप से कटाक्ष किया। यह 2019 से ही टीएमसी के लिए राजनीतिक सलाहकार के रूप में काम कर रहा है। उन्होंने कहा, "कुछ रणनीतिकार घर में बैठकर सर्वेक्षण करते हैं और बाद में उन्हें बदल देते हैं। वे चीजों की व्यवस्था कर सकते हैं लेकिन मतदाताओं को नहीं ला सकते हैं। यह बूथ कार्यकर्ता ही हैं जो गांवों और लोगों को जानते हैं जो वास्तव में चुनाव जीतते हैं। वे उन कारीगरों की तरह हैं जो पैसों के बदले अपना काम करते हैं, लेकिन चुनाव उनसे नहीं जीते जाते।"
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