सुषमा स्वराज ने 12 मिनट और 23 सेकंड में अपना पक्ष रखा। स्वराज ने ललित मोदी मामले से जुड़ा हर दस्तावेज सदन के सामने रख दिया। विपक्ष यह आरोप लगा रहा था कि मेरी सिफ़ारिश पर ब्रिटेन ने ललित मोदी को यात्रा दस्तावेज दिए हैं। कुछ लोग कह रहे हैं कि मैंने ब्रिटेन से अनुरोध किया था। मैंने केवल ये लिखा कि इससे दोनों देशों के संबंध खराब नहीं होंगे।
यात्रा दस्तावेज जारी करने का निर्णय तो ब्रिटेन पहले ही ले चुका था। मैंने न तो सिफारिश की और न ही अनुरोध किया। संबंध खराब न होने की बात भी तब लिखी, जब ललित मोदी की पत्नी ने कहा— ''पुर्तगाल में उसका ऑपरेशन होना है। ये बहुत मुश्किल है। पता नहीं क्या होगा। मैं चाहती हूं कि ऑपरेशन के दौरान मेरा पति मेरे साथ रहे।''
सुषमा में कहा, मैंने मानवीय आधार पर ललित मोदी नहीं, बल्कि उसकी कैंसर पीड़ित पत्नी की मदद की है। उन्होंने कहा, 'मैं पूछना चाहती हूं कि अगर मेरी जगह सोनिया गांधी होतीं तो क्या करतीं। क्या वे ललित मोदी की पत्नी को मरने के लिए छोड़ देतीं।
सुषमा इस दौरान इमोशनल हो गई थी। खास बात है कि जब सुषमा स्वराज सदन में अपनी बात रख रही थीं तो सोनिया गांधी संसद परिसर में अपने सांसदों को निलंबित करने के खिलाफ प्रदर्शन कर रही थीं। सुषमा ने कहा कि एक महिला की मदद करना गुनाह है तो हां, मैंने गुनाह किया है। इनके बाद राहुल गांधी ने कहा, मैं सोनिया जी का बेटा होने के नाते कह सकता हूं कि वह कोई भी काम छिप कर नहीं करतीं। राहुल ने कहा कि बिल्कुल सोनियां गांधी सुषमा की तरह नहीं करतीं।