राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के पास इंदिरा जी के बारे में बहुत कुछ बताने के लिए है। पूर्व प्रधानमंत्री के 100वें जन्मदिन पर व्याख्यान में प्रणब दा ने यादों को ताजा करते हुए उनके फोटो बेचने के दिनों को भी याद किया। आपको जानकर हैरानी होगी कि कभी भारतीय राष्ट्रीय काग्रेस को चलाने के लिए पैसों और संसाधन की भारी किल्लत हो गई थी। इतना कि पैसे के लिए कांग्रेस (आई) को इंदिरा जी के फोटो तक बेचने पड़े।
क्यों हुआ
प्रणब दा ने बताया कि 1978 में ब्रह्मानंद रेड्डी, वाईबी चव्हाण जैसे नेताओं के साथ मतभेद बढ़ने लगा। हालांकि इंदिरा जी से इन नेताओं का मतभेद कोई बहुत गंभीर नहीं था। इंदिरा जी वाईबी चव्हाण और रेड्डी का सहयोग करती थी, लेकिन कांग्रेस कार्यकारिणी की समिति इंदिरा जी की आलोचना का मंच बन गई थी। पार्टी के तत्कालीन नेताओं को लग रहा था कि जनता ने आपातकाल के लिए पार्टी को दंडित किया है। ऐसे में यदि पार्टी ने सत्ता में आई जनता पार्टी का सहयोग नहीं किया तो जनता कांग्रेस को माफ नहीं करेगी। लिहाजा कांग्रेस का दोबारा बंटवारा हो गया। कांग्रेस पार्टी का झंडा, अधिकृत नाम, सभी बैंक खाते, पार्टी मुख्यालय और चुनाव चिन्ह रेड्डी कांग्रेस को मिल गए। इंदिरा जी की कांग्रेस (आई) इसके चलते भारी मुफिलिसी में आ गई।
दो और पांच रुपये में फोटो
प्रणब दा ने बताया कि पार्टी को ऐसा भी दिन देखना पड़ा जब राजनीतिक अभियान को चलाने के लिए पैसे ही नहीं थे। लिहाजा उन लोगों ने इंदिरा जी के फोटो तक बेचे, जिन फोटो पर इंदिरा जी का हस्ताक्षर होता था, वह पांच रुपये में और जिन पर नहीं होता था, उसके दो रुपये लिए जाते थे। इस तरह से पार्टी ने खर्चा चलाया और फिर उठ खड़ी हुई। 1980 के आम चुनाव में इंदिरा जी फिर सत्ता में लौट आई।