बरेली का फतवा न बदला है न बदलेगा। हुकूमत बदल सकती है लेकिन फतवा नहीं क्योंकि यह फतवा कुरान और हदीस का हुक्म है। यह एलान शुक्रवार को जामा मस्जिद में नमाज से पहले शहर इमाम मुफ्ती खुर्शीद आलम ने तकरीर करते हुए किया। उन्होंने कहा कि जो फतवा दिया गया, वह हिंदा के नाम से है और वह सभी पर लागू होता है। मर्द हो या औरत जो कुरान और हदीस का मुनकिर है, उस पर यह फतवा आयद है। वह खुद क्यों न हों, इस फतवे की जद से नहीं बच सकते।
मुफ्ती खुर्शीद ने अपनी तकरीर में वह दौर याद दिलाया जब आज से 40 साल पहले आपातकाल के दौर में जब मुफ्ती आजम हिंद ने नसबंदी के खिलाफ फतवा दिया था। तब तमाम लोगों ने उनसे आकर मशवरा दिया था कि फतवा बदल लीजिए, लेकिन उन्होंने जवाब दिया था कि घबराने की जरूरत नहीं है। यह बरेली का फतवा है, सरकार बदल जाएगी मगर यह नहीं बदलेगा।
और बाद में हुआ भी यही, फतवा तो नहीं बदला लेकिन सरकार बदल गई। उन्होंने कहा कि उलमा-इकराम ने कहा है कि कुरान और हदीस का हुक्म बताना हमारी जिम्मेदारी है। उसे मानना या मानना लोगों का काम है। बता दें कि तीन तलाक और हलाला के खिलाफ लड़ाई लड़ रही आला हजरत खानदान की बहू निदा खान ने इस फतवे को अपने खिलाफ बताया था। इस पर केंद्रीय अल्पसंख्यक आयोग ने फतवा जारी करने वालों के खिलाफ आईपीसी के तहत आपराधिक कार्रवाई के निर्देश दिए थे।
राज्य अल्पसंख्यक आयोग की भी टीम यहां आई थी, जिसके सामने शहर काजी मुफ्ती असजद रजा खां कादरी, शहर इमाम मुफ्ती खुर्शीद आलम और फतवा तहरीर करने वाले मुफ्ती अफजाल रजवी ने बताया था कि फतवा निदा के खिलाफ नहीं था। उसे मानना या न मानना भी किसी के अपने ऊपर है।