गंगा को अविरल और निर्मल बनाने के उद्देश्य से कानून बनाने के लिए केेंद्र सरकार ने गंगा महासभा के मुखिया गिरिधर मालवीय की अध्यक्षता में एक समिति बनाई थी। इसने पिछले साल अप्रैल में अपनी रिपोर्ट केंद्र को दे दी थी। कानून बनाने की दिशा में बात आगे न बढ़ने पर विरोधस्वरूप स्वामी सानंद अनशन पर बैठे। उनकी 113 दिनों के अनशन के बाद मौत हो गई।
गंगा में कम पानी और गाद अब भी बड़ी समस्या है। सरकार ने इस नदी में परिवहन को हरी झंडी तो दी है, मगर बीते महीने इसकी सच्चाई तब सामने आई, जब हल्दिया से बनारस रवाना किया गया जहाज गाद और कम पानी के कारण कई जगह फंस गया। पहले यह फरक्का में फंसा। इसके बाद यह जहाज पटना में रेत में फंस गया।
गंगा महासभा के सदस्य स्वामी जीतेंद्रानंद सरस्वती ने इस बारे में कहा कि हमें संतोष है कि आखिरकार सरकार बिल ला रही है। सरकार ने स्वामी सानंद के 80 फीसदी सुझावों को शामिल किया है। सरकार को बताना चाहिए कि अस्वीकार किए गए 20 फीसदी सुझाव कौन से हैं। सरकार को मसौदे पर सभी पक्षों से वार्ता करनी चाहिए।