प्रधानमंत्री का संसदीय क्षेत्र होने के कारण वाराणसी में अचानक आई नई-नई परियोजनाओं ने ‘बनारसी हवा’ की चाल बिगाड़ने में अहम रोल निभाया है। इस शहर में चल रहे निर्माण कार्यों से उठती धूल के कारण अचानक आम जनता में एलर्जी, सांस की समस्या के शिकार लोगों की संख्या तेजी से बढ़ी है। रिपोर्ट के मुताबिक, बनारस की हवा उत्तर प्रदेश के किसी भी अन्य शहर के मुकाबले तेजी से प्रदूषित हुई है।
चिकित्सकों ने भी पिछले कुछ सालों में यहां प्रदूषित हवा के कारण बीमार होने वालों की संख्या तेजी से बढ़ने की बात मानी है। वाराणसी में दिसंबर-2017 में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 490 पर था, जिसे गंभीर श्रेणी का माना जाता है। दिसंबर-2018 में यह थोड़ा सुधरकर 384 पर रहा, लेकिन इस आंकड़े को भी बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।
दिल्ली ‘लापरवाही’ का शिकार
रिपोर्ट के मुताबिक, 7 सांसदों और 70 विधायकों की सरकार वाली राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली इन चयनित जनप्रतिधियों की ‘लापरवाही और सुस्ती’ का अनुपम उदाहरण है। हालांकि रिपोर्ट में यह भी माना गया है कि दिल्ली में कुछ तात्कालिक राहत वाले उपाय हुए हैं, लेकिन वायु गुणवत्ता सुधारने के लिए दीर्घकालिक योजना नहीं है। समूचे दिल्ली-एनसीआर की बरबादी के लिए बड़े पैमाने पर भवन निर्माण, कूड़ा जलाने, वाहनों से निकलने वाले धुएं और पड़ोसी राज्यों में पराली जलाने को जिम्मेदार माना गया है।
यह हैं प्रदूषित भारतीय शहर
| वैश्विक क्रम |
शहर |
राज्य |
| 1 |
कानपुर |
उत्तर प्रदेश |
| 2 |
फरीदाबाद |
हरियाणा |
| 3 |
वाराणसी |
उत्तर प्रदेश |
| 4 |
गया |
बिहार |
| 5 |
पटना |
बिहार |
| 6 |
दिल्ली |
राष्ट्रीय राजधानी |
| 7 |
लखनऊ |
उत्तर प्रदेश |
| 8 |
आगरा |
उत्तर प्रदेश |
| 9 |
मुजफ्फरपुर |
बिहार |
| 10 |
श्रीनगर |
जम्मू-कश्मीर |
| 11 |
गुरुग्राम |
हरियाणा |
| 12 |
जयपुर |
राजस्थान |
| 13 |
पटियाला |
पंजाब |
| 14 |
जोधपुर |
राजस्थान |