प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : File
फास्ट फूड इंडस्ट्री की वजह से पिछले दस सालों में ना सिर्फ लोगों की कैलोरीज बल्कि प्रकृति को नष्ट करने का आरोप फास्ट फूड इंडस्ट्री पर लगा। साल 2015,2016 और 2017 ने अब तक के सबसे गर्म साल होने का रिकॉर्ड तय किया है। इसके पीछे मिथेन गैस जैसी ग्रीनहाउस गैसों का सबसे बड़ा हाथ है।
मिथेन गैस का सबसे बड़ा उत्पादक गायों का झुंड है। बीफ बनाने में सबसे आगे अमेरिका है, ऐसा मान लीजिए कि अगर करोड़ों बर्गर, लाखों गायों के बराबर हैं। इसके बाद फास्ट फूड कंपनियों पर वैश्विक उत्सर्जन को कम करने के लिए दबाव डाला गया, यही नहीं फास्ट फूड की वजह से 2,69,000 टन प्लास्टिक बेकार होने लगा, जिसके बाद पर्यावरणविदों ने इंडस्ट्री को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया। जिसके परिणामस्वरुप इंडस्ट्री ने इको-फ्रेंडली पैकेजिंग को इस्तेमाल करने की शुरुआत की।