लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी की टीम मुस्करा रही है। सीएम योगी के करीबियों में एक बड़े अफसर हैं। बड़े ठसक के साथ कहते हैं कि चाहे झारखंड हो या महाराष्ट्र मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को देख लीजिए। भला मुख्यमंत्री योगी से बढ़कर कौन है? पार्टी में भी गजब की डिमांड है। सूत्र का कहना है कि योगी जी के मंच से दिए नारे ने क्या धूम मचाई है। महाराष्ट्र में बटेंगे तो कटेंगे और झारखंड में घुसपैठियों को बाहर निकालने की आवाज कैसे मुख्य चुनावी मुद्दा बन गई। प्रधानमंत्री को भी इसी लाइन (एक रहेंगे, सेफ रहेंगे) पर आना पड़ा। झारखंड में भी यही हुआ। गृहमंत्री, भाजपा अध्यक्ष नड्डा सभी ने इसे फालो किया। हालांकि जब बात उत्तर प्रदेश में चुनाव की आती है तो....। राज्य में 9 सीटों के उपचुनाव के लिए 20 नवंबर को ही मतदान होना है। टीम योगी यह नहीं बता पा रही है कि इन 9 में से आएंगी कितनी? हां, टीम अखिलेश के संजय लाठर जरूर दावा कर रहे हैं कि 9 में 5 से अधिक जीतेंगे।
संसद के शीतकालीन सत्र में अपनी आंखों से देखिएगा परिवारवाद
संसद के शीतकालीन सत्र की तैयारी भी जोरों पर है। 25 नवंबर से आहूत हो रहे सत्र में कुछ खास होने जा रहा है। राज्यसभा में कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी हैं। लोकसभा में रायबरेली का प्रतिनिधित्व राहुल गांधी कर रहे हैं। राहुल गांधी की वायनाड़ सीट से प्रियंका गांधी वाड्रा चुनाव लड़ी हैं। भाजपा के रणनीतिकारों को पूरी उम्मीद है कि प्रियंका गांधी वाड्रा उपचुनाव का नतीजा आने के बाद सांसद बन जाएंगी। फिलहाल अभी प्रियंका गांधी परिवार के संग रणथंभोर में छुट्टियां मना रही हैं। एक मंत्री जी ने कहा कि अभी तक तो मां-बेटा-बेटी की तिकड़ी में कुछ सदन में रहकर और कुछ बाहर से पार्टी और देश चला रहे थे। अब तीनों एक छत के नीचे आ जाएंगे। वह भी झारखंड और महाराष्ट्र के चुनाव नतीजे के साथ। सूत्र का कहना है कि आखिर इससे अच्छा परिवारवाद का उदाहरण दुनिया में कहां मिल सकता है?
कोई बताए क्या करें केजरीवाल? अपनों को बचाएं या लड़ें चुनाव
ढाई साल से अरविंद केजरीवाल की पार्टी सितम झेल रही है। खुद केजरीवाल को भी मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा, लेकिन खबर है कि उनका संक्रमण काल थोड़ा और बढ़ने वाला है। दिल्ली सरकार में मंत्री रहे कैलाश गहलोत के भाजपा में जाने के बाद आप के एक और बड़े नेता भाजपा के संपर्क में हैं। वैसे भी अरविंद के डिप्टी मनीष सिसोदिया की टीम पटपड़गंज विधानसभा सीट को लेकर थोड़ा निराश है। पिछले चुनाव में भी टीम सिसोदिया चुनाव जीतने के लिए नाको चने चबाने पड़े थे। टीम सिसोदिया नए ठिकाने तलाश रही है। वहीं पश्चिमी और उत्तरी दिल्ली से भी आम आदमी पार्टी को झटका लगने की पूरी आशंका है। सिसोदिया के ही एक करीबी का कहना है कि प्रधानमंत्री मोदी खुद पिछले 10 साल से आम आदमी पार्टी का चक्रव्यूह तोड़ने में लगे हैं। सूत्र का कहना है कि इस बार की लड़ाई थोड़ा टफ है, क्योंकि उनकी पार्टी इस बार चौथी बार सरकार बनाने के लिए चुनाव में उतरेगी।
महाराष्ट्र और झारखंड में सबकुछ दांव पर
