प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस साल की शुरुआत में पार्टी सदस्यों से अपील की थी कि वे 14 अप्रैल अंबेडकर दिवस से शुरू होकर 5 मई तक तीन हफ्तों तक चलने वाले लंबे कार्यक्रम के तहत पूरे देश में भ्रमण करें और दलितों के घर कम से कम एक रात गुजारें। वह चाहते थे कि सभी सांसद और विधायक उन चुने हुए गांवों में कम से कम एक रात जरूर गुजारें जहां दलितों की आबादी 20,000 या उससे ज्यादा है।
कैबिनेट मंत्रियों के साथ अनौपचारिक चर्चा में पीएम मोदी ने यह जानना चाहा कि पार्टी के कितने सदस्यों ने इन गावों में कम से कम एक रात गुजारी। कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह अकेले ऐसे थे जिनका जवाब हां में था, जहां उनके विभाग ने उनके प्रयास में उनकी सहायता की।
अब जब इस कार्यक्रम के खत्म होने में सिर्फ एक हफ्ते का समय बचा है, यह जानकारी इकट्ठा की जा रही है कि कौन-कौन इस कार्य को करने में कामयाब हो पाए।
पिछले चार सालों के दौरान पीएम मोदी ने अपनी पार्टी और इसके साथ ही अपनी सरकार के दृष्टिकोण को बदलने की कोशिश की है। उन्होंने इसे ग्रामीण और किसान हितैषी दिखाने और इस धारणा को बदलने की कोशिश की है कि बीजेपी एक शहरी, उत्तर भारतीयों और ऊंची जाति के लोगों की पार्टी है।
पार्टी सांसदों की गांव यात्रा और वहां अनिवार्य रूप से रात गुजारना, इस अपील के जरिये मतदाताओं से कहीं ज्यादा अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं को संदेश देने की कोशिश की गई।
मोदी सरकार की चौथी सालगिरह मनाने के लिए अपनी उपलब्धियों के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए गांवों का यात्रा उन लगातार की जा रही कोशिशों की श्रृंखला का एक हिस्सा है।
सड़क और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी, पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और रेल मंत्री पीयुष गोयल जैसे मंत्रियों की एक समिति सरकार द्वारा किए गए कार्यों पर एक रिपोर्ट तैयार कर रही है।
सरकार के एक वरिष्ठ सूत्र ने बताया, "सरकार पिछले 48 महीनों के दौरान किए गए कार्यों की रिपोर्ट तैयार कर रही है और हर विभाग से कहा गया है कि वह अपनी इकट्ठा की गई जानकारियों को समिति को भेजने के लिए कहा गया है।"
यूपीए सरकार अपनी वार्षिक रिपोर्ट पेश कर अपनी सरकार की सालगिरह मनाती थी। लेकिन एनडीए सरकार में समारोह दूसरी तरह से मनाए गए हैं। पीएम मोदी ने दीनदयाल उपाध्याय के जन्मस्थान नगला चंद्रबन में एक विशाल रैली की थी और इंडिया गेट में एक भव्य समारोह आयोजित किया जिसमें अमिताभ बच्चन भी शामिल थे।