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Waqf: सरकार को क्यों पड़ी वक्फ संशोधन बिल लाने की जरूरत, देश में कितनी वक्फ संपत्तियां, इन पर क्या शिकायतें?

स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Wed, 02 Apr 2025 12:37 PM IST

सार

Waqf Amendment Bill 2024: वक्फ की संपत्ति का संचालन करने के लिए वक्फ बोर्ड बने हैं। देश भर में करीब 30 स्थापित संगठन हैं जो उस राज्य या केंद्र शासित प्रदेश में वक्फ संपत्तियों का प्रबंधन करते हैं। सभी वक्फ बोर्ड वक्फ अधिनियम 1995 के तहत काम करते हैं। केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने 8 अगस्त को लोकसभा में वक्फ (संशोधन) विधेयक पेश किया था। 
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वक्फ संशोधन विधेयक पर देशभर में विरोध प्रदर्शन। - फोटो : अमर उजाला
केंद्र सरकार बुधवार (2 अप्रैल) को वक्फ संशोधन विधेयक को संसद में पेश कर दिया। सरकार का कहना है कि इसके जरिए वह वक्फ से जुड़ी संपत्तियों का बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित करेगी। हालांकि, देशभर में इससे पहले ही विधेयक के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हुए हैं। विपक्ष के नेताओं ने साफ किया है कि इस तरह का विधेयक मुस्लिम पक्ष की ताकत को कम करेगा और वक्फ पर सरकारी नियंत्रण बढ़ेगा। 

ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर वक्फ बोर्ड होता क्या है? सरकार को पहले से मौजूद वक्फ कानून में संशोधन की जरूरत क्यों पड़ी? वक्फ बोर्ड के पास कितनी जमीन है? विधेयक पर सरकार का क्या कहना है? वक्फ को लेकर अब तक क्या-क्या शिकायतें मिली हैं? आइये जानते हैं..
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वक्फ संशोधन विधेयक पर देशभर में विरोध प्रदर्शन। - फोटो : अमर उजाला
केंद्र सरकार बुधवार (2 अप्रैल) को वक्फ संशोधन विधेयक को संसद में पेश कर दिया। सरकार का कहना है कि इसके जरिए वह वक्फ से जुड़ी संपत्तियों का बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित करेगी। हालांकि, देशभर में इससे पहले ही विधेयक के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हुए हैं। विपक्ष के नेताओं ने साफ किया है कि इस तरह का विधेयक मुस्लिम पक्ष की ताकत को कम करेगा और वक्फ पर सरकारी नियंत्रण बढ़ेगा। 

ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर वक्फ बोर्ड होता क्या है? सरकार को पहले से मौजूद वक्फ कानून में संशोधन की जरूरत क्यों पड़ी? वक्फ बोर्ड के पास कितनी जमीन है? विधेयक पर सरकार का क्या कहना है? वक्फ को लेकर अब तक क्या-क्या शिकायतें मिली हैं? आइये जानते हैं..

पहले जानते हैं कि वक्फ क्या होता है?
वक्फ कोई भी चल या अचल संपत्ति हो सकती है, जिसे इस्लाम को मानने वाला कोई भी व्यक्ति धार्मिक कार्यों के लिए दान कर सकता है। इस दान की हुई संपत्ति की कोई भी मालिक नहीं होता है। दान की हुई इस संपत्ति का मालिक अल्लाह को माना जाता है। लेकिन, उसे संचालित करने के लिए कुछ संस्थान बनाए गए है। 

वक्फ कैसे किया जा सकता है? 
वक्फ करने के अलग-अलग तरीके हो सकते हैं। जैसे- अगर किसी व्यक्ति के पास एक से अधिक मकान हैं और वह उनमें से एक को वक्फ करना चाहता है तो वह अपनी वसीयत में एक मकान को वक्फ के लिए दान करने के बारे में लिख सकता है। ऐसे में उस मकान को संबंधित व्यक्ति की मौत के बाद उसका परिवार इस्तेमाल नहीं कर सकेगा। उसे वक्फ की संपत्ति का संचालन करने वाली संस्था आगे सामाजिक कार्य में इस्तेमाल करेगी। इसी तरह शेयर से लेकर घर, मकान, किताब से लेकर कैश तक वक्फ किया जा सकता है। 

कोई भी मुस्लिम व्यक्ति जो 18 साल से अधिक उम्र का है वह अपने नाम की किसी भी संपत्ति को वक्फ कर सकता है। वक्फ की गई संपत्ति पर उसका परिवार या कोई दूसरा शख्स दावा नहीं कर सकता है।

