भारत के पास लंबे समय से और तेजी से बढ़ता अंतरिक्ष कार्यक्रम है। पिछले पांच सालों में इसका तेजी से विस्तार हुआ है। मंगल ग्रह पर मंगलयान मिशन को सफलतापूर्वक लॉन्च किया गया। इसके बाद सरकार ने गगनयान मिशन को मंजूरी दे दी है जो भारतीयों को बाहरी अंतरिक्ष में ले जाएगा।
क्या भारत अंतरिक्ष में हथियारों की रेस में शामिल हो गया?
- भारत का बाहरी अंतरिक्ष में हथियारों की दौड़ में शामिल होने का कोई इरादा नहीं है। हमने हमेशा यह सुनिश्चित किया है कि अंतरिक्ष का उपयोग केवल शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए किया जाना चाहिए। हम बाहरी अंतरिक्ष के हथियारकरण के खिलाफ हैं और अंतरिक्ष आधारित संपत्तियों की बचाव और सुरक्षा को मजबूत करने के अंतरराष्ट्रीय प्रयासों का समर्थन करते हैं।
- यह सिर्फ इसलिए किया गया ताकि कोई संदिग्ध सैटलाइट भारतीय अंतरिक्ष सीमा में प्रवेश न कर सके। इससे दुश्मन देशों के लिए भारत की जासूसी करना मुश्किल होगा। इसके अलावा अंतरिक्ष में भारत के संसाधनों की भी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी।
क्या यह परीक्षण किसी देश के खिलाफ है?
- यह परीक्षण किसी भी देश के खिलाफ नहीं है। भारत की अंतरिक्ष क्षमताओं से किसी देश को खतरा नहीं है और न ही वे किसी के खिलाफ हैं।
- साथ ही सरकार देश के राष्ट्रीय सुरक्षा हितों को सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है और उभरती प्रौद्योगिकियों से होने वाले खतरों को लेकर सतर्क है। एंटी-सैटेलाइट मिसाइल परीक्षण के माध्यम से हासिल की गई क्षमता लंबी दूरी की मिसाइलों से होने वाले हमारी बढ़ती अंतरिक्ष-आधारित संपत्तियों के खतरों के खिलाफ विश्वसनीय निरोध प्रदान करती है।