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सऊदी अरब के तेल प्लांट पर ड्रोन हमलों के आरोप के बावजूद हसन रुहानी से मिल सकते हैं ट्रंप

Mon, 16 Sep 2019 12:33 AM IST
Nilesh Kumar वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप - फोटो : PTI
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सउदी अरब के तेल संयंत्रों पर ड्रोन हमले के पीछे ईरान का हाथ होने का आरोप लगाने के बावजूद अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने ईरानी समकक्ष हसन रूहानी से मुलाकात कर सकते हैं। व्हाइट हाउस ने रविवार को यह जानकारी दी।

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व्हाइट हाउस की काउंसलर के. कॉनवे ने टेलीविजन पर प्रसारित साक्षात्कार में इसकी संभावनाओं से इनकार नहीं किया क्योंकि सउदी अरब ने ड्रोन हमले से प्रभावित हुए तेल संयंत्रों में संचालन प्रक्रिया फिर से शुरू कर दी है। इस हमले की वजह से सउदी का उत्पादन घट गया था।

पड़ोसी यमन में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने शनिवार को एक बड़ी तेल कंपनी अरामको के दो बड़े तेल संयंत्रों पर हमले का दावा किया। हालांकि अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ ने इसके लिये ईरान पर आरोप लगाया है और कहा कि दुनिया के सबसे बड़े तेल आपूर्तिकर्ता कंपनी पर हमले को लेकर ऐसा कोई सबूत नहीं मिला है जो यह बताता हो कि हमला यमन ने किया है।
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‘फॉक्स न्यूज संडे’ को दिये साक्षात्कार में कॉनवे ने कहा कि आगामी संयुक्त राष्ट्र महासभा की न्यूयॉर्क सत्र की बैठक के बाद ट्रंप अपने सुझाव पर विचार करेंगे। उन्होंने कहा कि समझौता या बैठक करने का अधिकार हमेशा राष्ट्रपति के पास होता है।

सऊदी तेल संयंत्रों पर हमला: अमेरिका, ईरान आमने-सामने

सऊदी अरब की सरकारी तेल कंपनी ‘सऊदी अरामको’ के दो संयंत्रों पर ड्रोन हमलों के बाद जहां उत्पादन क्षमता घटकर आधी रह गई है, वहीं अमेरिका और ईरान के बीच तनातनी भी चरम पर पहुंच गई है। अमेरिका ने हमलों के लिए सीधे तौर पर ईरान को जिम्मेदार ठहराया है। अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने कहा कि इस बात का सुबूत नहीं है कि तेल संयंत्रों पर हमले यमन से किए गए। वहीं, एक शीर्ष अमेरिकी सीनेटर ने इसके जवाब में ईरान के तेल रिफाइनरी पर हमले की बात तक कह दी।

इस बीच, अमेरिका आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए ईरान के शीर्ष कमांडर आमिर अली हाजीदेह ने युद्ध की धमकी तक दे डाली। हाजीदेह ने चेतावनी देते हुए कहा कि अमेरिका को यह समझ लेना चाहिए कि उसके सैन्य अड्डे और युद्धपोत ईरान की मिसाइलों की जद में हैं। हम अमेरिका के साथ पूर्ण युद्ध के लिए तैयार हैं।

कार्रवाई का बहाना ढूंढ रहा अमेरिका: मूसावी

पोम्पियो के आरोपों को निराधार बताते हुए ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अब्बास मूसावी ने कहा, ‘अमेरिका इस्लामी गणराज्य के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए कोई बहाना ढूंढ रहा था। ऐसे निराधार, बिना सोचे समझे लगाए गए आरोप और टिप्पणियां निरर्थक व समझ से परे हैं। ऐसे आरोप ईरान के खिलाफ कार्रवाई को उचित ठहराने के लिए हैं।’

उन्होंने कहा कि ऐसी टिप्पणियां किसी देश की छवि खराब करने के लिए खुफिया संगठनों का कुचक्र रचने और भविष्य के कदमों की रूपरेखा तैयार करने के लिए की गई ज्यादा लगती हैं। अमेरिका की नीति ‘अधिकतम दबाव’ बनाने की है।
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इराक से जुड़ रहे सऊदी हमले के तार

हमले के तार इराक से भी जुड़ते नजर आ रहे हैं। कुछ मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया कि तेल संयंत्रों पर हमलों को इराक की धरती से अंजाम दिया गया, जहां ईरान समर्थित अर्धसैनिक ग्रुप लगातार अपनी ताकत बढ़ा रहे हैं। इराक सरकार ने इन रिपोर्टों को खारिज कर दिया। सरकार ने कहा कि अगर उसकी धरती का हमले के लिए लांच पैड के तौर पर इस्तेमाल किया गया है, तो दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।

जब ट्रंप ने दिया था हमले का आदेश

इससे पहले जून में अमेरिका और ईरान के बीच ड्रोन गिराए जाने को लेकर तनाव चरम पर पहुंच गया था। खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी ड्रोन गिराए जाने के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर हमले का आदेश तक दे दिया था। हालांकि, उन्होंने अंतिम समय में अपने इस आदेश को वापस ले लिया था और युद्ध बादल छंट गए गए। 
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