विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने रविवार को कहा कि विभिन्न देश किस तरह से स्वच्छता सेवाएं सभी को मुहैया करा सकते हैं, ‘स्वच्छ भारत’ अभियान इसका एक अच्छा उदाहरण है।
डब्ल्यूएचओ ने कहा कि स्वच्छ भारत कार्यक्रम के तहत साल 2016 से 2018 के बीच घरेलू स्वच्छता का दायरा सालाना 13 फीसदी की दर से बढ़ा है। उसने कहा कि हर किसी की सुरक्षित स्वच्छता सुविधाओं तक पहुंच होनी चाहिए, जिसमें गुणवत्ता वाले सीवेज सिस्टम से जुड़े स्वच्छ शौचालय शामिल हैं।
दक्षिण-पूर्वी एशियाई क्षेत्र के देशों के लोगों के साथ दुनियाभर में इन सेवाओं तक पहुंच अभी भी एक बड़ी समस्या बनी हुई है। दक्षिण-पूर्वी एशिया के लिए डब्ल्यूएचओ की क्षेत्रीय निदेशक डॉ पूनम खेत्रपाल सिंह ने कहा कि पूरे क्षेत्र में 90 करोड़ लोग प्राथमिक स्वच्छता सुविधाओं से वंचित हैं जबकि 50 करोड़ लोग खुले में शौच करते हैं।
सिंह ने कहा कि हाल के वर्षों में सदस्य देशों ने संतोषजनक प्रगति की है और पूरे क्षेत्र में प्राथमिक स्वच्छता का शहरी दायरा करीब 70 फीसदी हो गया है। अधिकतर देशों में ग्रामीण दायरा 50 फीसदी से अधिक हो गया है जबकि खुले में शौच करने वालों की संख्या 50 फीसदी अधिक से घटकर 30 फीसदी अधिक रह गई है। वहीं कई सदस्य देशों में प्राथमिक स्वच्छता सेवाओं का दायरा 90 फीसदी तक पहुंच गया है।