केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन की पूरी तकनीक देश में विकसित की गई है। यह सुरक्षित और पर्यावरण अनुकूल तकनीक है, जिससे केवल पानी उत्सर्जित होता है। भविष्य में इसका उपयोग ट्रकों और नावों में भी किया जा सकेगा। आईए जानते हैं कि एक्सपर्ट ने ट्रेन को लेकर क्या बोले हैं?
भारत की पहली हाइड्रोजन ईंधन से चलने वाली ट्रेन का शुक्रवार को उद्घाटन हुआ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसे हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। जींद-सोनीपत रेलखंड पर चलने वाली इस ट्रेन को देश की हरित परिवहन पहल की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। इसी बीच केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने ट्रेन की बारीकियां के बारे में जानकारी दी।
VIDEO | Jind, Haryana: Providing a look inside India's first hydrogen fuel cell train, Union Minister Ashwini Vaishnaw says, "The hydrogen fuel cell generates electricity. The converters installed drive the motor. Developing the entire technology within India and our country… pic.twitter.com/aDRBpwfVCx
— Press Trust of India (@PTI_News) July 17, 2026
इसका उपयोग छोटी नावों और मध्यम आकार की मछली पकड़ने वाली नावों जैसे विभिन्न अन्य अनुप्रयोगों में भी किया जा सकता है। तकनीक का विकास सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
एक बार जब भारत अपनी तकनीक विकसित कर लेता है, तो हम इसे कई क्षेत्रों में उपयोग कर सकते हैं। हमें प्रौद्योगिकी के विकास के लिए किसी और पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।
विशेषज्ञों ने क्या कहा?
वहीं, विशेषज्ञों के अनुसार इस ट्रेन के शुभारंभ से ऊर्जा-गहन रेलवे क्षेत्र के लिए जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता से मुक्ति का संकेत देगा, लेकिन यह मुख्यधारा का समाधान बनने के बजाय एक खास भूमिका निभाने की संभावना है, क्योंकि देश के अधिकांश ब्रॉड-गेज नेटवर्क का विद्युतीकरण पहले से ही हो चुका है।
हाइड्रोजन का दीर्घकालिक योगदान पर क्या कहा?
विशेषज्ञों ने कहा कि भारत के ऊर्जा परिवर्तन और जलवायु लक्ष्यों में हाइड्रोजन का दीर्घकालिक योगदान इस बात पर निर्भर करेगा कि नवीकरणीय बिजली का उपयोग करके उत्पादित किफायती हरित हाइड्रोजन उपलब्ध है या नहीं और क्या यह किसी विशिष्ट मार्ग के लिए आर्थिक रूप से प्रतिस्पर्धी साबित होता है।
शिव नादर विश्वविद्यालय के इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर हरप्रीत सिंह अरोरा ने पीटीआई को बताया, 'सरल शब्दों में, हाइड्रोजन-फ्यूल-सेल-प्रोपल्शन सिस्टम एक फ्यूल सेल के अंदर हवा से ऑक्सीजन के साथ हाइड्रोजन को मिलाकर बिजली उत्पन्न करता है। यह बिजली ट्रेन के मोटरों को शक्ति प्रदान करती है।'
हाइड्रोजन ट्रेनों की भूमिका सीमित रहने की संभावना?
नई दिल्ली स्थित थिंक टैंक सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी प्रोग्राम की वरिष्ठ कार्यक्रम प्रबंधक मौशुमी मोहंती ने कहा, 'भारत के ब्रॉड-गेज रेलवे नेटवर्क का 95 प्रतिशत से अधिक हिस्सा पहले से ही विद्युतीकृत है, हाइड्रोजन ट्रेनों की भूमिका सीमित रहने की संभावना है, न कि यह मुख्यधारा का समाधान बनेंगी।'