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एक्सप्लेनर: क्या हैं शौर्य कमांडो, चीन से तनाव के बीच जिन्हें आईटीबीपी ने तैयार किया; अरुणाचल में कैसी तैयारी?

Fri, 23 Oct 2026 03:52 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र स्पेशल डेस्क, अमर उजाला

सार

अरुणाचल में भारत-चीन की सीमा पर हालिया समय में क्या हुआ है? यह शौर्य कमांडोज क्या हैं, जिन्हें सीमाई क्षेत्र में चीन से निपटने के लिए तैनात किया गया है? इनके बारे में अब तक क्या-क्या जानकारियां सामने आई हैं? भारत ने चीन से निपटने के लिए अपनी रणनीति में क्या बदलाव किया है? आइये जानते हैं...
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भारत-चीन सीमा पर तैनात भारत के शौर्य कमांडोज। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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भारत और चीन के बीच तनाव एक बार फिर चरम स्तर पर पहुंचता दिख रहा है। दरअसल, बीते कुछ महीनों से अरुणाचल प्रदेश की सीमा के करीब दोनों देशों की सेनाओं के बीच कुछ मौकों पर आमना-सामना होने की खबर सामने आई थीं। अब इंडो-तिब्बती बॉर्डन पुलिस (आईटीबीपी) के निदेशक जनरल शत्रुजीत सिंह कपूर ने इसकी पुष्टि की है। उन्होंने कहा है कि बीते कुछ दिनों में अरुणाचल प्रदेश में कुछ स्थानों पर सैनिकों के बीच आमना-सामना हुआ है। हालांकि, इसी के साथ उन्होंने यह भी कहा कि हाल ही में बनाई गई शौर्य कमांडोज की टीम ने टकराव की स्थिति में चीनी सेना के खिलाफ जबरदस्त प्रदर्शन किया है। उन्होंने कहा कि यह कमांडो हर बटालियन में होंगे और सैन्यबल को अलग पहचान देंगे। 
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आईटीबीपी डीजी ने यह पूरी जानकारी राजस्थान के अलवर में आईटीबीपी जवानों के एक सम्मान समारोह के दौरान कहीं। उनके बयानों के सामने आने के बाद जहां एक तरफ देश की सियासत गरमा गई है, वहीं कई लोगों के मन में 'शौर्य कमांडोज' के जिक्र ने कौतूहल भी पैदा किया है। वैसे यह पहली बार नहीं है, जब देश में शौर्य कमांडोज का जिक्र किया गया हो। इससे पहले भी कुछ मौकों पर इनकी चर्चाएं हुई हैं।

आइये जानते हैं कि यह शौर्य कमांडोज क्या हैं और इनके बारे में अब तक क्या-क्या जानकारियां सामने आई हैं?
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क्या हैं शौर्य कमांडोज, जो अरुणाचल सीमा पर चीन से ले रहे टक्कर?

भारतीय सेना के बाद अब आईटीबीपी डीजी की तरफ से जो जानकारी सामने आई है, उसके मुताबिक शौर्य कमांडोज इस सशस्त्र बल के अंदर ही बनाई गई एक खास संघर्ष टुकड़ी है, जो कि चीन सीमा पर सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए बनाई गई है। एसएस कपूर ने शौर्य कमांडोज का जिक्र करते हुए कहा कि यह नई कॉम्बैट टीम, अब हर सीमाई बटालियन का हिस्सा होगी और आईटीबीपी को अलग पहचान देगी। 

उन्होंने कहा कि अरुणाचल में चीन सीमा पर पारंपरिक ढंग से संघर्ष अब पुराने समय की बात हो गई है इसलिए सैन्यबल के आधुनिकीकरण, इसके हथियारों, वाहनों और बॉर्डर पोस्ट्स के आधुनिकीकरण में निवेश बढ़ाया जा रहा है। माना जा रहा है कि इसी निवेश के जरिए आईटीबीपी अब चीन सीमाओं पर केंद्रित एक ऐसी टुकड़ी गठित कर रही है, जो कि सिर्फ ऊंचाई वाली जगहों पर संघर्ष के लिए तय होंगी।

