व्यक्तिगत जिंदगी नहीं, समाज में योगदान देखिए
जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय में ही कॉमर्स की छात्रा अनन्या सिंह बताती हैं कि इस कैंपस में पढ़ाई का मौका मिलना किसी छात्र के लिए सपने के सच होने जैसा होता है। ऐसे में ज्यादातर छात्र यहां अपने जीवन के सपने को रंग देने की कोशिश में लगे रहते हैं। लेकिन सोशल मीडिया में ऐसा बताया जा रहा है जैसे यहां के छात्र पढ़ाई को छोड़ बाकी सारे काम कर रहे हैं जो कि सच नहीं है। उन्होंने कहा कि, इसके बाद भी कोई छात्र या छात्रा अपनी व्यक्तिगत जिंदगी में क्या करता है इसकी जांच-पड़ताल करने का हक किसी को नहीं हो सकता।
किसी एक के काम से संस्था की पहचान नहीं
वहीं, जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय में कम्प्यूटर साइंस के असिस्टेंट प्रोफेसर बुध सिंह का कहना है कि हमारे छात्र भी इसी समाज का हिस्सा हैं। समाज में जिस तरह की घटनाएं हर जगह घटती हैं उसी तरह की घटनाएं किसी भी संस्था में घट सकती हैं। लेकिन ये किसी संस्था की पहचान नहीं हो सकते। जेएनयू को बदनाम करने वालों को सोचना चाहिए कि हमारी वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, सांसद मेनका गांधी, नोबेल पुरस्कार विजेता अभिजीत मुखर्जी इसी संस्था से पढ़कर निकले हैं। यही हमारे वे छात्र हैं जिन पर जेएनयू गर्व करता है और यह परंपरा आज भी जारी है।
जेएनयू को बदनाम करने की हो रही कोशिश
दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ की अध्यक्ष रह चुकी नीतू वर्मा बताती हैं कि एक खास विचारधारा के लोग जेएनयू को बदनाम करने पर तुले हैं। उनका आरोप है कि चूंकि विश्वविद्यालय के नाम में पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू का नाम जुड़ा हुआ है जो कुछ लोगों को यह पसंद नहीं आ रहा है, यही कारण है कि राजनीतिक स्वार्थवश जानबूझकर इसे बदनाम किया जा रहा है।
छात्रनेता रहीं अमृता धवन (अब कांग्रेस नेता) का कहना है कि फर्जी वीडियो के द्वारा जेएनयू को बदनाम करने वालों से यह जरुर पूछा जाना चाहिए कि उन्होंने आज तक इसके जैसे कितने संस्थान देश को दिए हैं। यह देश के सर्वोच्च संस्थान को बदनाम करने की साजिश है और इसका हर स्तर पर विरोध करना चाहिए। यह संस्था देश को गौरवान्वित करने वाले मनीषियों को पैदा करती रही है और देश के हर नागरिक को इस पर गर्व होना चाहिए।