बुधवार को सुबह झारखंड में दूसरे चरण का और महाराष्ट्र में सभी सीटों के लिए मतदान शुरू हो जाएगा। झारखंड में गुरू जी के नाम से मशहूर झामुमो संस्थापक शिबू सोरेन के पुत्र और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने दाढ़ी बढ़ाकर पिता का रूप धारण कर लिया है। हेमंत ने चुनाव में बाजी मारने के लिए सबकुछ दांव पर लगा दिया है। भाजपा ने भी झारखंड में सत्ता पाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी है। केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने इस बार अपने सांसद निशिकांत दुबे पर कुछ ज्यादा भरोसा भी कर लिया है। पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन की भी परीक्षा होनी है। झारखंड का भाग्य बदलने के लिए भाजपा ने इसबार पूरी ताकत झोंक दी है।
महाराष्ट्र में इस बार शरद पवार, उद्धव ठाकरे की प्रतिष्ठा दांव पर है। पार्टी जीती तो वाह-वाह, वरना मनसे की राज ठाकरे होने का खतरा। यही हाल मुख्यमंत्री शिंदे, उपमुख्यमंत्री अजीत पवार की भी है। सबसे उत्साह में भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े हैं। बताते हैं उपमुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस ने बड़ी मेहनत की है। जोड़-तोड़ भी, लेकिन सरकार विरोधी लहर का असर भी है। इसलिए सबसे पापुलर देवा भाऊ(देवेन्द्र) अपने प्रभाव वाले क्षेत्र में चल जाएंगे, लेकिन इसके बाद उम्मीद की लौ थोड़ा धीमी चल रही है। हालांकि नागपुर के जागीरदार को भरोसा है कि इस बार डिप्टी (सहचालक) से वह ड्राइविंग सीट पर प्रमोट हो सकते हैं।
दिल्ली में अबकी बार, बस बनवा दो कमल की सरकार
अब रहा नहीं जाता। केजरीवाल सहा नहीं जाता। बहुत हुआ बस अबकी बार, दिल्ली में बनवा दो कमल सरकार। यह सब कुछ नारे हैं जो भाजपा नेताओं की बैठक में सुनने को मिल रहे हैं। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष वीरेन्द्र सचदेवा जी तोड़ मेहनत कर रहे हैं। सबसे अधिक उत्साह में हर्ष मल्होत्रा हैं। मल्होत्रा पहली बार पूर्वी दिल्ली से सांसद चुने गए और केन्द्र सरकार में कारपोरेट अफेयर मामलों के राज्यमंत्री हैं। पूर्व केन्द्रीय मंत्री स्व. सुषमा स्वराज की बेटी बांसुरी स्वराज तो बिल्कुल मां के नक्शे कदम पर हैं। गजब का बोलती हैं। युवाओं से अच्छा कनेक्ट करती हैं। भाजपा में इस राय वाले खूब हैं कि बांसुरी के चेहरे पर चुनाव हो जाए तो सरकार बननी तय है। मजे की बात है कि सांसद मनोज तिवारी भी इस बार काफी उम्मीद से हैं। प्रदेश अध्यक्ष रहे हैं। भोजपुरी स्टार हैं। दिल्ली में पूरबिया चेहरा। सब ठीक रहा तो क्या पता...? कुल मिलाकर भाजपा के हौसले बुलंद हैं और अब तो स्वाती मालीवाल, कैलाश गहलोत, कपिल मिश्रा, शाजिया इल्मी जैसे तमाम चेहरे भी भाजपा के पास हैं?
क्या अभिषेक सिंघवी बचाएंगे अरविंद केजरीवाल की इज्जत?
दिल्ली में फरवरी तक विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। भाजपा और आम आदमी पार्टी ने शीर्ष स्तर पर तैयारी शुरू कर दी है। कांग्रेस देर से तैयारी के लिए मशहूर है, क्योंकि पार्टी में कई नेता हैं और ऊपर की मंजूरी भी जरूरी है। यह हम नहीं, कांग्रेस के ही एक पूर्व प्रदेश अध्यक्ष का कहना है। कांग्रेस के पास दूसरी दुविधा यह है कि वह कितने सीटों पर चुनाव लड़ेगी? आम आदमी पार्टी से तालमेल होगा या नहीं? दक्षिणी दिल्ली के एक कांग्रेस नेता तो यहां तक तय करके बैठे हैं कि तालमेल हुआ तो दिल्ली की सत्ता में आप रहेगी और नहीं हुआ तो इस बार केजरीवाल के लिए मुश्किल हो सकती है। वहीं, कांग्रेस में इस सोच के नेता अभी भी बहुत हैं कि पार्टी को अकेले अपने दम पर विधानसभा की सभी पर चुनाव लड़ना चाहिए। एक जाट नेता ने कहा कि हरियाणा में आप मान गई होती तो सत्ता में कांग्रेस होती? वहीं कांग्रेस के ही खेमें में इसकी भी चर्चा है कि जैसे अभिषेक मनु सिंघवी की पहल पर लोकसभा चुनाव में सहमति बनी थी, संभव है कि विधानसभा में भी वह केजरीवाल की इज्जत बचा लें। देखिए आगे क्या होता है?