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वक्फ की संपत्ति का संचालन करने वाले को क्या कहते हैं?
वक्फ की संपत्ति का संचालन करने के लिए वक्फ बोर्ड होते हैं। ये स्थानीय और राज्य स्तर पर बने होते हैं। उत्तर प्रदेश, बिहार जैसे राज्यों में अलग-अलग शिया और सुन्नी वक्फ बोर्ड भी हैं। राज्य स्तर पर बने वक्फ बोर्ड इन वक्फ की संपत्ति का ध्यान रखते हैं। संपत्तियों के रखरखाव, उनसे आने वाली आय आदि का ध्यान रखा जाता है। केंद्रीय स्तर पर सेंट्रल वक्फ काउंसिल राज्यों के वक्फ बोर्ड को दिशानिर्देश देने का काम करती है। देशभर में बने कब्रिस्तान वक्फ भूमि का हिस्सा होते हैं। देश के सभी कब्रिस्तान का रखरखाव वक्फ ही करते हैं। 

देश भर में करीब 30 स्थापित संगठन हैं जो उस राज्य या केंद्र शासित प्रदेश में वक्फ संपत्तियों का प्रबंधन करते हैं। इन्हीं संगठनों को वक्फ बोर्ड के नाम से जाना जाता है। भारत में 30 वक्फ बोर्ड हैं, जिनमें से अधिकांश के मुख्यालय राज्यों की राजधानियों में हैं।

सभी वक्फ बोर्ड वक्फ अधिनियम 1995 के तहत काम करते हैं। भारतीय वक्फ परिसंपत्ति प्रबंधन प्रणाली के अनुसार, वक्फ बोर्ड मुसलमानों के धार्मिक, सामाजिक और आर्थिक जीवन से जुड़े हुए हैं। वे न केवल मस्जिदों, दरगाहों, कब्रिस्तानों आदि की मदद कर रहे हैं, बल्कि उनमें से कई स्कूल, कॉलेज, अस्पताल, डिस्पेंसरी और मुसाफिरखानों का भी सहायता करते हैं, जो सामाजिक कल्याण के लिए बने हैं।

वक्फ बोर्डों के पास कितनी संपत्ति है?
भारतीय वक्फ परिसंपत्ति प्रबंधन प्रणाली (वामसी) के अनुसार, देश में कुल कुल 3,56,047 वक्फ संपदा हैं। इनमें अचल संपत्तियों की कुल संख्या 8,72,324 और चल संपत्तियों की कुल संख्या 16,713 है। डिजिटल रिकॉर्ड्स की संख्या 3,29,995 है। 



सरकार ने जो वक्फ संशोधन विधेयक पेश किया है वो क्या है? 
पिछले कई दिनों से चर्चा थी कि सरकार संसद में वक्फ बोर्ड में संशोधन से जुड़ा विधेयक पेश कर सकती है। केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने 8 अगस्त को लोकसभा में वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2024 और मुसलमान वक्फ (निरसन) विधेयक, 2024 पेश किया। हालांकि, बाद में इसे जेपीसी के पास भेजा गया।

विधेयक में वर्तमान अधिनियम में दूरगामी परिवर्तन की बात कही गई है। इसमें केंद्रीय और राज्य वक्फ बोर्ड में मुस्लिम महिलाओं का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना भी शामिल है। इसके साथ ही किसी भी  धर्म के लोग इसकी कमेटियों के सदस्य हो सकते हैं। अधिनियम में आखिरी बार 2013 में संशोधन किया गया था।

बिल पर सरकार का क्या कहना है?
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने अगस्त में जब विधेयक को पेश किया था, तब कहा था कि वक्फ संशोधन विधेयक सच्चर कमेटी की सिफारिशों के आधार पर ही लाया गया है। इसी में कहा गया है कि राज्य और केंद्रीय वक्फ बोर्ड में दो महिलाएं होनी चाहिए। इसी में की गई सिफारिशों को लागू करने के लिए हम यह बिल लेकर आए हैं। इस बिल में जो भी प्रावधान हैं, उसमें संविधान के किसी भी अनुच्छेद का उल्लंघन नहीं किया गया है। किसी का हक छीनने की बात तो छोड़ दीजिए, यह बिल उन्हें हक देने के लिए लाया गया है जिन्हें आज तक उनका हक नहीं मिला। उन्होंने कहा कि पहले भी कई बदलाव हो चुके हैं। 1995 में जो संसोधन किए गए थे, उन्हें 2013 में लाए गए संसोधनों के जरिए निष्क्रिय कर दिया गया, इसलिए यह बिल लाना पड़ा है। 1995 का वक्फ संशोधन विधेयक पूरी तरह से निष्प्रभावी रहा है। इसलिए यह संसोधन करना पड़ रहा है। 

