सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए भारत के मुख्य न्यायाधीश के दफ्तर को भी सूचना के अधिकार कानून (आरटीआई) के दायरे में ला दिया। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को अपने फैसले में कहा कि मुख्य न्यायाधीश (सीजीआई) का दफ्तर सार्वजनिक कार्यालय है, इसलिए यह आरटीआई के दायरे में आएगा। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि जज किसी कानून से ऊपर नहीं हो सकते।
आरटीआई का इतिहास?
सूचना का अधिकार कानून यानी आरटीआई का इतिहास काफी पुराना है। आरटीआई के लिए तमाम संगठनों की लंबी लड़ाई के बाद यूपीए-1 की सरकार ने सूचना के अधिकार को हरी झंडी दिखाई। 2005 में इस कानून को लागू कर दिया गया। आरटीआई के तहत कोई भी भारतीय नागरिक राज्य सरकार और केंद्र सरकार के संस्थानों से जानकारी हासिल कर सकता है।
वो जानकारी जो देश या राज्य के हितों के खिलाफ नहीं है उसे आवेदनकर्ताओं को मुहैया कराया जा सकता है। भारत की सर्वोच्च अदालत इसके दायरे से बाहर है। लेकिन सीजेआई का दफ्तर अब आरटीआई के दायरे में आ गया है।
क्या है सूचना का अधिकार?
आरटीआई एक ऐसा कानून है जो देश की जनता को सूचना पाने का अधिकार देता है। 15 जून 2005 को इसे अधिनियमित किया गया और पूर्णतया 12 अक्तूबर 2005 को सम्पूर्ण धाराओं के साथ लागू कर दिया गया था।
देशवासी सरकार को किसी न किसी माध्यम से टैक्स देते हैं। यही टैक्स देश के विकास और व्यवस्था की आधारशिला को लगातार स्थिर रखता है। जनता को यह जानने का पूरा हक है कि उसके द्वारा दिया गया, पैसा कब, कहां, और किस प्रकार खर्च किया जा रहा है ? यह कानून जनता को ये जानकारी पाने का अधिकार देता है।