आईटीबीपी के डीजी शत्रुजीत सिंह कपूर। - फोटो : अमर उजाला
गौरतलब है कि शौर्य कमांडोज का जिक्र पहली बार नहीं हो रहा है। इससे पहले इनका जिक्र भारतीय सेना की तरफ से भी किया जा चुका है। कुछ समय पहले ही सेना के दक्षिण कमांड ने अपने एक्स हैंडल पर पोस्ट कर कहा था कि सैन्य ढांचे के अंदर एक ऐसी टुकड़ी को तैयार किया जा रहा है, जो कि आधुनिक-सामरिक पक्ष में सबसे आगे होगी।  सेना की तरफ से अमोघ ज्वाला नाम के एक अभ्यास में शौर्य स्क्वाड्रन के कमांडोज के शामिल होने की जानकारी दी गई थी। 

दक्षिणी कमांड ने कहा था, "युद्धक्षेत्र की वास्तविक परिस्थितियों में परखे गए इस शौर्य स्क्वाड्रन ने एक आधुनिक लड़ाकू इकाई के रूप में अपनी क्षमताओं का अभ्यास किया। इसमें सटीक हमले, गहन निगरानी और करीबी युद्ध-क्षेत्र की टोह को आपस में बेहतरीन ढंग से जोड़ा गया था। दूर तक देखने, गहराई में जाकर हमला करने और लंबे समय तक डटे रहने के लिए तैयार, 'शौर्य स्क्वाड्रन' ने साबित किया कि वह वास्तविक समय में जानकारी जुटाने के साथ-साथ, त्वरित और सटीक हमले करने में भी सक्षम है। इस अभ्यास से अहम परिचालन जानकारियां मिलीं, जो यह दर्शाती हैं कि आधुनिक युद्धक्षेत्र में टोह लेने की प्रभावशीलता को काफी हद तक बढ़ाने की क्षमता इस स्क्वाड्रन में मौजूद है।"

अब जानें- अरुणाचल प्रदेश से लगी चीन सीमा पर कैसे हैं हालात? 

  • आईटीबीपी के डीजी शत्रुजीत सिंह कपूर ने पुष्टि की है कि बीते कुछ महीनों में अरुणाचल प्रदेश में कई जगहों पर दोनों देशों के सैनिकों का आमना-सामना हुआ है और तनाव की स्थिति के बीच टकराव बना हुआ है। 
  • कांग्रेस का दावा है कि स्थानीय लोग अरुणाचल में कई गश्ती ठिकानों के खोने का दावा कर रहे हैं। पार्टी ने कहा कि बीते महीने ताक्सिंग में हुए टकराव के बाद वाचा और दमई में कोर कमांडर स्तर की वार्ता हुई है। 


अरुणाचल में चीन से निपटने के लिए और किस तरह की तैयारी?

अरुणाचल में चीन से जारी टकराव की स्थिति के बीच खुद आईटीबीपी प्रमुख ने भारत की तैयारियों को लेकर जानकारी दी है। 

ये भी पढ़ें: 'अरुणाचल में भारत-चीन सैनिकों के बीच तनाव बरकरार': आईटीबीपी के डीजी ने बताई स्थिति, और क्या-क्या कहा?

1. सीमा पर तैनात हर टुकड़ी में ड्रोन प्लाटून शामिल

  • भारत की चीन से लगती 3488 किलोमीटर की सीमा पर तैनात आईटीबीपी की हर बटालियन के पास अब एक अलग ड्रोन प्लाटून है और सेना लगातार ड्रोन उड़ाने वाले पायलट्स की ट्रेनिंग कर रही है और खुद ड्रोन्स बना रही है। 
  • केंद्रीय गृह मंत्रालय की तरफ से आईटीबीपी के आधुनिकीकरण के लिए दी गई 4000 करोड़ रुपये की राशि में से एक 1000 करोड़ रुपये ड्रोन और एंट्री ड्रोन सिस्टम की खरीद के लिए तय किए गए हैं। 
  • 88,432 जवानों वाली आईटीबी की ट्रेनिंग के लिए 400 करोड़ रुपये मुहैया कराए गए हैं। इनमें से 70 फीसदी फंड्स सैन्यबल की ड्रोन युद्ध क्षमताओं को बढ़ाने और ट्रेनिंग के लिए तय किए जा चुके हैं। 

