उत्तर प्रदेश के विवादित गौ रक्षकों में से एक 22 वर्षीय विवेक प्रेमी को अपने शुरआती दिन अब भी याद हैं, जब उन्होंने गौ रक्षक के रूप में काम करना शुरू किया था। प्रेमी बजरंग दल के वरिष्ठ सहयोगियों के साथ शामली जाते हैं और मवेशी तस्करों को रंगे हाथों पकड़ते। हालांकि कई तस्कर भाग भी जाते।
2013 में बजरंग दल ने विवेक प्रेमी को जिले का संयोजक बनाया। इसके बाद प्रेमी ने गौ वध के खिलाफ अपनी लड़ाई में एक नया हथियार शामिल किया 'व्हाट्स ऐप मैसेंजर'।
अपने पुराने दिनों को याद करते हुए प्रेमी कहते हैं, 'उस समय मैं बच्चा ही था, लेकिन गायों को बचाने के दृढ़ निश्चय ने मुझे गौ रक्षा मिशन से जोड़ दिया। रात में हम हाइवे पर गश्त करते और लोगों के साथ नेटवर्क बनाते। हमारे पास तब भी खबरी होते, लेकिन जानकारी पहुंचने में बहुत समय लग जाता। इसलिए हम गश्त पर ही निर्भर रहते। व्हाट्स ऐप आने के बाद सबकुछ बदल गया है।'
प्रेमी अब सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील शामली में गौ रक्षा अभियान का नेतृत्व करते हैं।
'व्हाट्स ऐप पर 500 लोगों का नेटवर्क'
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उनके पास अब 500 से ज्यादा लोगों का नेटवर्क है और सभी व्हाट्स ग्रुप के जरिए आपस में जुड़े हैं। इसके साथ पूरे यूपी में और भी ग्रुप हैं। ज्यादातर खबरी हाइवे किनारे चाय बेचने वाले और ढाबा संचालक हैं। ये लोग हाइवे से गुजरते ट्रकों पर निगाह रखते हैं। उन्होंने कहा कि 2013 में इस आंदोलन में मुझे नेतृत्व की भूमिका मिली। इसके बाद मैंने फेसबुक का प्रयोग लोगों को भर्ती करने और व्हाट्स ऐप का प्रयोग बातचीत करने के लिए करने का फैसला किया।
प्रेमी आगे कहते हैं कि हाइवे किनारे चाय बेचने वाले और ढाबा संचालकों को जोड़ना इसमें सबसे कारगर रहा, ये लोग हाइवे से गुजरने वाले ट्रकों पर निगाह रखते। वे समझाते हुए कहते हैं, 'अगर शामली-पानीपत हाइवे पर कोई ट्रक देखता है, तो वह तुरंत व्हाट्स ऐप पर एक्टिव कई ग्रुप्स को मैसेज भेज सकता है। अगर मैं मैसेज नहीं देख पाता हूं, तो दूसरा व्यक्ति देख सकता है। मैसेज पहुंचने के साथ ही मैं एक टीम उक्त स्थान के लिए भेज देता हूं। इसके बाद ट्रक को ढूंढ़ने के लिए हम हाइवे पर गश्त करते हैं।'
'800 से ज्यादा गायें बचाईं'
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अगर हम ट्रक को ढूंढ़ने में कामयाब हो जाते है, तो सबसे पहले ड्राइवर से कागज दिखाने को कहते हैं। अगर ड्राइवर कागज नहीं दिखा पाता है, तो फिर पुलिस को बुलाते हैं। हालांकि कागज दिखाने पर हम उसे छोड़ देते हैं। कभी-कभी मवेशी तस्कर हम पर ही हमला कर देते हैं। इसके बाद पलटवार करने के सिवा हमारे पास कोई ऑप्शन नहीं बचता।
विवेक प्रेमी कहते है कि यह तरीका ज्यादा कारगर है बजाय इसके की हाइवे पर गश्त किया जाए। प्रेमी ने दावा किया कि पिछले तीन सालों में उन्होंने 800 से ज्यादा गायें बचाई हैं।