वास्तव में वह विकास पुरुष थे। आज हॉट-मिक्स प्लांट से बन रही पेवर रोड की तकनीक तिवारी जी ही बतौर मुख्यमंत्री लेकर आए थे। कभी रात 12 बजे तो कभी दो और तीन बजे उनका फोन आता और दस मिनट में न सिर्फ मुझसे बल्कि लखनऊ नगर महापालिका के तत्कालीन प्रशासक एके मिश्रा, तत्कालीन मुख्य अभियंता को किसी बन रही सड़क पर निश्चित जगह पहुंचने को कहा जाता।
कोई कुर्ता पाजामा तो कोई स्लीपिंग सूट में वहां पहुंचता, तो देखता कि तिवारी जी नई सड़क के बीच में गड्ढा करा रहे हैं। गड्ढा होता और फिर तिवारी जी उसमें पानी भरवा देते। इसके बाद आगे की सड़कों की जांच को निकल लेते। अगले दिनगड्ढे में भरा पानी कुछ ही कम होता, तो कोई बात नहीं। पर, अगर गड्ढे में पानी ज्यादा खत्म हो जाता या बिल्कुल सूख जाता तो फिर संबंधित इंजीनियर की शामत।
एक बार मैंने उनसे गड्ढे का राज पूछा तो उन्होंने बताया कि किसी देश से सिर्फ तकनीक लाना ही पर्याप्त नहीं है, यह भी समझकर आना जरूरी है कि उस तकनीक का गुणवत्तापूर्वक इस्तेमाल करने के लिए क्या जरूरी है। इसीलिए जब मैं यह तकनीक लेकर आया तो यह भी समझकर आया कि हॉट-मिक्स प्लांट से पेवर तकनीक से बनी सड़कों पर बिछाए गए कोलतार पर पानी का असर नहीं होता। अगर गड्ढे में पानी ज्यादा-कम हो गया या खत्म हो गया तो समझो कि गड़बड़ी की गई है।
तिवारी जी वैसे तो अधिकारियों से बड़ी विनम्रता से बात करते थे। पर, लिखापढ़ी में बहुत सख्त थे। उनका स्पष्ट मानना था कि प्रजातंत्र में प्रजा का हित सर्वोच्च है। तंत्र यानी सरकारी मशीनरी को प्रजा के हित को ध्यान में रखकर ही काम करना चाहिए। अगर कहीं नियम और कानून भी आड़े आ रहे हों तो सरकार में बैठे लोगों को उनका भी रास्ता निकालना जरूरी है।
एक घटना याद आती है... स्वतंत्रता संग्राम सेनानी सूर्यकुमार अवस्थी तिवारी जी से मिलने गए। तिवारी जी ने उनसे पूछा कि कहां रह रहे हैं। अवस्थी जी ने बताया कि इधर-उधर रह लेता हूं। तिवारी जी ने योगेन्द्र नारायण, जो कि उनके प्रमुख सचिव थे, बुलाकर कहा, मैं सूर्यकुमार अवस्थी जी को पार्क रोड पर एक आवास देना चाहता हूं। पर, आवास नहीं हुआ। योगेन्द्र नारायण ने बताया कि राज्य संपत्ति अधिकारी अख्तर आलम कह रहे हैं कि नियमानुसार, इन्हें आवास आवंटित नहीं किया जा सकता।
तिवारी जी ने खुद अख्तर आलम से फोन पर बात की। पर, आलम मियां का वही जवाब कि आवास नहीं दिया जा सकता। तिवारी जी ने फाइल मंगवाई और उस पर लिखा, ‘मैं सूर्यकुमार अवस्थी जी को जानता हूं। यह आजादी की लड़ाई में जेल गए हैं। इनके पास रहने का ठिकाना नहीं है। मैं आदेश देता हूं कि अवस्थी जी को तुरंत पार्क रोड पर आवास आवंटित कर दिया जाए।’ नतीजा आवास तो आवंटित हुआ ही ऊपर से मुख्यमंत्री के निर्देशों का पालन न करने और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी का सम्मान न करने पर अख्तर आलम को निलंबित भी कर दिया।
- नरेश चंद्रा (वरिष्ठ कांग्रेस नेता)