प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस साल मई में 'आत्मनिर्भर भारत' योजना की शुरुआत की। इसका मकसद देश को हर क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना था। रक्षा मंत्री राजनाथ का यह निर्णय 'आत्मनिर्भर भारत' योजना की दिशा में एक बड़ा कदम है। दरअसल, भारत दुनिया के उन देशों की सूची में शामिल है, जहां हथियारों का सबसे ज्यादा आयात किया जाता है।
पिछले पांच सालों में भारत हथियार आयात करने के मामले में दूसरे नंबर पर था। पहले नंबर पर सऊदी अरब काबिज था। वैश्विक रूप से होने वाले हथियारों के आयात में भारत का हिस्सा 9.2 फीसदी का है। इन सब बातों से ये साफ हो जाता है कि बड़ी मात्रा में विदेशी पूंजी को रक्षा जरूरतों को पूरा करने के लिए व्यय करना पड़ता है। साथ ही इससे दूसरे मुल्कों पर हथियारों के लिए भारत की निर्भरता का भी पता चलता है। इस कारण यह फैसला लिया गया है।
रक्षा मंत्रालय द्वारा जिन 101 उपकरणों की सूची जारी की गई है, उसमें सामान्य उपकरणों से लेकर उच्च क्षमता वाले उपकरण तक शामिल हैं। दरअसल, इस सूची में जिन उपकरणों को शामिल किया गया है, उन्हें भारत में तैयार करने की टेक्नोलॉजी मौजूद है। इसमें बुलेट प्रूफ जैकेट, हल्के मशीन गन जैसे उपकरण शामिल हैं, जिन्हें आसानी से भारत में तैयार किया जा सकता है।
रक्षा मंत्री ने इस निर्णय की घोषणा करते हुए कहा कि इस सूची से भारतीय रक्षा उद्योग को यह पता लगेगा कि सेनाओं को किन-किन चीजों की जरूरत है और वह इसे बनाने के लिए खुद को तैयार कर सके। रक्षा मंत्रालय ने आने वाले 6-7 साल में भारतीय रक्षा उद्योग को करीब 4 लाख करोड़ रुपये का ऑर्डर देने का लक्ष्य रखा है।
इन उपकरणों की सूची को तैयार करने के लिए रक्षा मंत्रालय और संबंधित अधिकारियों के बीच कई दौर की बातचीत हुई, जिसके बाद इस सूची को लेकर निर्णय लिया गया। इस निर्णय को लागू करने के लिए पहले थल सेना, वायुसेना और नौसेना के अलावा डीआरडीओ, डिफेंस पीएसयू, ऑर्डिनेंस फैक्ट्री बोर्ड और निजी इंडस्ट्री के मालिकों से परामर्श लिया गया है।
इससे पता चलता है कि सरकार ने पूरी तैयारी के बाद इस पर फैसला किया है। भारत की रक्षा क्षमता को प्रभावित होने से बचाने के लिए किन हथियारों को आसानी से तैयार किया जा सकता है, इसका पूरा ख्याल रखा गया है।
इस फैसले के बाद भारत का रक्षा क्षेत्र में दूसरे देशों पर निर्भरता में कमी आएगी। साथ ही भारतीय रक्षा उद्योग को एक नई उड़ान मिलेगी। भारत अपनी सेनाओं की जरूरतों को पूरा करने के लिए दूसरे देशों से महंगे दाम पर हथियार खरीदता है। इसका असर सरकार के बजट पर भी देखने को मिलता है। भारत में हथियारों का उत्पादन होने से हम दूसरे देशों को इन्हें निर्यात भी कर पाएंगे। इससे हमारी विदेशी मुद्रा में इजाफा भी होगा।
भारत अमेरिका, जर्मनी, इस्राइल और रूस जैसे देशों से हथियारों को आयात करता है और इसके लिए उसे बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा खर्च करनी पड़ती है। हालांकि, इस फैसले के बाद अब भारत के निजी उद्योग भी रक्षा उपकरणों के उत्पादन को बढ़ाने में मदद करेंगे।