तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता को अस्पताल में भर्ती करते समय पुलिस के कहने पर सीसीटीवी कैमरे बंद किए गए थे। अपोलो अस्पताल प्रशासन ने शनिवार को जयललिता की मौत की जांच कर रही जस्टिस ए अरुमुगास्वामी की समिति को दिए हलफनामे में यह बात कही है।
अपोलो अस्पताल द्वारा सीसीटीवी और प्रेस रिलीज को लेकर पूछे गए सवालों के जवाब में दाखिल किए गए पांच पेज के हलफनामे में कहा गया है कि तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता को टेस्ट के लिए कमरे से ले जाने और उन्हें वापस कमरे में लाने के दौरान, गलियारे में लगे सीसीटीवी कैमरों को बंद कर दिया जाता था। ऐसा पुलिस अधिकारियों के निर्देशों पर किया जाता था, जिनमें पुलिस महानिरीक्षक (इंटेलिजेंस) केएन साथियामूर्ति शामिल थे।
वहीं, जयललिता के स्वास्थ्य को लेकर 23 सितंबर 2016 को जारी की गई पहली प्रेस रिलीज के संबंध में अस्पताल का कहना है कि पूर्व मुख्यमंत्री भी इसे तैयार करने में शामिल रही थीं। अस्पताल के मुताबिक, जयललिता इस बात को लेकर चिंतित थीं कि उनके स्वास्थ्य को लेकर जो भी खबर बाहर जाए, उससे लोगों में किसी तरह की दहशत न फैले।
प्रेस विज्ञप्ति जारी करने से पहले तत्कालीन स्वास्थ्य सचिव जे राधाकृष्णन और मुख्य सचिव रामा मोहन राव की मंजूरी ली गई थी। अस्पताल में पूर्व सीएम के इलाज पर उठे सवालों के बाद राज्य सरकार ने मौत की जांच के लिए समिति का गठन किया था। जयललिता की मौत 5 दिसंबर 2016 को हुई थी और वह करीब 75 दिन यहां भर्ती रही थीं।