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राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने आखिर क्यों दिखाई जल्दबाजी, क्या भाजपा ने मिटाई खीज?

Tue, 12 Nov 2019 05:57 PM IST
Harendra Chaudhary शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली
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भगत सिंह कोश्यारी
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महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने राष्ट्रपति शासन की सिफारिश के लिए इतनी जल्दबाजी क्यों दिखाई? कांग्रेस पार्टी के मीडिया विभाग के प्रभारी रणदीप सुरजेवाला ने राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने पर बड़ा सवाल उठाया है। शिवसेना और एनसीपी ने उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाने का मन बनाया है और एनसीपी प्रमुख शरद पवार, सांसद सुप्रिया सूले आगे की रणनीति के लिए बैठक में विचार कर रहे हैं। क्या राज्यपाल की सिफारिश को बिना समय गंवाए मंजूरी देकर केन्द्र  सरकार ने राज्य में भाजपा सरकार न बन पाने की खीझ मिटाई है?
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राज्यपाल ने कल बुलाया, 24 घंटे भी इंतजार नहीं किया

एनसीपी के अजित पवार को भरोसा था कि पार्टी के पास राज्यपाल को जवाब देने के लिए 24 घंटे का समय है। यह समय मंगलवार को रात आठ बजे के करीब पूरा होता है। इससे पहले मंगलवार सुबह पत्र लिखकर एनसीपी ने सरकार बनाने की संभावना के लिए 48 घंटे का समय देने की मांग की थी। शिवसेना के लोकसभा में चुनकर आए एक सांसद का भी कहना है कि पार्टी ने समय मांगा था। लेकिन राज्यपाल ने न तो शिवसेना को समय दिया और न एनसीपी को। जबकि भाजपा को 48 घंटे का समय दिया था।

सुरजेवाला ने लगाए आरोप

सूत्र का कहना है कि राज्यपाल भी इससे अवगत हैं कि दोनों दल कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार बनाने की कोशिश कर रहे हैं। तीनों दलों के पास राज्य सरकार के गठन के लिए पर्याप्त विधायक हैं। टीवी मीडिया पर यह कोशिश दिखाई दे रही है, लेकिन इसके बावजूद राज्यपाल ने जल्दबाजी दिखाई। रणदीप सुरजेवाला का एक सवाल और है। वह यह कि राज्यपाल ने भाजपा, शिवसेना, एनसीपी को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया, लेकिन कांग्रेस को नहीं किया। आखिर क्यों? सुरजेवाला के अनुसार ऐसा करके राज्यपाल ने लोकतांत्रिक मूल्यों की धज्जियां उड़ाई हैं।

भाजपा का चूर हुआ सपना तो हुई राष्ट्रपति शासन पहल

कांग्रेस पार्टी के नेताओं का कहना है कि महाराष्ट्र में राज्यपाल कोश्यारी दलगत भावना से काम कर रहे हैं। उन्होंने लोकतंत्र की मर्यादा ताक पर रखकर राष्ट्रपति शासन की सिफारिश की है। शिवसेना के नेता और संजय राऊत के करीबी का कहना है कि महाराष्ट्र में भाजपा की सरकार गठति न पाने के कारण ऐसा हुआ है। भाजपा एनडीए से शिवसेना के अलग होने के बाद से विचलित थी और राज्यपाल कोश्यारी ने इसे देखते हुए राष्ट्रपति शासन की सिफारिश में जल्दबाजी दिखाई है।

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