रिजिजू ने विपक्ष से कहा कि इस बिल का समर्थन कीजिए करोड़ों लोगों की दुआ मिलेगी। वक्फ बोर्ड पर चंद लोगों ने कब्जा किया है। आम मुसलमान लोगों को जो इंसाफ नहीं मिला उसे सही करने के लिए यह बिल लाया गया है।

भारत में वक्फ की शुरुआत कहां से हुई?
भारत में, वक्फ का इतिहास दिल्ली सल्तनत के शुरुआती दिनों से जुड़ा है। तब सुल्तान मुइज़ुद्दीन सैम ग़ौर ने मुल्तान की जामा मस्जिद के लिए दो गांव समर्पित किए और इसका प्रशासन शेखुल इस्लाम को सौंप दिया। जैसे-जैसे दिल्ली सल्तनत और बाद में इस्लामी राजवंश भारत में फले-फूले, भारत में वक्फ संपत्तियों की संख्या बढ़ती गई।

19वीं सदी के आखिर में भारत में वक्फ को खत्म करने का मामला तब उठाया गया था, जब ब्रिटिश राज के दिनों में वक्फ संपत्ति को लेकर एक विवाद लंदन की प्रिवी काउंसिल में पहुंचा था। इस मामले की सुनवाई करने वाले चार ब्रिटिश जजों ने वक्फ को सबसे खराब और घातक व्यवस्था बताया और वक्फ को अमान्य घोषित कर दिया। हालांकि, चारों जजों के फैसले को भारत में स्वीकार नहीं किया गया। 1913 के मुसलमान वक्फ वैधीकरण अधिनियम ने भारत में वक्फ संस्था को बचा लिया। तब से वक्फ पर अंकुश लगाने का कोई प्रयास नहीं किया गया।

क्या सभी इस्लामिक देशों में वक्फ संपत्तियां हैं?
नहीं, सभी इस्लामिक देशों में वक्फ संपत्तियां नहीं हैं। तुर्की, लीबिया, मिस्र, सूडान, लेबनान, सीरिया, जॉर्डन, ट्यूनीशिया और इराक जैसे इस्लामिक देशों में वक्फ नहीं हैं। हालांकि, भारत में, न केवल वक्फ बोर्ड सबसे बड़े शहरी भूस्वामी हैं, बल्कि उनके पास कानूनी रूप से उनकी सुरक्षा करने वाला एक अधिनियम भी है।

वक्फ बोर्ड कितनी संपत्तियों पर नियंत्रण रखता है?
वक्फ बोर्ड वर्तमान में भारत भर में 9.4 लाख एकड़ में फैली 8.7 लाख संपत्तियों को नियंत्रित करता है, जिसका अनुमानित मूल्य 1.2 लाख करोड़ रुपये है। भारत में दुनिया की सबसे बड़ी वक्फ होल्डिंग है। इसके अलावा, सशस्त्र बलों और भारतीय रेलवे के बाद वक्फ बोर्ड भारत में सबसे बड़ा भूस्वामी है ।

वक्फ से संबंधित कितनी शिकायतें सरकार को मिली हैं? 
केंद्र सरकार को मुसलमानों और गैर-मुसलमानों से वक्फ भूमि पर जानबूझकर अतिक्रमण और वक्फ संपत्तियों के कुप्रबंधन जैसे मुद्दों पर बड़ी संख्या में शिकायतें और अभ्यावेदन प्राप्त हुए हैं। मंत्रालय ने प्राप्त शिकायतों की प्रकृति और मात्रा का विश्लेषण किया है और पाया है कि अप्रैल, 2023 से प्राप्त 148 शिकायतों में ज्यादातर अतिक्रमण, वक्फ भूमि की अवैध बिक्री, सर्वेक्षण और पंजीकरण में देरी और वक्फ बोर्डों और मुतवल्लियों के खिलाफ शिकायतों से संबंधित हैं।

मंत्रालय ने अप्रैल, 2022 से मार्च, 2023 तक सीपीजीआरएएमएस (केंद्रीकृत लोक शिकायत निवारण और निगरानी प्रणाली) पर प्राप्त शिकायतों का भी विश्लेषण किया है और पाया है कि 566 शिकायतों में से 194 शिकायतें वक्फ भूमि पर अतिक्रमण और अवैध रूप से हस्तांतरण से संबंधित थीं और 93 शिकायतें वक्फ बोर्ड/मुतवल्लियों के अधिकारियों के खिलाफ थीं।

इसके अलावा, सांसदों ने पार्टी लाइन से ऊपर उठकर वक्फ संपत्तियों के पंजीकरण में देरी, वक्फ बोर्ड द्वारा बाजार मूल्य से कम किराया लेने, वक्फ भूमि पर बड़े पैमाने पर अतिक्रमण, विधवाओं के उत्तराधिकार अधिकार, सर्वेक्षण आयुक्त द्वारा सर्वेक्षण पूरा न करने, वक्फ संपत्ति रिकॉर्ड के डिजिटलीकरण की धीमी प्रगति आदि के मुद्दे उठाए।


