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कौन सा मास्क आपको कोरोना से बचा सकता है? खरीदने से पहले पढ़ें ये जानकारी

Wed, 27 May 2020 07:33 PM IST
Harendra Chaudhary अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • विशेषज्ञों का आरोप, भारत में एन-95 मास्क की गुणवत्ता को चेक करने की उचित व्यवस्था नहीं
  • बाजार में उपलब्ध कई मास्क की गुणवत्ता हो सकती है खराब, केवल अच्छी कंपनियों के मास्क खरीदने की सलाह
  • सामान्य जगहों पर रहने वाले लोगों के लिए तीन स्तर वाला सामान्य मास्क ही पर्याप्त,
  • संक्रमित या अस्पताल जैसी जगह काम करने वालों को एन-95 मास्क पहनने की सलाह
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : PTI
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विस्तार
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कोरोना संक्रमण का खतरा बढ़ने के साथ ही बाजार में पीपीई किट्स और मास्क बनाने वाली कंपनियों की बाढ़ आ गई है। भारत भी अब बड़ी मात्रा में पीपीई किट्स और मास्क बनाने लगा है। सरकार इसे अपनी उपलब्धि के तौर पर बता रही है। इनके उपयोग से कोरोना संक्रमण से पूरी तरह सुरक्षित होने का दावा किया जा रहा है।

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लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि भारत के पास एन-95 मास्क के प्रमाणन की कोई उचित व्यवस्था नहीं है, जिसके कारण बाजार में उपलब्ध कई कंपनियों के मास्क उचित गुणवत्ता के नहीं हो सकते हैं।

ऐसे मास्क के उपयोग से लोगों में सुरक्षित होने का गलत भाव पैदा होता है और वे संक्रमण के प्रति लापरवाह हो जाते हैं।

इसका परिणाम होता है कि संवेदनशील जगहों पर काम करने वाले लोग मास्क पहनने के बाद भी कोरोना से संक्रमित हो रहे हैं।

एम्स अस्पताल के डॉक्टर आर श्रीनिवास ने अमर उजाला को बताया कि पीपीई किट्स और एन-95 मास्क पहनने के बावजूद अनेक स्वास्थ्यकर्मी कोरोना संक्रमित पाए जा रहे हैं।
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उचित गुणवत्ता का मास्क और पीपीई किट्स का न पहनना इसका एक बड़ा कारण हो सकता है। सरकार को इसका संज्ञान लेना चाहिए।

भारत में प्रमाणन की उचित संस्था नहीं

डॉक्टर आर श्रीनिवास के मुताबिक एन-95 मास्क की गुणवत्ता को तय करने के लिए अमेरिका में नियोश (NIOSH) संस्था काम करती है।

इसी प्रकार यूरोप में FFP2 और चीन में KN95 एन-95 मास्क की गुणवत्ता के लिए प्रमाण पत्र जारी करते हैं। लेकिन भारत में अभी इस प्रकार की कोई संस्था नहीं है।

सामान्य तौर पर अमेरिकी या यूरोपीय पैमाने को ही भारत में भी स्वीकार कर लिया जाता है।

लेकिन किसी कंपनी के उत्पाद इन मापदंडों पर खरे उतरते हैं या नहीं, इसकी चेकिंग के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं है।

मास्क और पीपीई किट्स पहनने के बाद भी डॉक्टरों के कोरोना संक्रमित होने के कारण विशेषज्ञों का अनुमान है कि बाजार में उपलब्ध एन-95 मास्क की गुणवत्ता से काफी समझौता किया जा रहा है।

 

एन-95 मास्क की विशेषताएं

किसी भी वायरस के संक्रमण से बचने के लिए एन-95 मास्क सबसे बेहतर माना जाता है। एन-95 में N का अर्थ मास्क के तैलीय कणों को रोकने से होता है और इसके साथ जुड़ा अंक कणों के साइज को इंगित करता है।

एन-95 मास्क वायु में उपलब्ध 0.3 माइक्रॉन या इससे अधिक मोटाई के किसी भी कण को बाहर ही रोकने में सक्षम होता है।

एन सीरीज (N-95, N-99 और N-100) की तरह आर और पी सीरीज के मास्क भी अमेरिकी-यूरोपीय बाजारों में उपलब्ध होते हैं।

एन सीरीज का मास्क तैलीय कणों को रोकने के लिए पर्याप्त नहीं माना जाता है, जबकि आर सीरीज के मास्क R95, R99 और R100 कुछ मात्रा में तैलीय कणों को भी रोक सकते हैं।

जबकि पी सीरीज के मास्क (P95, P99 और P100) ज्यादातर तैलीय कणों को रोकने में सक्षम होते हैं। इन्हें ऑयल प्रूफ कहकर भी बेचा जाता है।

एन-95 मास्क की सबसे बड़ी विशेषता है कि यह मुंह पर पूरी तरह फिट बैठ जाता है। मुंह के आसपास कोई भी खुली जगह न होने के कारण किसी भी दिशा से कोई संक्रमण शरीर के अंदर प्रवेश नहीं कर पाता है।

इसे पहनने के बाद डॉक्टर या मरीज संक्रमण से पूरी तरह सुरक्षित रहते हैं।

बाजार में एन-98 या एन-99 मास्क भी उपलब्ध हैं। ये 0.3 माइक्रॉन से भी छोटे कणों को बाहर रोकने में सक्षम होते हैं, लेकिन इन्हें पहनने से घुटन महसूस होती है।

इनसे पर्याप्त वायु शरीर को नहीं मिल पाती है। इसीलिए विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि लोगों को एन-95 मास्क ही इस्तेमाल करना चाहिए।

इनसे ज्यादातर वायरस और बैक्टीरिया शरीर के बाहर ही रोक दिये जाते हैं।

सर्जिकल मास्क

सर्जिकल मास्क सामान्य तौर पर डॉक्टर, नर्स और मरीज पहनते हैं। इसे पहनने से वायु में मौजूद बड़े सूक्ष्म कणों से रक्षा हो जाती है।

यह बैक्टीरिया को शरीर में प्रवेश करने से रोकने के लिहाज से बेहतर माना जाता है। लेकिन यह बहुत महीन वायरस या धूल कणों को रोकने में सक्षम नहीं होता है।

इसकी सबसे बड़ी कमी यह होती है कि यह चारों ओर से खुला होता है। इसलिए सीधे संक्रमण को रोकने के बाद भी आसपास के संक्रमण से पूरी तरह रक्षा नहीं हो पाती है।

यही कारण है कि ज्यादा संवेदनशील मामलों में स्वास्थ्यकर्मी इसे पहनने से परहेज करते हैं।

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किसे खरीदें

बीएलके अस्पताल के सीनियर डॉक्टर संदीप नायर के मुताबिक किसी भी वस्तु की मांग बढ़ने पर बाजार में उसके उत्पादन की कई कंपनियां अचानक बाजार में आ जाती हैं।

लेकिन सभी की गुणवत्ता को जांचा नहीं जाता है। इससे लोगों के स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है। गुणवत्ता के साथ कोई समझौता न करने के लिए केवल अधिकृत कंपनियों के ही मास्क खरीदना चाहिए।

बाजार में 3एम, वीनस मास्क और हनीवेल कंपनियां एन-95 मास्क के उत्पादन में प्रसिद्ध हैं। इनके मास्क को बहुत उच्चकोटि का माना जाता है।

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