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अब केजरीवाल के निशाने पर पर्ची वाली EVM: जानें कैसे करती है काम

Tue, 09 May 2017 03:47 PM IST
amarujala.com- Presented by: हर्षित गौतम
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वीवीपीएटी मशीन
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विधानसभा चुनावों में करारी हार के बाद से बसपा सुप्रीमो मायावती और आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविन्द केजरीवाल ईवीएम के साथ छेड़छाड़ के आरोप लगा रहे हैं। मायावती जहां इस मुद्दे पर चुनाव आयोग की चौखट पर पहुंच गईं। वहीं, अरविंद केजरीवाल ने पंजाब में 25 प्रतिशत वोट ट्रांसफर होने की बात कहते हुए दिल्ली एमसीडी चुनाव में बैलेट पेपर के उपयोग की मांग कर डाली। इस दौरान उन्होंने VVPAT का बार बार जिक्र किया और कहा- हालिया चुनाव में जिन जगहों पर VVPAT मशीन का इस्तेमाल किया गया वहां मशीन से निकलने वाली पर्ची का ईवीएम के आंकड़े से मिलान किया जाए। अगर इन दोनों मशीनों के आंकड़े मिल जाते हैं तो चुनाव आयोग पर लोगों का विश्वास बढ़ जाएगा। 
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मणिपुर और गोवा के सभी विधानसभा क्षेत्रों के साथ उत्तर प्रदेश की 30 सीटों पर चुनाव आयोग ने वीवीपीएटी यानी वोटर वेरीफाइड पेपर ऑडिट ट्रेल (VVPAT) मशीन का इस्तेमाल किया। आइए जानते हैं कि क्या है वीवीपीएटी मशीन, यह कैसे काम करती है और केजरीवाल इस मशीन के संबंध में चुनाव आयोग से किस तरह की मांग कर रहे हैं। 
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क्या है वो वीवीपीएटी मशीन जिस पर हो रहा होहल्ला

वीवीपीएटी यानी वो ईवीएम जिसमें वोट देने के बाद एक स्लिप निकलती है जिसपर आप यह देख सकते हैं कि आपने किस प्रत्याशी को वोट दिया है। इसका मकसद गलती की गुंजाइश को शून्य करना है। कई बार सामान्य ईवीएम में मतदाता हड़बड़ी के कारण किसी और दल के चुनाव चिन्ह के सामने का बटन दबा देते हैं। लेकिन सामान्य मशीन में उनके पास वोट किसके पक्ष में गया  यह देखने का कोई विकल्प नहीं होता है। लेकिन, वीवीपीएटी मशीन यह विकल्प मुहैया कराती है। 

वीवीपीएटी मशीन को ईवीएम के साथ जोड़ा जाता है। व्यक्ति जब किसी प्रत्याशी को वोट देता है तो स्क्रीन पर उसका चुनाव चिन्ह, नाम और साथ ही वोटर नंबर भी मशीन पर लगी स्क्रीन पर लगा दिखाई देता है। वोट डालने के बाद मतदाता को पर्ची के जरिए यह जानकारी दी जाती है कि उन्होंने किसे वोट किया। इस पर्ची को रिकॉर्ड के तौर पर रखा जाता है। हालांकि ये पर्ची मतदाता को नहीं मिलती, यह मतदान केंद्र पर ही जमा हो जाती है। 

 
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