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Hydrogen Train: पहली हाइड्रोजन ट्रेन में क्या खास, अश्विनी वैष्णव ने बताईं बारीकियां, एक्सपर्ट क्या बोले?

Fri, 17 Jul 2026 11:28 AM IST
अस्मिता त्रिपाठी पीटीआई, नई दिल्ली।

सार

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन की पूरी तकनीक देश में विकसित की गई है। यह सुरक्षित और पर्यावरण अनुकूल तकनीक है, जिससे केवल पानी उत्सर्जित होता है। भविष्य में इसका उपयोग ट्रकों और नावों में भी किया जा सकेगा। आईए जानते हैं कि एक्सपर्ट ने ट्रेन को लेकर क्या बोले हैं? 

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हाइड्रोजन ट्रेन - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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भारत की पहली हाइड्रोजन ईंधन से चलने वाली ट्रेन का शुक्रवार को उद्घाटन हुआ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसे हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। जींद-सोनीपत रेलखंड पर चलने वाली इस ट्रेन को देश की हरित परिवहन पहल की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। इसी बीच केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने ट्रेन की बारीकियां के बारे में जानकारी दी। 

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केंद्रीय मंत्री ने क्या बताया? 
उन्होंने कहा कि हाइड्रोजन फ्यूल सेल बिजली पैदा करता है। इसमें लगे कन्वर्टर मोटर को चलाते हैं। पूरी तकनीक का भारत में विकास होना और बौद्धिक संपदा अधिकार (आईपी) का हमारे पास होना इसकी सबसे महत्वपूर्ण बात है। इस पर हमारा पूरा आईपी अधिकार है। पूरे सिस्टम का विकास भारत में हुआ है। इसका परीक्षण और प्रमाणीकरण विश्व की सर्वश्रेष्ठ एजेंसी की ओर से किया गया है। इसे उनके द्वारा पूरी तरह से प्रमाणित किया गया है, इसलिए यह एक बहुत ही सुरक्षित तकनीक है।

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खासियत को लेकर केंद्रीय मंत्री ने क्या बोला? 
यह एक हरित तकनीक है। इससे केवल पानी का उत्सर्जन होता है।सबसे अच्छी बात यह है कि रेलवे में लॉन्च होने के बाद, इस पूरी तकनीक को अब अन्य क्षेत्रों में भी इस्तेमाल किया जा सकता है। उदाहरण के लिए, इसका उपयोग समुद्री क्षेत्र में किया जा सकता है। इसी तकनीक का एक छोटा संस्करण ट्रकों में इस्तेमाल किया जा सकता है।
 
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताई ट्रेन की मुख्य विशेषताएं:

  • यह ट्रेन पूरी तरह से भारत में बनी स्वदेशी तकनीक पर आधारित है।
  • ट्रेन को चलाने के लिए हाइड्रोजन फ्यूल सेल का इस्तेमाल किया गया है जो बिजली पैदा करता है।
  • यह तकनीक पूरी तरह से इको फ्रेंडली है और इससे शून्य कार्बन उत्सर्जन होता है।
  • ट्रेन से किसी भी तरह का प्रदूषण नहीं फैलता और इसमें धुएं के बदले सिर्फ पानी निकलता है।
  • इस ट्रेन में 2400 किलोवॉट का शक्तिशाली हाइड्रोजन सिस्टम लगाया गया है।
  • तकनीक की सुरक्षा की जांच और सर्टिफिकेशन दुनिया की सबसे बेहतरीन एजेंसी द्वारा किया गया है।
  • इसके लिए जींद में ही पानी से हाइड्रोजन बनाने का एक विशेष प्लांट स्थापित किया गया है।
  • भारत के पास इस पूरी तकनीक के इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स यानी बौद्धिक संपदा अधिकार सुरक्षित हैं।


इसका उपयोग छोटी नावों और मध्यम आकार की मछली पकड़ने वाली नावों जैसे विभिन्न अन्य अनुप्रयोगों में भी किया जा सकता है। तकनीक का विकास सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
एक बार जब भारत अपनी तकनीक विकसित कर लेता है, तो हम इसे कई क्षेत्रों में उपयोग कर सकते हैं।  हमें प्रौद्योगिकी के विकास के लिए किसी और पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।

विशेषज्ञों ने क्या कहा? 
वहीं, विशेषज्ञों के अनुसार इस ट्रेन के शुभारंभ से ऊर्जा-गहन रेलवे क्षेत्र के लिए जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता से मुक्ति का संकेत देगा, लेकिन यह मुख्यधारा का समाधान बनने के बजाय एक खास भूमिका निभाने की संभावना है, क्योंकि देश के अधिकांश ब्रॉड-गेज नेटवर्क का विद्युतीकरण पहले से ही हो चुका है।

हाइड्रोजन का दीर्घकालिक योगदान पर क्या कहा? 
विशेषज्ञों ने कहा कि भारत के ऊर्जा परिवर्तन और जलवायु लक्ष्यों में हाइड्रोजन का दीर्घकालिक योगदान इस बात पर निर्भर करेगा कि नवीकरणीय बिजली का उपयोग करके उत्पादित किफायती हरित हाइड्रोजन उपलब्ध है या नहीं और क्या यह किसी विशिष्ट मार्ग के लिए आर्थिक रूप से प्रतिस्पर्धी साबित होता है।

शिव नादर विश्वविद्यालय के इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर हरप्रीत सिंह अरोरा ने पीटीआई को बताया, 'सरल शब्दों में, हाइड्रोजन-फ्यूल-सेल-प्रोपल्शन सिस्टम एक फ्यूल सेल के अंदर हवा से ऑक्सीजन के साथ हाइड्रोजन को मिलाकर बिजली उत्पन्न करता है। यह बिजली ट्रेन के मोटरों को शक्ति प्रदान करती है।'

हाइड्रोजन ट्रेनों की भूमिका सीमित रहने की संभावना?
नई दिल्ली स्थित थिंक टैंक सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी प्रोग्राम की वरिष्ठ कार्यक्रम प्रबंधक मौशुमी मोहंती ने कहा, 'भारत के ब्रॉड-गेज रेलवे नेटवर्क का 95 प्रतिशत से अधिक हिस्सा पहले से ही विद्युतीकृत है, हाइड्रोजन ट्रेनों की भूमिका सीमित रहने की संभावना है, न कि यह मुख्यधारा का समाधान बनेंगी।'

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कितने किलोमीटर की दूरी तय करेगा? 
भारत को शुक्रवार को अपनी पहली हाइड्रोजन-चालित ट्रेन मिलने जा रही है, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हरियाणा के जींद से सोनीपत तक इस यात्री सेवा का उद्घाटन करेंगे। दोनों शहरों के बीच 89 किलोमीटर की दूरी दो घंटे में तय की जाएगी, जिसमें ट्रेन 12 मध्यवर्ती स्टेशनों पर रुकेगी।

 

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