अदालतों में जजों की कमी और लंबित मामलों के अंबार से चिंतित सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को सभी राज्यों से पूछा है कि क्या अखिल भारतीय परीक्षा के जरिये जजों की भर्ती की जा सकती है या नहीं? शीर्ष अदालत ने पूछा कि नेशनल एलिजिबिलिटी एंट्रेंस टेस्ट (नीट) की तर्ज पर संयुक्त परीक्षा संभव है?
चीफ जस्टिस जेएस खेहर की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने केंद्र और सभी राज्य सरकारों को इस मसले पर 30 जून तक अपना-अपना पक्ष रखने के लिए कहा है। पीठ ने कहा है कि हमें ऐसा लगता है कि रिक्तियों को भरने के लिए एकल एजेंसी होनी चाहिए।
हालांकि पीठ ने कहा कि हमारा संघीय ढांचे को छूने का कोई इरादा नहीं है। पीठ ने कहा कि अभ्यर्थी अपने राज्य और अपनी पसंदीदा भाषा में विभिन्न राज्यों के लिए एकल संयुक्त परीक्षा में शामिल हो सकते हैं। पीठ ने कहा कि हमारी प्राथमिकता निचली अदालतों में रिक्तियों को भरना है।
विधि विभाग की सचिव स्नेहलता श्रीवास्तव के पत्र पर स्वत: संज्ञान लेते हुए पीठ ने कहा कि हम निचले स्तर पर खाली पड़े पदों को भरने की प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए कह सकते हैं। स्नेहलता श्रीवास्तव ने निचली अदालतों के लिए संयुक्त रूप से न्यायिक अधिकारी की नियुक्ति की सिफारिश की थी।
उन्होंने कहा था कि संघ लोक सेवा आयोग के जरिये अखिल भारत स्तर पर संयुक्त परीक्षा आयोजित की जा सकती है। सॉलिसिटर जनरल रंजीत कुमार ने कहा कि कई हाईकोर्ट को जिला अदालतों में न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति करने में परेशानी आ रही है।