 

वक्फ प्रशासन के पास कितने मामले लंबित हैं?
केंद्रीय न्याय मंत्रालय ने न्यायाधिकरणों के कामकाज का विश्लेषण किया और पाया है कि न्यायाधिकरणों में 40,951 मामले लंबित हैं, जिनमें से 9942 मामले मुस्लिम समुदाय द्वारा वक्फ का प्रबंधन करने वाली संस्थाओं के खिलाफ दायर किए गए हैं। इसके अलावा, मामलों के निपटान में अत्यधिक देरी होती है और न्यायाधिकरण के निर्णयों पर न्यायिक निगरानी का कोई प्रावधान नहीं है।

मौजूदा समय में वक्फ से जुड़ी कौन सी शिकायतें चर्चा में?
वक्फ बोर्ड की अस्पष्टता और अत्यधिक शक्ति के कारण आम लोगों को होने वाली कठिनाई को निम्नलिखित मामलों से देखा जा सकता है:

तमिलनाडु का थिरुचेंथुरई गांव: तमिलनाडु के किसान राजगोपाल कर्ज चुकाने के लिए अपनी कृषि भूमि नहीं बेच पाए थे, क्योंकि वक्फ बोर्ड ने उनके पूरे गांव थिरुचेंथुरई को अपनी संपत्ति बता दिया। अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) की इस आवश्यकता ने वित्तीय और भावनात्मक संकट पैदा कर दिया। दावा है कि गांव को ऐतिहासिक रूप से 1956 में नवाब अनवरदीन खान ने वक्फ के रूप में दान किया था। इस स्थिति ने राजनीतिक और सांप्रदायिक तनाव को भी बढ़ावा दिया है।

बेंगलुरु ईदगाह मैदान मामला: बेंगलुरु ईदगाह मैदान के मामले में, भले ही सरकार के अनुसार किसी भी मुस्लिम संगठन को कोई टाइटल डीड नहीं मिली हो, लेकिन वक्फ का दावा है कि यह 1850 के दशक से एक वक्फ संपत्ति थी, इसका मतलब है कि यह अब हमेशा के लिए एक वक्फ संपत्ति है।

सूरत नगर निगम मामला: गुजरात वक्फ बोर्ड ने सूरत नगर निगम की इमारत पर दावा किया था जो अब वक्फ की संपत्ति है क्योंकि दस्तावेज अपडेट नहीं किए गए थे। वक्फ के अनुसार, मुगल काल के दौरान सूरत नगर निगम की इमारत एक सराय थी और हज यात्रा के दौरान इसका इस्तेमाल किया जाता था। ब्रिटिश शासन के दौरान यह संपत्ति ब्रिटिश साम्राज्य की थी। हालांकि, 1947 में जब भारत को आजादी मिली, तो संपत्तियां भारत सरकार को हस्तांतरित कर दी गईं। हालांकि, चूंकि दस्तावेज अपडेट नहीं किए गए थे, इसलिए एसएमसी की इमारत वक्फ की संपत्ति बन गई और जैसा कि वक्फ बोर्ड कहता है, एक बार वक्फ, हमेशा वक्फ।

भेंट द्वारका में द्वीप: एक रिपोर्ट के मुताबिक, वक्फ बोर्ड ने गुजरात उच्च न्यायालय में एक आवेदन पत्र लिखकर देवभूमि द्वारका में भेंट द्वारका में दो द्वीपों के स्वामित्व पर दावा किया था। हाई कोर्ट के न्यायाधीश ने हैरानी जताते हुए इस आवेदन पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया और बोर्ड से अपनी याचिका को संशोधित करने के लिए कहा। कोर्ट की टिप्पणी थी कि आखिर वक्फ कृष्णनगरी में जमीन पर दावा कैसे कर सकता है।

शिव शक्ति सोसाइटी, सूरत: सूरत में शिव शक्ति सोसाइटी में एक प्लॉट मालिक ने अपने प्लॉट को गुजरात वक्फ बोर्ड में पंजीकृत कराकर उसे मुसलमानों के लिए पवित्र स्थान बना दिया और लोग वहां नमाज पढ़ने लगे। इसका मतलब यह हुआ कि किसी भी हाउसिंग सोसाइटी में एक अपार्टमेंट किसी भी दिन सोसाइटी के अन्य सदस्यों की सहमति के बिना मस्जिद में बदल सकता है, अगर उस अपार्टमेंट का मालिक उसे वक्फ के रूप में दान करने का फैसला करता है। इस स्थिति को लेकर विवाद खड़ा हुआ है।

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