कोरोना से जंग के मोर्चे पर डॉक्टर
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वो लोग जहां चंद घंटे मास्क लगाने को किसी सजा से कम नहीं समझ रहे हैं, उनके लिए देश के डॉक्टर बहुत बड़े उदाहरण हैं। वो इस महामारी की संकट में दो धारी तलवार पर चल रहे हैं। अपना और परिवार का ख्याल रखने के साथ ही वे मरीजों का भी पूरा ख्याल रख रहे हैं जैसे वे सामान्य दिनों मे रखते थे। इस उमस और गर्मी भरे मौसम में वे रोजाना कई घंटे मास्क लगाए, पीपीई सूट पहने अपनी ड्यूटी को अंजाम दे रहे हैं। ऐसे ही एक डॉक्टर हैं मुंबई के डॉक्टर अमोल पवार। पवार के मुताबिक जब मरीज स्वस्थ होकर घर जाता है तो डॉक्टर के लिए सबसे बड़ा पुरस्कार होता है।
मुंबई के परेल स्थित नुसरजी वाडिया मैटरनीटी अस्पताल में कार्यरत डॉ. अमोल प्रसूति और स्त्री रोग विशेषज्ञ हैं। महामारी के इस दौर में वे अपनी जिम्मेदारी को बखूबी निभा रहे हैं। अस्पताल कर्मचारियों के साथ ही वे मरीजों के लिए जाना-पहचाना चेहेरा बन गए हैं। अस्पताल में वो कभी नवजात को गोदी में खिलाते नजर आ जाएंगे तो कभी मरीज का हौसला बढ़ाते हुए, तो कभी साथ काम करने वालों के साथ मुश्किल केस पर चर्चा करते हुए या फिर गंभीर मरीज के परिजनों की काउंसलिंग करते हुए। उनका कहना है कि सबसे ज्यादा खुशी तब होती है जब कोई मरीज सही होकर अपने घर जाता है।
संक्रमित होने के बावजूद फोन से जारी रखी सेवा
450 बेड वाले इस अस्पताल में 35बेड कोविड वार्ड में तो 15 आईसोलेनश वार्ड में हैं। पवार ने बताया कि उनकी कोशिश होती है कि काम के दौरान कोई भी कर्मचारी संक्रमण की चपेट में न आए। उन्होंने बताया कि पिछले साल सितंबर में वह संक्रमण की चपेट में आ गए थे। और अंधेरी के अस्पताल में तीन हफ्तों तक भर्ती रहे। चार दिन तक वह ऑक्सीजन सपोर्ट पर थे। लेकिन पांचवें दिन से वह फोन और अपने सहायक की मदद से दोबारा से लोगों की सेवा में जुट गए।
लोगों की नासमझी से होता है दुख
उन्होंने बताया कि उनका और अन्य साथियों को टीका लग चुका है। वे लोग अपनी जिम्मेदारियों को समझते हैं और अन्य लोगों की तरह घर में रहकर काम नहीं कर सकते भले ही इस दौरान कई परेशानियां हो जैसे पीपीई किट्स पहनने के बाद हम कुछ खा पी नहीं सकते, रेस्ट रूम में आराम नहीं कर सकते। इसलिए पूरी सुरक्षा के साथ अपने काम को अंजाम दे रहे हैं। इसके साथ ही कभी-कभी वे विद्यार्थियों को ऑनलाइन क्लास भी देते हैं। उन्होंने बताया कि डॉक्टरों को तब निराशा होती है जब लोग जानते हुए भी कोरोना प्रोटोकॉल का पालन नहीं कर रहे हैं। वे मास्क नहीं पहन रहे। हम मरीजों की संख्या में और वृद्धि नहीं देखना चाहते । कोरोना को हराने के लिए सबको मिलकर काम करना होगा।