Home Ministry Clarification: जनगणना 2027 को लेकर गृह मंत्रालय ने साफ किया कि जाति जनगणना दूसरे चरण में होगी। पहले चरण में घर-परिवार से जुड़ी जानकारी जुटाई जाएगी। विपक्ष ने सरकार की नीयत पर सवाल उठाए, जबकि मंत्रालय ने कहा कि जानबूझकर भ्रम फैलाया जा रहा। आइए मामले को विस्तार से जानते हैं।
जाति जनगणना को लेकर फैल रही अटकलों के बीच गृह मंत्रालय ने जनगणना 2027 को लेकर स्थिति स्पष्ट कर दी है। मंत्रालय ने कहा है कि देशभर में होने वाली जनगणना दो चरणों में होगी और जाति गणना दूसरे चरण में कराई जाएगी। सरकार ने साफ किया कि इस मुद्दे पर जानबूझकर भ्रम फैलाया जा रहा है, जबकि जनगणना की पूरी रूपरेखा पहले ही सार्वजनिक की जा चुकी है।
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जनगणना का ढांचा क्या है?
गृह मंत्रालय के मुताबिक जनगणना 2027, पिछली जनगणनाओं की तरह दो चरणों में कराई जाएगी। पहले चरण को हाउस लिस्टिंग और हाउसिंग सेंसस कहा जाता है, जबकि दूसरा चरण जनसंख्या गणना का होगा। जाति गणना इसी दूसरे चरण में शामिल होगी। देश के अधिकतर हिस्सों में यह प्रक्रिया फरवरी 2027 से शुरू होगी, जबकि जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के बर्फीले और असमान क्षेत्रों में यह सितंबर 2026 में कराई जाएगी।
सरकार ने 22 जनवरी को पहले चरण के लिए 33 सवालों को अधिसूचित किया है।
घर किस सामग्री से बना है।
परिवार में कितने विवाहित जोड़े रहते हैं।
घर के मुखिया का नाम और लिंग।
क्या मुखिया अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति या अन्य श्रेणी से है।
घर में कितने कमरे हैं और घर का स्वामित्व किसके पास है।
अनाज, सुविधाएं और वाहनों से जुड़ी जानकारी।
यह चरण 1 अप्रैल से 30 सितंबर के बीच 30 दिनों की अवधि में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में पूरा होगा।
जाति जनगणना पर विवाद क्यों?
जाति जनगणना को लेकर विपक्ष ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाए हैं। समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि अधिसूचना में जाति का अलग कॉलम नहीं है और भाजपा की मंशा जाति जनगणना कराने की नहीं है। उन्होंने कहा कि बिना गिनती के आरक्षण और अधिकारों का आधार तय नहीं हो सकता। उन्होंने इसे पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ साजिश बताया।
कांग्रेस ने सरकार से क्या मांग की?
कांग्रेस की ओर से भी सवाल खड़े किए गए हैं। पार्टी के संचार प्रभारी जयराम रमेश ने कहा कि पहले चरण के प्रश्नों में ओबीसी और सामान्य वर्ग का स्पष्ट उल्लेख नहीं है, जिससे सरकार की नीयत पर संदेह पैदा होता है। उन्होंने मांग की कि जाति गणना की प्रक्रिया को अंतिम रूप देने से पहले सरकार सभी राजनीतिक दलों, राज्य सरकारों और नागरिक संगठनों से संवाद करे।
गृह मंत्रालय ने क्या सफाई दी?
गृह मंत्रालय ने दो टूक कहा है कि जाति जनगणना 2027 का हिस्सा है और इसे दूसरे चरण में किया जाएगा। मंत्रालय ने कहा कि 12 दिसंबर 2025 को जारी प्रेस नोट में इसकी पूरी जानकारी दी जा चुकी है। इसके बावजूद कुछ लोग भ्रम फैला रहे हैं। मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि पहले चरण का उद्देश्य केवल आवास और परिवारों का ढांचा तैयार करना है, ताकि दूसरे चरण में जनसंख्या और जाति से जुड़ी जानकारी सही तरीके से जुटाई जा सके।