आईटीबीपी के डीजी शत्रुजीत सिंह कपूर। - फोटो : अमर उजाला

2. चीन से लगी सीमाओं पर अंडरग्राउंड बंकर्स का निर्माण तेज

चीन से लगी सीमाओं पर भूमिगत (अंडरग्राउंड) बंकर्स का निर्माण तेजी से हो रहा है। चूंकि संघर्ष की स्थिति में जमीन के ऊपर खड़ी इमारतें आसान निशाना होती हैं, इसलिए आने वाले दिनों में ऐसे भूमिगत बंकर्स का निर्माण तेज होगा, जो सभी सुविधाओं से लैस होंगे। 


3. गलवां जैसी स्थिति से निपटने के लिए स्ट्राइक कोर्स शुरू

  • आईटीबीपी के लिए एक नया 'स्ट्राइक' कोर्स शुरू किया गया है, जिसके तहत जवानों को गलवां जैसी स्थिति से निपटने के लिए तैयार किया जा रहा है। 2027 के अंत तक पूरे सैन्यबल की ट्रेनिंग कराई जाएगी। 
  • यह ट्रेनिंग जून 2020 में लद्दाख के गलवां में एलएसी के करीब उस स्थिति से निपटने के लिए तैयार की गई है, जिसमें चीनी सेना के जवानों ने भारतीय सैनिकों पर पत्थर, कील लगी लाठियां, लोहे के डंडों से अचानक हमला कर दिया था। तब हुए अप्रत्याशित हमले में सेना के 20 जवानों की जान चली गई थी। 

ये भी पढ़ें: आईटीबीपी प्रमुख का बड़ा बयान: 'अरुणाचल में चीनी सेना से अब भी हो रहा आमना-सामना'; कांग्रेस ने सरकार को घेरा
 

आईटीबीपी की ताकत। - फोटो : अमर उजाला

4. पहाड़ों पर ठंड से बचाने के लिए 90% बैरकों में गर्म बंकरों का इंतजाम

सर्दियों के मौसम में पहाड़ों पर पड़ने वाली भीषण ठंड और तापमान के शून्य से भी नीचे माइनस में जाने से सैनिकों को जो दिक्कतें होती थीं, उनसे भी निपटने की तैयारी की गई है। अब तक भीषण ठंड वाले 383 में से 342 बैरकों में गर्म बंकरों का इतंजाम किया जा चुका है। इनके लिए 141 जेनरेटरों का इंजाम किया गया है, ताकि दूरस्थ जगहों पर तैनात सैनिकों को भी बिजली मिल सके। इनके गर्म पानी के इंतजाम के लिए सोलर वॉटर हीटर्स भी लगाए गए हैं। 

इसके अलावा सैनिकों को कोल्ड स्टार्ट किट दी गई है, जिससे बर्फीले मौसम में भी सैन्य वाहनों को तुरंत चालू किय जा सकेगा। आईटीबीपी डीजी के मुताबिक, ठंड में कई बार गाड़ियां स्टार्ट ही नहीं होतीं। ऐसे में यूक्रेन के कोसोवो में भीषण ठंडे तापमान में भी गाड़ियों के तुरंत स्टार्ट तकनीक से सीख लेते हुए भारत में प्रयोग के जरिए ऐसी ही तकनीक तैयार कर ली गई है। 
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5. जवानों के लिए नए डाइट प्लान, हथियारों का आधुनिकीकरण भी जारी

  • आईटीबीपी के जवानों के लिए अब डाइट प्लान में भी बदलाव किया जा रहा है। उन्हें ठंड के मौसम में भी फिट और स्वस्थ रखने के लिए खानपान बदला गया है और अब उच्च शुगर और तेल वाले खाने को कम किया जा रहा है। 
  • इसके अलावा आईटीबीपी को मिलने वाले हथियारों को भी आधुनिक किया गया है। कई जवानों के पास 50 साल पुराने हथियार थे, जिन्हें बदला गया है। इसके अलावा पहाड़ की जरूरतों के लिहाज से हर सतह पर चलने वाले वाहन और तेज-प्रतिक्रिया वाले वाहनों का अधिग्रहण किया जा रहा है।

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