रेलवे मंत्रालय ने हाल ही में चयन प्रक्रिया में अनियमितताओं के कारण ग्रुप सी पदों के सभी लंबित विभागीय चयन (LDCES/ GDCES) को रद्द करने का फैसला किया है। भारतीय रेलवे का यह आदेश उन सभी चयन प्रक्रियाओं पर लागू होगा जो 4 मार्च 2025 तक अंतिम रूप नहीं दी गई थीं और स्वीकृत नहीं हुई थीं।
रेलवे मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि पिछले कुछ समय में विभागीय चयन प्रक्रियाओं में कई अनियमितताएं सामने आई हैं। इसे ध्यान में रखते हुए विभागीय चयन प्रक्रिया की रूपरेखा की समीक्षा करने का निर्णय लिया गया है। इसलिए, सभी लंबित चयन जो 4 मार्च 2025 तक स्वीकृत नहीं हुए हैं, उन्हें रद्द माना जाए। मंत्रालय ने यह भी कहा कि, अगले आदेश तक कोई भी नई चयन प्रक्रिया शुरू नहीं की जाएगी। आगे चयन प्रक्रिया को नियंत्रित करने के लिए विस्तृत निर्देश जल्द ही जारी किए जाएंगे।
रेलवे मंत्रालय का यह निर्णय सीबीआई जांच के बाद आया है। रेलवे के इस निर्णय से पहले केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो ने उत्तर प्रदेश के मुगलसराय में पूर्व मध्य रेलवे के 26 अधिकारियों को गिरफ्तार किया। इन अधिकारियों पर विभागीय परीक्षा के प्रश्न पत्र लीक करने का आरोप लगा था। सीबीआई ने आठ स्थानों पर छापेमारी की। इसमें ₹1.17 करोड़ नकद बरामद किए गए। यह पैसा कथित रूप से उम्मीदवारों से प्रश्न पत्र लीक करने के बदले लिया गया था। जांच के दौरान हाथ से लिखे गए प्रश्न पत्रों और उनकी फोटोकॉपी जब्त की गईं, जिनकी तुलना मूल प्रश्न पत्रों से की गई और वे पूरी तरह से मेल खाते पाए गए।
17 लोको पायलट प्रश्न पत्र खरीदते हुए रंगे हाथ पकड़े गए
सीबीआई की जांच में पाया गया कि 3-4 मार्च 2025 की रात 17 विभागीय उम्मीदवारों को प्रश्नपत्र लीक कर दिया गया था। ये सभी उम्मीदवार वर्तमान में लोको पायलट के रूप में कार्यरत थे और उन्हें प्रश्नपत्रों की कॉपी के साथ रंगे हाथ पकड़ा गया। इसके बाद सभी 17 उम्मीदवारों को गिरफ्तार कर लिया गया।
दरअसल, सीबीआई जांच में यह सामने आया कि सीनियर DEE (Ops) अधिकारी को इस परीक्षा के प्रश्न पत्र तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई थी। उन्होंने प्रश्न अंग्रेजी में तैयार किए और फिर एक लोको पायलट को सौंप दिए, जिसने उन्हें हिंदी में अनुवाद किया. इसके बाद एक ऑफिस सुपरिटेंडेंट को यह प्रश्न पत्र दिए गए, जिसने रेलवे के कुछ अन्य कर्मचारियों के माध्यम से उम्मीदवारों तक इसे पहुंचाया।