पिछले कुछ वर्षों में भारत चीन सीमा पर पेट्रोलिंग के दौरान दोनों देशों के सैनिकों के बीच टकराहट की घटनाएं सामने आती रही हैं। हालांकि यह टकराहट कंधे से कंधा लगाकर एक दूसरे को गिराने का प्रयास करना, पिट्ठू बैग की मदद से धक्का देना, सैनिकों के आसपास पत्थराव करना और डंडों के जरिए सैनिकों को पीछे धकेलना, आदि के रूप में सामने आती है।
अब जबकि भारतीय सैनिकों ने अपने सामने वाले पक्ष को उन्हीं की चीनी भाषा में समझा दिया तो भी वे नहीं मान रहे। वे गतिरोध को आगे जारी रखना चाहते हैं। भारत सभी निर्माणकार्य अपनी सीमा के भीतर कर रहा है, लेकिन चीन को उस पर भी ऐतराज है।
लद्दाख में चीनी सैनिकों के जमावड़े को लेकर केंद्रीय राज्य मंत्री जनरल वीके सिंह कहते हैं कि एलएसी के आसपास चीनी फौज की मौजूदगी एक तरह से ध्यान भटकाने का हथकंडा है। कोरोना संक्रमण के मुद्दे पर चीन अभी पूरी दुनिया में घिरा हुआ है।
अब वह दुनिया का ध्यान भटकाने के लिए इस तरह का गतिरोध पैदा कर रहा है। लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर भारतीय फौज ने चीनी सैनिकों को करारा जवाब दिया है। भारत ने एलएसी से सटे इलाके में सामरिक सड़कों का निर्माण कार्य तेज कर दिया है।
जनरल वीके सिंह ने कहा कि भारत के लिए यह पहला मौका नहीं है। भारत ने पहले भी चीनी घुसपैठ को नाकाम किया है।
गलवान घाटी और पैंगोंग त्सो झील के आसपास के कई इलाकों में तनाव जारी है। चीन ने इन्हीं इलाकों में अपने सैनिकों की तैनाती बढ़ाई है। यहां निर्माण कार्य भी किया जा रहा है।र क्षा विशेषज्ञ कमर आगा के अनुसार, पैंगोंग झील के आसपास अपने सीमा क्षेत्र में भारत जब कुछ भी करता है तो चीन भड़क जाता है।
कभी वह पेट्रोलिंग बढ़ा देता है तो कभी नावों की संख्या में वृद्धि कर देता है। भारत ने अपने बुनियादी ढांचे का विकास करने की योजना बनाई तो उसे लेकर चीन आपत्ति जताने लगता है। चीन के इस रवैये की बड़ी वजह कोरोना भी है। वइ इस मामले में बुरी तरह घिर चुका है।
कई ऐसे देश हैं जो अब चीन से अपना कारोबार उठा रहे हैं। वे अपने देश में ही उत्पादन यूनिट लगाने को तव्वजों दे रहे हैं। ऐसी स्थिति में चीन, भारत के साथ गतिरोध शुरू कर दुनिया के दूसरे देशों का ध्यान असल मुद्दों से भटकाना चाह रहा है।